Nepal Flash Flood: काठमांडू। हिमालयी इलाके में कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते पानी, मलबे और पत्थरों की तेज धार ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा के पास 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। शुरुआती खबरों में मौतों का आंकड़ा कम बताया गया था, लेकिन राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
रॉयटर्स की 27 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में करीब 1,500 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें लगभग 800 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल में मृतकों की संख्या 165 से ऊपर पहुंचने की बात सामने आई है, जबकि तिब्बत में तीन लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर है और बचाव अभियान अभी जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा फिलहाल तय नहीं माना जा सकता।
यह हादसा नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले और चीन के तिब्बत क्षेत्र में खास तौर पर भारी पड़ा है। तेज पानी और मलबे ने रास्तों को काट दिया, पुल बहा दिए और कई इलाकों में बिजली व संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई। इस वजह से राहत दलों को प्रभावित गांवों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्लेशियर का हिस्सा टूटा और मलबे के साथ आई तबाही
इस हादसे की सबसे अहम वजह को लेकर शुरुआती तौर पर भूकंप की चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के आकलन में सामने आया कि जिस भूकंपीय संकेत को पहले भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के टूटकर नीचे गिरने से पैदा हुआ था। इसके बाद ग्लेशियर, चट्टान और मलबे का भारी प्रवाह नदी में पहुंचा और पानी की रफ्तार अचानक बेहद खतरनाक हो गई। Nepal Flash Flood
रॉयटर्स के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती अध्ययन से पता चलता है कि करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आया। इसके साथ भारी मात्रा में चट्टान और मलबा भी नीचे पहुंचा। इस पूरे घटनाक्रम ने ल्हेंदे खोला नदी में मलबे से भरा तेज बहाव पैदा किया, जिसने आगे चलकर बस्तियों और बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया।

इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में पानी और कीचड़ की मोटी परत जमा हो गई है। घर, वाहन, पेड़ और दूसरी चीजें मलबे में दब गईं। कुछ इलाकों में लोगों को अपने परिजनों की तलाश के लिए सेना के ठिकानों के बाहर जमा होना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अचानक पानी, पत्थर और कीचड़ का सैलाब आया और जो रास्ते कुछ मिनट पहले सामान्य दिखाई दे रहे थे, वे तबाही के मैदान में बदल गए।

रॉयटर्स ने एक स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी के हवाले से बताया कि नदी के किनारे बसे कई इलाके पूरी तरह बह गए और उसके अपने परिवार के कई सदस्य भी लापता हैं। ऐसे हालात में राहतकर्मियों के लिए मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल बना हुआ है।
सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह, बचाव अभियान जारी
फ्लैश फ्लड ने सिर्फ लोगों के घरों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि पूरे इलाके की कनेक्टिविटी पर भी गहरा असर डाला है। नेपाल में कई सड़कें और पुल बह गए हैं। बिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ इलाकों में बिजली गुल होने से रात के समय राहत अभियान और भी मुश्किल हो गया। Nepal Flash Flood
रॉयटर्स के अनुसार हजारों सैनिकों और पुलिसकर्मियों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। हेलीकॉप्टरों के जरिये प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री, टेंट और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। कई लोगों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया गया है।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार 5,000 से अधिक सेना और पुलिस के जवान बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। कई इलाकों में रास्ते टूट जाने के कारण जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल है, इसलिए हवाई अभियान पर काफी निर्भरता बढ़ गई है। गुरुवार तक 125 लोगों को बचाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक हैं। चीन ने तीन मौतों की पुष्टि की है और आसपास के जोखिम वाले गांवों को खाली कराया गया है।
हालात को और पेचीदा बनाने वाली बात यह है कि चीनी अधिकारियों ने आपदा प्रभावित क्षेत्र के ऊपर एक संभावित बांधयुक्त झील से जुड़े खतरे की भी पहचान की है। जल संसाधन विभाग उसकी निगरानी कर रहा है, ताकि किसी दूसरी प्राकृतिक घटना से हालात और खराब न हों।
इस आपदा का असर नेपाल की सीमाओं से आगे भी दिखाई दे रहा है। नेपाल से नीचे की ओर बहने वाली नदियों को लेकर भारत के कुछ हिस्सों में भी अलर्ट जारी किए गए। रॉयटर्स के मुताबिक बिहार में करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और आगे भी हजारों लोगों को हटाने की तैयारी की गई।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा असर, कई विदेशी नागरिक लापता۔۔۔Nepal Flash Flood
यह इलाका कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए भी अहम मार्ग है। इसी वजह से लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की बताई जा रही है। नेपाल में लापता लोगों में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों के नागरिक शामिल हैं। रॉयटर्स के अनुसार नेपाल में लापता लोगों में 177 भारतीय नागरिक भी बताए गए हैं। Nepal Flash Flood
कैलाश मानसरोवर हिंदू और बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए बेहद पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु इस क्षेत्र की यात्रा करते हैं। इस समय भी कई यात्री और तीर्थयात्री हिमालयी मार्गों से होकर आगे बढ़ रहे थे। अचानक आई इस आपदा ने उनकी यात्रा को भारी संकट में डाल दिया। Nepal Flash Flood
विदेशी नागरिकों के लापता होने के कारण कई देशों की सरकारें भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने में लगी हैं। ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने कम से कम 34 नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी है। दक्षिण कोरिया के कुछ नागरिक भी प्रभावित इलाके में एक जलविद्युत परियोजना से जुड़े थे और उनके बारे में संपर्क नहीं हो पाया।
भारत की ओर से भी नेपाल को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हेलीकॉप्टरों के जरिए टेंट, भोजन और जरूरी सामान पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान के लिए संसाधन और कर्मियों की मदद जुटाने की बात कही है।
Nepal Flash Flood
इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चिंता जताते रहे हैं। हालांकि इस खास हादसे में जलवायु परिवर्तन की भूमिका कितनी रही, इसका अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
हिमालय का इलाका पहले से ही भूस्खलन, ग्लेशियर टूटने, अचानक बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इस हादसे ने यह जरूरत और मजबूत कर दी है कि सीमा से जुड़े पहाड़ी क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम, सैटेलाइट निगरानी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। Nepal Flash Flood
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे और लापता लोगों को तलाशना है। कई परिवार अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। टूटे रास्तों, खराब मौसम, बिजली संकट और नदी में तेज बहाव के बीच राहतकर्मियों की कोशिश जारी है।
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई यह फ्लैश फ्लड सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में इंसानी जिंदगी, पर्यटन, व्यापार, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे की संवेदनशीलता की भी बड़ी तस्वीर सामने लाती है। अब उम्मीद यही है कि बचाव दल ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल सकें और लापता लोगों की तलाश जल्द पूरी हो। Nepal Flash Flood
Sources : Reuters, Al Jazeera



















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