Israel Government Formation: तेल अवीव। इजराइल में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने के बाद अब सत्ता की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। विपक्षी नेता और याशार पार्टी के प्रमुख गादी आइजनकोट ने नेतन्याहू पर चुनावी नतीजों को कमजोर और विवादित साबित करने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाया है।
आइजनकोट का कहना है कि नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड चुनाव में जरूरी संसदीय बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे हैं। इसके बावजूद चुनावी नतीजों पर सवाल उठाकर नई संसद की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ कहा है कि संसद की प्रक्रिया और कानून के मुताबिक होने वाले कामकाज में किसी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हमारी दुनिया न्यूज की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आइजनकोट ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि नेतन्याहू की ओर से लगाए जा रहे आरोप और दिए जा रहे बयान पहले से तैयार रणनीति का हिस्सा दिखाई देते हैं। उनका आरोप है कि चुनाव में बहुमत नहीं मिलने के बाद अब नतीजों को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने इजराइल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ नेतन्याहू का गठबंधन सबसे बड़े गुट के रूप में सामने आया है, लेकिन बहुमत से दूर है। दूसरी तरफ विपक्ष भी अकेले सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में अरब पार्टियों की 19 सीटें सरकार गठन की पूरी तस्वीर बदलने की ताकत रखती हैं।
53 सीटों पर रुका नेतन्याहू का गठबंधन, बहुमत से आठ कदम दूर
इजराइल की 120 सदस्यीय संसद को कनेस्सेट कहा जाता है। यहां किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। चुनाव के अंतिम आंकड़ों के अनुसार नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आइजनकोट की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुई हैं। Israel Government Formation
वहीं, अरब नेतृत्व वाली दो प्रमुख राजनीतिक ताकतों- जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी ने मिलकर 19 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह अरब पार्टियों का अब तक का सबसे मजबूत चुनावी प्रदर्शन बताया जा रहा है।
इन आंकड़ों से साफ है कि नेतन्याहू का गठबंधन सबसे बड़े गुट के रूप में जरूर सामने आया है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा उससे आठ सीट दूर है। विपक्षी गठबंधन भी बहुमत से पीछे है। हालांकि, अगर विपक्ष को अरब पार्टियों का समर्थन मिल जाता है तो उसके पास 67 सांसदों का आंकड़ा पहुंच सकता है। Israel Government Formation
यही वजह है कि चुनाव के बाद अरब पार्टियों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। उनके समर्थन के बिना विपक्ष के लिए सरकार बनाने का रास्ता काफी मुश्किल दिखाई देता है। लेकिन यहां भी राजनीतिक पेच कम नहीं हैं। आइजनकोट और उनके सहयोगियों के सामने यह चुनौती है कि वे अरब पार्टियों के समर्थन को किस रूप में स्वीकार करते हैं और क्या सभी सहयोगी दल इस पर एकमत हो पाते हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अरब पार्टियों की बढ़ी हुई ताकत के बावजूद सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं है। इजराइल की कई राजनीतिक पार्टियां उनके साथ औपचारिक गठबंधन करने को लेकर पहले ही अपनी आपत्ति जता चुकी हैं।

चुनावी गड़बड़ी और बाहरी दखल के आरोप, आइजनकोट ने की निष्पक्ष जांच की मांग..Israel Government Formation
चुनाव के बाद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके सहयोगियों की ओर से कथित चुनावी गड़बड़ियों तथा बाहरी हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए गए हैं। नेतन्याहू ने अरब पार्टियों की बढ़ी हुई सीटों को लेकर भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। Israel Government Formation
रॉयटर्स की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने अरब पार्टियों की चुनावी सफलता के पीछे कथित वोटों की हेराफेरी का आरोप लगाया, जबकि अरब नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक अभियान बताया। इजराइली चुनाव अधिकारियों ने भी कहा कि चुनाव की निष्पक्षता को बड़े स्तर पर प्रभावित करने वाली किसी व्यवस्थित गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।
इसी मुद्दे पर आइजनकोट ने कहा कि यदि बाहरी हस्तक्षेप या किसी तरह की चुनावी गड़बड़ी की आशंका है तो उसकी पूरी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन जांच के नाम पर चुनावी नतीजों को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाना और संसद की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करना सही नहीं है। Israel Government Formation
उन्होंने यह भी साफ किया कि नई कनेस्सेट के सदस्यों के शपथ ग्रहण और संसद की निर्धारित कार्यवाही में देरी या बदलाव की कोशिश का विरोध किया जाएगा। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव के नतीजों और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी है।
आइजनकोट का यह बयान ऐसे समय आया है जब इजराइल में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में बहुमत नहीं मिलने के बाद नेतन्याहू अपनी सत्ता बचाने के लिए नतीजों पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, नेतन्याहू का पक्ष चुनावी अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहा है।
इसलिए फिलहाल यह मामला केवल दो नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संसद की अगली कार्यवाही से भी जुड़ गया है।
सरकार गठन के तीन रास्ते, क्या अरब पार्टियां बनेंगी निर्णायक?
इजराइल में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली सरकार किसकी बनेगी और नेतन्याहू प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बने रहेंगे या नहीं। चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक जानकारों के सामने कई संभावनाएं हैं। Israel Government Formation
पहला रास्ता नेतन्याहू के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटाकर बहुमत हासिल करना है। उनका गठबंधन 53 सीटों के साथ सबसे बड़ा गुट है। अगर वे विपक्षी दलों के कुछ सांसदों या दूसरे राजनीतिक समूहों को अपने साथ लाने में कामयाब होते हैं तो सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
दूसरा रास्ता गादी आइजनकोट के नेतृत्व में विपक्षी सरकार बनाने का है। विपक्ष के पास 48 सीटें हैं और अरब पार्टियों के 19 सांसदों का समर्थन मिलने पर यह संख्या 67 तक पहुंच सकती है। लेकिन इस रास्ते में भी राजनीतिक मुश्किलें हैं। विपक्ष के सभी सहयोगी दल अरब पार्टियों के साथ गठबंधन या उनके समर्थन को लेकर एक जैसी राय नहीं रखते। Israel Government Formation
तीसरी संभावना राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने की है। ऐसी स्थिति में नेतन्याहू और विपक्ष के कुछ बड़े नेता किसी साझा समझौते पर पहुंच सकते हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच गहरे राजनीतिक मतभेद को देखते हुए यह रास्ता भी आसान नहीं है।
रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक, यदि कोई भी पक्ष सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन हासिल नहीं कर पाता है तो इजराइल को एक बार फिर चुनाव की ओर जाना पड़ सकता है। फिलहाल नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर पद पर बने हुए हैं और नई सरकार बनने तक यही व्यवस्था जारी रहेगी। Israel Government Formation
कुल मिलाकर इजराइल का चुनावी नतीजा किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दे पाया है। नेतन्याहू का गठबंधन सबसे बड़ा गुट होने के बावजूद बहुमत से दूर है, जबकि विपक्ष को सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। गादी आइजनकोट ने चुनावी प्रक्रिया और संसद की गरिमा बनाए रखने का संदेश देकर नेतन्याहू पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और इजराइल की अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनती है। Israel Government Formation
🌐 Sources: Reuters , The Times of Israel
















