Jamiat Pokhran Meeting 2026: पोकरण/नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026। देशभर में दीनी तालीम, समाज सुधार और जनसेवा के कामों को आगे बढ़ाने के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपनी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया है। राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण स्थित दारुल उलूम इस्लामिया में संगठन का नौवां केंद्रीय छमाही मशविरा आयोजित किया गया। तीन दिवसीय इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए जिम्मेदारों ने पिछले छह महीने के कामकाज की समीक्षा की और अगले छह महीने के लिए नए लक्ष्य तय किए।
जमीयत की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच देशभर में 5,352 नए दीनी मक्तब स्थापित किए गए। इसके अलावा 14,708 नए स्थानों पर कुरआन और हदीस के दर्स का सिलसिला शुरू हुआ। संगठन के रफीक कार्यक्रम से 9,400 युवाओं को जोड़ा गया, जबकि जन विकास सेवा के लिए 484 गांवों का चयन किया गया।
बैठक में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने संगठन के पदाधिकारियों को समाज और देश की सेवा को प्राथमिकता देने तथा युवाओं को नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने का संदेश दिया। मशविरा में शिक्षा, सामाजिक सुधार, संगठन की मजबूती और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह बैठक केवल बीते छह महीने के कामों का हिसाब-किताब पेश करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि आने वाले समय में संगठन की गतिविधियों को गांवों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने की योजना बनाने का भी अवसर बनी।
छह महीने में 5,352 नए मक्तब, अगले चरण के लिए भी बड़ा लक्ष्य
जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में दीनी तालीम के विस्तार को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में पहले से ही 63 हजार से ज्यादा दीनी मक्तब संचालित हैं। पिछले छह महीनों में इनमें 5,352 नए मक्तब और शामिल हुए। Jamiat Pokhran Meeting 2026
मक्तब बच्चों को बुनियादी धार्मिक शिक्षा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। यहां कुरआन पढ़ने, दीन की बुनियादी बातों को समझने और इस्लामी नैतिक मूल्यों की जानकारी हासिल करने का अवसर मिलता है। जमीयत ने इसी जरूरत को देखते हुए मक्तबों की संख्या बढ़ाने के साथ शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षिक गतिविधियों की निगरानी को भी जरूरी बताया।
आगामी छह महीनों में 5,332 और नए मक्तब स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रीय इकाइयों को अपनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। Jamiat Pokhran Meeting 2026
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मक्तबों का विस्तार केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाए। बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की तैयारी, पढ़ाई के तरीके और शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत पर चर्चा हुई।
जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने दीनी तालीमी बोर्ड और मक्तबों के विस्तार से संबंधित प्रस्ताव पेश किए। उन्होंने बुनियादी धार्मिक शिक्षा को मजबूत करने, नए मक्तब स्थापित करने, शिक्षकों को प्रशिक्षण देने और शैक्षिक गतिविधियों की प्रभावी निगरानी की जरूरत पर जोर दिया।
बैठक में तय किए गए लक्ष्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि संगठन आने वाले समय में धार्मिक शिक्षा को अधिक से अधिक स्थानों तक पहुंचाने की योजना पर काम करना चाहता है। हालांकि, इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर तालमेल, प्रशिक्षित शिक्षकों और नियमित निगरानी की जरूरत होगी।

14,708 स्थानों पर कुरआन-हदीस का दर्स, युवाओं को जोड़ने की मुहिम..Jamiat Pokhran Meeting 2026
मशविरा में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर 2026 के दौरान 14,708 नए स्थानों पर कुरआन और हदीस के दर्स का सिलसिला शुरू किया गया। इनमें 5,860 नए स्थानों पर दर्स-ए-कुरआन और 8,848 स्थानों पर दर्स-ए-हदीस शुरू होने की जानकारी दी गई।
इस पहल का उद्देश्य धार्मिक शिक्षा और कुरआन-हदीस की जानकारी को अधिक लोगों तक पहुंचाना है। संगठन की योजना के तहत स्थानीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनसे लोगों को धार्मिक शिक्षा हासिल करने के साथ नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिले। Jamiat Pokhran Meeting 2026
बैठक में युवाओं की भागीदारी पर भी खास ध्यान दिया गया। जमीयत के रफीक कार्यक्रम से पिछले छह महीनों में 9,400 युवाओं के जुड़ने की जानकारी दी गई।
आज के दौर में युवाओं की भूमिका केवल शिक्षा या रोजगार तक सीमित नहीं है। समाज में जागरूकता फैलाने, जरूरतमंदों की मदद करने और लोगों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने में भी उनकी अहम भूमिका हो सकती है। इसी सोच के तहत संगठन ने युवाओं को आगे लाने और उन्हें जिम्मेदारियां सौंपने पर जोर दिया।
जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने पदाधिकारियों से कहा कि संगठन की गतिविधियों में सेवा भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं को नेतृत्व के अवसर देने और स्थानीय स्तर पर संगठन के कामों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। Jamiat Pokhran Meeting 2026
बैठक में जमीयत के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने भी संगठनात्मक कामों में निष्ठा और ईमानदारी की अहमियत बताई। उनका कहना था कि किसी काम की असल कीमत उसके प्रचार या व्यक्तिगत प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि उसे करने की नीयत और ईमानदारी से तय होती है।
इस संदेश को संगठन के कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे साफ होता है कि जमीयत अपनी गतिविधियों के विस्तार के साथ सेवा भावना और जिम्मेदारी को भी अहमियत देना चाहती है।
समाज सुधार और गांवों की तरक्की पर जोर, अगले छह महीने के लिए तय हुए लक्ष्य
जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में धार्मिक शिक्षा के अलावा सामाजिक सुधार और ग्रामीण विकास से जुड़े कामों की भी समीक्षा की गई। Jamiat Pokhran Meeting 2026
संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में समाज सुधार के लिए 7,351 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में नैतिक प्रशिक्षण, सामाजिक जागरूकता और फिजूलखर्ची रोकने जैसे मुद्दों पर काम किया गया।
सामाजिक सुधार का उद्देश्य लोगों को ऐसी आदतों और रवैयों की तरफ प्रेरित करना है, जिनसे परिवार और समाज में बेहतर माहौल बन सके। शादी-विवाह में अनावश्यक खर्च, सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही और आपसी सहयोग की कमी जैसे मुद्दे समाज के सामने लंबे समय से चुनौती बने हुए हैं।
बैठक में राष्ट्रीय एकता और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, सद्भावना मंच के माध्यम से 356 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनका उद्देश्य अलग-अलग समुदायों के बीच सहयोग, बातचीत और आपसी समझ को मजबूत करना है।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जन विकास सेवा के लिए 484 गांवों का चयन किए जाने की जानकारी दी गई। आगामी छह महीनों में 748 और गांवों को इस अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
गांवों में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और जरूरतमंद लोगों की मदद से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, ऐसे अभियानों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाएं कितनी नियमितता से लागू होती हैं और स्थानीय लोगों को उनमें किस हद तक शामिल किया जाता है। Jamiat Pokhran Meeting 2026
संगठनात्मक मजबूती के लिए पिछले छह महीनों में 115 प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की गईं। अगले छह महीनों में 386 कार्यशालाएं आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पांच हजार से ज्यादा संगठनात्मक बैठकें होने की जानकारी भी दी गई।
बैठक में विभिन्न विभागों की उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए आपसी तालमेल बढ़ाने तथा कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार किया गया। Jamiat Pokhran Meeting 2026
कुल मिलाकर, पोकरण में आयोजित यह मशविरा जमीयत उलमा-ए-हिंद के लिए अगले छह महीनों की दिशा तय करने का अवसर बना। संगठन के सामने अब चुनौती यह होगी कि बैठक में तय किए गए लक्ष्यों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाए और शिक्षा, समाज सुधार तथा जनसेवा के कामों को लगातार आगे बढ़ाया जाए। Jamiat Pokhran Meeting 2026
Sources : जमीयत उलमा-ए-हिंद , Clarion India , हमारी दुनिया न्यूज़













