Nana Patekar Death: दिल्ली मुंबई : नाना पाटेकर के निधन की खबर से भारतीय फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। दमदार आवाज, बेबाक संवाद अदायगी, संजीदा अभिनय और अपने बिल्कुल अलग अंदाज के लिए मशहूर नाना पाटेकर ने 75 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। रिपोर्टों के मुताबिक गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल से जुड़ी रिपोर्टों में कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया है।
नाना पाटेकर के इंतकाल की खबर सामने आते ही बॉलीवुड से लेकर मराठी फिल्म इंडस्ट्री तक शोक की लहर दौड़ गई। फिल्मी दुनिया से जुड़े कलाकारों और उनके चाहने वालों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अपने लगभग पांच दशक लंबे फिल्मी सफर में नाना पाटेकर ने ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें दर्शक आज भी याद करते हैं।
उनकी खासियत यह थी कि वह पर्दे पर किरदार को केवल निभाते नहीं थे, बल्कि उसमें पूरी तरह उतर जाते थे। चाहे गंभीर भूमिका हो, खलनायक का किरदार हो, पुलिस अधिकारी का रोल हो, राजनीतिक चरित्र हो या फिर कॉमेडी—उन्होंने हर भूमिका में अपनी अलग पहचान बनाई।

अचानक निधन से सदमे में फिल्म जगत۔۔Nana Patekar Death
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नाना पाटेकर को गोवा स्थित उनके घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल ने कार्डियक अरेस्ट की पुष्टि की, हालांकि इसके पीछे की विशिष्ट चिकित्सकीय वजह की जानकारी अलग से स्पष्ट नहीं की गई है। Nana Patekar Death
नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा पहुंचाया है। सोशल मीडिया पर लोग उनके फिल्मी किरदारों, संवादों और पुरानी फिल्मों को याद कर रहे हैं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उनके जाने को एक बड़े अध्याय का अंत माना जा रहा है।
उनकी अदाकारी में बनावट कम और हकीकत ज्यादा नजर आती थी। यही वजह रही कि वह बड़े पर्दे पर जब कोई संवाद बोलते थे तो वह सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंचता था। उनकी आवाज और चेहरे के भाव ही कई बार पूरे दृश्य का असर बदल देते थे।
नाना पाटेकर केवल मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने मराठी सिनेमा और रंगमंच में भी महत्वपूर्ण काम किया। गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के साथ उन्होंने लोकप्रिय फिल्मों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ तक, यादगार किरदारों की लंबी फेहरिस्त
नाना पाटेकर ने 1978 की फिल्म ‘गमन’ से बड़े पर्दे की अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे अपनी एक अलग पहचान कायम की। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
Nana Patekar Death
इसके बाद ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’, ‘अंगार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’, ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।
‘क्रांतिवीर’ में उनके अभिनय को विशेष तौर पर खूब सराहा गया और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। कुल मिलाकर उनके खाते में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार रहे।
कॉमेडी के क्षेत्र में भी नाना पाटेकर ने अपनी अलग छाप छोड़ी। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार ने उन्हें नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय बना दिया। गंभीर और संजीदा भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले नाना ने इस फिल्म में हास्य का ऐसा रंग दिखाया कि उनका किरदार आज भी लोगों की जुबान पर है।
मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में भी उनके अभिनय की जमकर तारीफ हुई। इस फिल्म ने उनके अभिनय के एक और पहलू को दर्शकों के सामने रखा और उन्हें मराठी सिनेमा में भी विशेष सम्मान दिलाया।
नाना पाटेकर को 2013 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनका फिल्मी सफर केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने निर्देशन और लेखन में भी काम किया।
सादगी, सामाजिक सरोकार और यादगार फिल्मी खिदमत
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं थी। पर्दे के बाहर भी वह सादगी और सामाजिक सरोकारों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका काम महाराष्ट्र में सूखे और किसानों से जुड़े संकट के दौरान मदद पहुंचाने से जुड़ा रहा। Nana Patekar Death
उनका जीवन मुंबई की चमक-दमक से अलग अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ दिखाई देता था। यही सादगी उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा रही। उनके बारे में अक्सर यह बात सामने आती रही कि वह स्टारडम से ज्यादा अपने काम को अहमियत देते थे।
नाना पाटेकर का फिल्मी योगदान इसलिए भी खास माना जाएगा क्योंकि उन्होंने एक ही तरह के किरदारों में खुद को बांधकर नहीं रखा। उन्होंने खलनायक भी निभाया, नायक भी, पुलिस अधिकारी भी बने, गैंगस्टर भी और सामाजिक सरोकार रखने वाले किरदार भी।
उनकी संवाद अदायगी उनकी सबसे बड़ी पहचान में से एक थी। वह संवाद बोलते समय शब्दों के साथ-साथ आवाज के उतार-चढ़ाव और चेहरे के भावों का ऐसा इस्तेमाल करते थे कि साधारण संवाद भी यादगार बन जाता था।
उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसकी जगह भरना आसान नहीं होगा। नाना पाटेकर की फिल्मों के किरदार, उनकी आवाज, उनका अंदाज और पर्दे पर उनकी मौजूदगी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अभिनय की एक मिसाल बनी रहेगी।
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर लगभग पांच दशक का रहा। ‘गमन’ से शुरू हुआ यह सफर ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘नटसम्राट’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों से होते हुए भारतीय सिनेमा की यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान उनके लंबे और प्रभावशाली फिल्मी सफर की गवाही देते हैं।
उनका जाना केवल एक अभिनेता का जाना नहीं, बल्कि अभिनय की उस शैली का जाना है जिसमें संवाद में ताकत, चेहरे पर कहानी और किरदार में जिंदगी नजर आती थी। भारतीय सिनेमा उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखेगा।
ईश्वर दिवंगत अभिनेता की आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार, मित्रों तथा करोड़ों प्रशंसकों को यह गहरा दुःख सहन करने की शक्ति दे। Nana Patekar Death
Sources : Reuters , The New Indian Express, RozTakNews,Al Jazeera, Times of India, Indian Express













