Cyber Security Challenges: नई दिल्ली।भारत को रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बड़ा संदेश दिया है। IAF-SIDM (Society of Indian Defence Manufacturers) की संयुक्त कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केवल आधुनिक हथियार ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा, सुरक्षित नेटवर्क, डेटा प्राइवेसी, स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी भारत की असली ताकत बनेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भारत को रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना है तो हर महत्वपूर्ण तकनीक पर देश का अपना नियंत्रण होना चाहिए।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि आज के दौर में युद्ध केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रह गया है। अब साइबर स्पेस भी युद्ध का एक अहम मोर्चा बन चुका है। ऐसे में भारत के पास अपने सॉवरेन टेक्नोलॉजी स्टैक (Sovereign Stacks), सुरक्षित नेटवर्क, भरोसेमंद डेटा स्टोरेज और मजबूत डेटा प्राइवेसी सिस्टम होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विदेशी तकनीकों पर पूरी तरह निर्भर रहना भविष्य में सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत को जिन तकनीकों का विकास करना है, उन पर बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) भी भारत के पास होने चाहिए। उनका कहना था कि यदि तकनीक पर अपना अधिकार होगा, तभी जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव, अपग्रेड, एन्कोडिंग और डिकोडिंग जैसे कार्य स्वतंत्र रूप से किए जा सकेंगे। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा प्रणाली दोनों मजबूत होंगी।
भविष्य के युद्धों में स्वदेशी AI एल्गोरिद्म बेहद अहम..
एयर चीफ ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्धों में स्वदेशी AI एल्गोरिद्म बेहद अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत को अपने AI मॉडल और एल्गोरिद्म विकसित करने होंगे ताकि रक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सके। उनके अनुसार AI केवल हथियारों के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निगरानी, निर्णय लेने, साइबर सुरक्षा और रक्षा रणनीति तैयार करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। Cyber Security Challenges

भारत को बड़ी संख्या में AI विशेषज्ञों जरूरत Cyber Security Challenges
अपने संबोधन में उन्होंने रक्षा क्षेत्र में मौजूद स्किल गैप पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत को बड़ी संख्या में ऐसे पेशेवरों की जरूरत है जो AI, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, मैटेरियल साइंस और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ हों। उन्होंने कहा कि यदि देश को रक्षा उत्पादन और आधुनिक तकनीकों में आगे बढ़ना है तो इन क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन तैयार करना होगा। Cyber Security Challenges
रक्षा उपकरण बनाना ही काफी नहीं: एयर चीफ मार्शल एपी सिंह…
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि केवल रक्षा उपकरण बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके रखरखाव (Maintenance), अपग्रेड और तकनीकी सुधार के लिए भी प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि एयरोडायनामिक डिजाइन और प्रोपल्शन जैसी तकनीकों में भी भारत को अपनी क्षमता लगातार बढ़ानी होगी। Cyber Security Challenges
उन्होंने कहा कि सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को रक्षा क्षेत्र में नई गति देने के लिए उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और रक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को भी रक्षा तकनीकों के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
दुनिया में साइबर हमलों और डिजिटल जासूसी की घटनाएं बढ़ रही हैं…
विशेषज्ञों का मानना है कि आज पूरी दुनिया में साइबर हमलों और डिजिटल जासूसी की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में भारत का अपना सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में AI और साइबर सुरक्षा पर बढ़ता निवेश आने वाले वर्षों में भारत की रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई दे सकता है।Cyber Security Challenges
IAF-SIDM कार्यशाला में दिए गए एयर चीफ के इस बयान को रक्षा क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक विजन के रूप में देखा जा रहा है। उनका संदेश साफ था कि भविष्य की सुरक्षा केवल आधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि देशी तकनीक, मजबूत साइबर सुरक्षा, स्वदेशी AI और कुशल मानव संसाधन से तय होगी। यदि भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ता है, तो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य और मजबूत होगा। Cyber Security Challenges
Sources: PTI, ANI, The News Mill , PIB, Indian Air Force
















3 thoughts on “Cyber Security Challenges : IAF चीफ का बड़ा ऐलान, देशी AI से मजबूत होगी भारत की ताकत”