Asaduddin Owaisi Kairana Rally: कैराना, 25 अक्टूबर (RozTakNews)। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कैराना में जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी की सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकने और अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को विधायक बनाने के लिए पूरी कोशिश करने की बात कही।
कैराना के तीतरवाड़ा रोड स्थित मैदान में आयोजित जनसभा को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार न बने और AIMIM के उम्मीदवार विधानसभा तक पहुंचें।
ओवैसी के इस बयान से साफ है कि AIMIM उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने के साथ-साथ 2027 के चुनाव में अधिक सीटों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति में एक तरफ भाजपा को सत्ता में आने से रोकने का दावा है, तो दूसरी तरफ अपने उम्मीदवारों को चुनाव जिताकर विधानसभा में अपनी आवाज मजबूत करने का लक्ष्य भी शामिल है।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने 28 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ओवैसी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए रामपुर, कैराना और मेरठ में जनसभाएं करने वाले हैं।
BJP को रोकने की बात, AIMIM उम्मीदवारों को जिताने पर जोर
कैराना की जनसभा में ओवैसी का प्रमुख संदेश भाजपा को उत्तर प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने से रोकने और AIMIM को चुनावी तौर पर मजबूत करने से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस दिशा में पूरी ताकत लगाएगी कि भाजपा की सरकार न बने और AIMIM के उम्मीदवार विधायक चुने जाएं। Asaduddin Owaisi Kairana Rally
ओवैसी के बयान में दो बातें खास तौर पर सामने आईं। पहली, भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए राजनीतिक प्रयास करना और दूसरी, अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को विधानसभा तक पहुंचाने के लिए जनता का समर्थन हासिल करना।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत कई दल आगामी चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे माहौल में AIMIM भी अपने लिए राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि विधानसभा में उसके प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने से वह अपने मुद्दों को अधिक मजबूती से उठा सकेगी।
हालांकि, भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए AIMIM किन दलों के साथ गठबंधन करेगी या अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी, यह सवाल भी अहम है। चुनाव में गठबंधन, सीटों का बंटवारा, स्थानीय उम्मीदवार और मतदाताओं का रुख नतीजों पर असर डाल सकते हैं।
सितंबर में कानपुर की एक जनसभा के दौरान भी ओवैसी ने भाजपा को उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाने से रोकने के लिए विपक्षी दलों के साथ आने की अपील की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि जो दल भाजपा को रोकना चाहते हैं, वे AIMIM के साथ हाथ मिलाने पर विचार करें। इस बयान की रिपोर्ट NDTV और दूसरे समाचार माध्यमों ने भी प्रकाशित की थी।
इससे संकेत मिलता है कि भाजपा के खिलाफ चुनावी मुकाबले को लेकर ओवैसी गठबंधन की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं। लेकिन कैराना की सभा में दिए गए बयान के बाद आगे की रणनीति क्या होगी, यह पार्टी के औपचारिक फैसलों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम से स्पष्ट होगा।

मुस्लिम राजनीतिक हिस्सेदारी और अपनी लीडरशिप का मुद्दा
ओवैसी उत्तर प्रदेश में अपनी जनसभाओं के दौरान मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और स्वतंत्र नेतृत्व का मुद्दा भी उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी समाज को केवल वोट देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे राजनीतिक फैसलों और प्रतिनिधित्व में भी उचित जगह मिलनी चाहिए। Asaduddin Owaisi Kairana Rally
कैराना की सभा में भी उनकी राजनीति को इसी व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। AIMIM लंबे समय से यह संदेश देती रही है कि मुस्लिम समाज के युवाओं को राजनीति में आगे आना चाहिए और अपने मुद्दों को विधानसभा तथा दूसरी लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंचाना चाहिए।
ओवैसी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की राजनीति पर भी सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि इन दलों ने मुस्लिम समाज का समर्थन तो हासिल किया, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व और हिस्सेदारी के मामले में उसे अपेक्षित अवसर नहीं दिए। ये ओवैसी के राजनीतिक आरोप हैं; इस मुद्दे पर संबंधित दलों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने 13 अक्टूबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में ओवैसी के उस राजनीतिक संदेश का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने मुस्लिम समाज के भीतर से नेतृत्व उभरने की जरूरत पर जोर दिया और समाजवादी पार्टी की राजनीति की आलोचना की थी। Asaduddin Owaisi Kairana Rally
ओवैसी की इस रणनीति का एक मकसद उन मतदाताओं तक पहुंच बनाना भी है, जो पारंपरिक राजनीतिक दलों के साथ जुड़े रहे हैं, लेकिन अब अपने प्रतिनिधित्व और स्थानीय समस्याओं को लेकर नए विकल्पों पर विचार करना चाहते हैं।
हालांकि, किसी भी समाज का राजनीतिक रुख एक जैसा नहीं होता। मतदाता उम्मीदवार की छवि, पार्टी की नीतियों, विकास कार्यों, शिक्षा, रोजगार, कानून-व्यवस्था और स्थानीय जरूरतों के आधार पर भी फैसला करते हैं। इसलिए केवल किसी एक मुद्दे के आधार पर चुनावी नतीजों का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
कैराना में AIMIM की चुनौती, 2027 के चुनाव पर नजर…Asaduddin Owaisi Kairana Rally
कैराना विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का पहले से मजबूत चुनावी आधार रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के नाहिद हसन ने सीट पर जीत दर्ज की थी। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, नाहिद हसन को 1,31,035 वोट मिले थे, जबकि भाजपा की मृगांका सिंह को 1,05,148 वोट हासिल हुए थे। AIMIM के उम्मीदवार मसीहुल्ला को 1,365 वोट मिले थे।
Asaduddin Owaisi Kairana Rally
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कैराना में AIMIM के सामने अपनी चुनावी पकड़ मजबूत करने की चुनौती है। जनसभा आयोजित करना और समर्थकों को एक मंच पर लाना राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा है, लेकिन विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए बूथ स्तर पर संगठन, मजबूत उम्मीदवार, स्थानीय संपर्क और मतदाताओं का भरोसा जरूरी होता है।
AIMIM यदि कैराना में अपना प्रदर्शन बेहतर करना चाहती है, तो उसे स्थानीय मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, व्यापार, किसानों की समस्याएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ओवैसी की जनसभा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी का आधार बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। पार्टी की ओर से संभावित उम्मीदवारों को आगे लाने और अपने राजनीतिक संदेश को जनता तक पहुंचाने की कोशिश भी चुनावी तैयारियों का हिस्सा है। हालांकि, किसी व्यक्ति की उम्मीदवारी को अंतिम तभी माना जाएगा, जब पार्टी की ओर से औपचारिक घोषणा की जाएगी। Asaduddin Owaisi Kairana Rally
ओवैसी ने भाजपा की सरकार बनने से रोकने और AIMIM के उम्मीदवारों को विधायक बनाने के लिए पूरी कोशिश करने की बात कहकर अपनी चुनावी दिशा का संकेत दिया है। अब देखना होगा कि यह संदेश कैराना और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी के संगठन को कितना मजबूत करता है और 2027 के विधानसभा चुनाव में उसे कितना जनसमर्थन मिलता है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना, राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग
कैराना की जनसभा में ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम समाज को अपनी राजनीतिक ताकत पहचाननी होगी। उनके मुताबिक, केवल किसी राजनीतिक दल को वोट देने से समाज की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी उचित भागीदारी जरूरी है। Asaduddin Owaisi Kairana Rally
उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने लंबे समय तक मुसलमानों के वोट हासिल किए, लेकिन मुस्लिम समाज से आने वाले नेताओं को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने के पर्याप्त अवसर नहीं दिए। ओवैसी ने कहा कि अब मुस्लिम नौजवानों को राजनीति में आगे बढ़कर नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए।
ओवैसी की राजनीति में यह मुद्दा नया नहीं है। वह पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश की विभिन्न जनसभाओं में मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी का सवाल उठा रहे हैं। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में श्रावस्ती और आजमगढ़ की रैलियों में भी उन्होंने समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम नेतृत्व को आगे नहीं बढ़ाने का आरोप लगाया था।
कुल मिलाकर, कैराना की जनसभा ने उत्तर प्रदेश की सियासत में AIMIM की सक्रियता को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। ओवैसी ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने और अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने का संकल्प जताया है। लेकिन चुनावी राजनीति में बयान और दावे तभी नतीजों में बदलते हैं, जब उन्हें मजबूत संगठन, प्रभावी उम्मीदवारों और मतदाताओं के समर्थन का साथ मिलता है। Asaduddin Owaisi Kairana Rally
Sources: BBC Hindi , ANI , हिन्दुस्तान टाइम्स , इंडिया टुडे



















