Delhi Building Collapse: नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मलबे के नीचे बड़ी तादाद में लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। इमारत में छात्रों के लिए पीजी/हॉस्टल चलने की बात सामने आई है। हादसे के वक्त रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र इमारत के अंदर मौजूद बताए जा रहे हैं।
ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक इस हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इंडियन एक्सप्रेस ने दो लोगों के मारे जा ने की जानकारी दी है, जबकि कुछ अन्य शुरुआती रिपोर्टों में एक मौत की बात कही गई थी। ऐसे में राहत और बचाव अभियान के बीच मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग अपडेट सामने आए हैं।
मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या अभी आधिकारिक तौर पर साफ नहीं हुई है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दर्जनों छात्र अंदर हो सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में 30 से 50 छात्रों तक के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई है, हालांकि प्रशासन ने इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

हॉस्टल में रहते थे छात्र, बेसमेंट में चल रहा था काम
जानकारी के मुताबिक ढही हुई इमारत को ‘Hostel Daze’ के नाम से जाना जाता था और इसमें छात्रों के लिए पीजी सुविधा उपलब्ध थी। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के बेहद करीब है और यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी, हॉस्टल और किराये के मकानों में रहते हैं।
Delhi Building Collapse
दिल्ली पुलिस के मुताबिक इमारत गिरने की सूचना रविवार दोपहर करीब 1:34 बजे मिली। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस, एनडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और बचाव दल मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों को तलाशने में जुटे हैं।
इस हादसे को लेकर सबसे बड़ा सवाल इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों के हवाले से सामने आया है कि इमारत में बेसमेंट के स्तर पर निर्माण अथवा मरम्मत का काम चल रहा था। कुछ रिपोर्टों में बेसमेंट में पानी जमा होने और नींव कमजोर होने की बात भी कही गई है। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। Delhi Building Collapse
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इमारत गिरने के बाद आसपास के मकानों में रहने वाले लोग भी घबराकर बाहर निकल आए। कुछ लोगों ने शुरुआती दौर में अपने हाथों और उपलब्ध सामान से मलबा हटाने की कोशिश की। बाद में राहत और बचाव दलों ने भारी मशीनरी के जरिए अभियान तेज किया।
सबसे दिल दहला देने वाली बात यह सामने आई कि मलबे के नीचे फंसे कुछ लोगों की ओर से मोबाइल फोन के जरिए मदद की गुहार लगाए जाने की खबरें भी आईं। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के विधायक अनिल शर्मा ने भी कहा कि कुछ छात्र मलबे के अंदर से फोन कर रहे थे, हालांकि अंदर फंसे लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी।
अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमाई सियासत
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण और पीजी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में मकानों को छात्रों के लिए पीजी में तब्दील किया गया है। Delhi Building Collapse
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से कहा गया है कि इलाके में कई मकानों को छात्र पीजी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और कुछ इमारतों की मंजिलों तथा निर्माण को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि इलाके में पांच-छह मंजिल तक की इमारतें बनी हुई हैं। इन दावों की प्रशासनिक स्तर पर जांच होना अभी बाकी है।
हादसे ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली में कथित अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार तथा नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि बिल्डिंग विभाग में अधिकारियों के तबादलों को लेकर बड़ी रकम के लेन-देन की चर्चा है और इसी वजह से अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। उनके द्वारा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के ट्रांसफर के लिए 1.25 करोड़ रुपये की कथित दर का आरोप भी लगाया गया है।
हालांकि, इन भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है और इन्हें सियासी आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रशासनिक जांच और तकनीकी जांच जरूरी होगी। Delhi Building Collapse
AAP नेताओं ने मामले में उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से राहत और बचाव अभियान को युद्धस्तर पर चलाए जाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अधिकारियों को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
एक हादसा, कई सवाल—क्या सबक लेगा प्रशासन?Delhi Building Collapse
सत्य निकेतन का हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के आसपास हजारों छात्र पीजी और निजी हॉस्टलों में रहते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि इन सभी इमारतों की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी, बिजली व्यवस्था, निकासी के रास्ते और निर्माण की अनुमति की जांच की जाए। Delhi Building Collapse
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि किसी रिहायशी इमारत को बड़ी संख्या में छात्रों के रहने के लिए पीजी में बदल दिया गया है तो क्या उसकी सुरक्षा व्यवस्था भी उसी अनुपात में बढ़ाई गई है? क्या भवन की क्षमता के मुताबिक छात्रों को रखा जा रहा है? क्या फायर विभाग और स्थानीय निकाय से जरूरी अनुमति ली गई है? और क्या समय-समय पर इमारत की स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जाती है?
इन सवालों का जवाब अब प्रशासन को देना होगा।
हादसे के बाद आसपास की इमारतों को लेकर भी एहतियात बरती जा रही है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पास की एक इमारत को भी नुकसान पहुंचा है और उसे सावधानी के तौर पर खाली कराया गया। Delhi Building Collapse

यह हादसा उस वक्त हुआ है जब दिल्ली में बरसात का मौसम चल रहा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की ओर से बेसमेंट में चल रहे काम, पानी जमा होने और नींव की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। लेकिन वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हर गुजरते मिनट के साथ बचाव दलों पर दबाव बढ़ रहा है। परिवार अपने बच्चों की सलामती के लिए परेशान हैं और अस्पतालों में घायलों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। Delhi Building Collapse
सत्य निकेतन की यह त्रासदी प्रशासन के लिए एक कड़ा इम्तिहान है। अगर जांच में नियमों की अनदेखी, अवैध निर्माण या सुरक्षा मानकों की लापरवाही सामने आती है तो सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई से बात पूरी नहीं होगी। जिम्मेदारी जहां तक जाती है, वहां तक जांच पहुंचनी चाहिए। छात्रों की जिंदगी किसी भी बिल्डिंग मालिक, ठेकेदार या अधिकारी की लापरवाही से ज्यादा कीमती है।
फिलहाल मृतकों की संख्या को लेकर नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों में दो मौतों की पुष्टि सामने आई है, जबकि कई लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका बनी हुई है। राहत एवं बचाव अभियान जारी है। Delhi Building Collapse
Sources: Indian Express , ThePrint











