Prashant Kishor Victory: पटना। बिहार की राजनीति में सोमवार को ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने आखिरकार अपनी पहली बड़ी चुनावी जीत दर्ज कर ली। उन्होंने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को 18,953 वोटों के अंतर से हराकर नया राजनीतिक इतिहास रच दिया। यह वही सीट है जिसे भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि “यह बांकीपुर की जनता की जीत है। यह सिर्फ विधायक चुनने का चुनाव नहीं था, बल्कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश देने का चुनाव था।” उन्होंने दावा किया कि जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और यह परिणाम बिहार की राजनीति में नई शुरुआत का संकेत है।
क्यों खास है बांकीपुर सीट?
बांकीपुर विधानसभा सीट केवल एक सामान्य विधानसभा क्षेत्र नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में गिनी जाती है। पहले इसे पटना वेस्ट के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1995 से लगातार यह सीट भाजपा के कब्जे में रही। पहले यहां से भाजपा के वरिष्ठ नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा कई बार विधायक बने। उनके निधन के बाद वर्ष 2006 के उपचुनाव में उनके पुत्र नितिन नवीन पहली बार विधायक बने और उसके बाद लगातार इस सीट से जीतते रहे। Prashant Kishor Victory
हाल ही में नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा पहुंचे, जिसके कारण यह सीट खाली हुई और उपचुनाव कराया गया। यही वजह रही कि इस चुनाव को पूरे देश में भाजपा की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा गया।
प्रशांत किशोर ने क्यों चुनी यही सीट? Prashant Kishor Victory
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर चाहते तो किसी आसान सीट से चुनाव लड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ को चुना। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर बिहार बदलना है तो राजनीति को जाति और धर्म से ऊपर उठाना होगा। उनका कहना था कि आसान सीट से जीतने के बजाय कठिन चुनौती स्वीकार करना ही असली राजनीति है। Prashant Kishor Victory

कड़ा मुकाबला, लेकिन जनता ने दिया साफ संदेश
मतगणना के शुरुआती दौर से ही प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए थे। हर राउंड के साथ उनकी बढ़त बढ़ती गई और अंततः उन्होंने 18,953 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इस नतीजे ने भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी है। Prashant Kishor Victory
भाजपा के लिए क्यों बड़ा झटका?
बांकीपुर भाजपा की सबसे सुरक्षित सीटों में गिनी जाती रही है। पिछले लगभग 30 वर्षों से यहां भाजपा को लगातार जीत मिलती रही। ऐसे में इस सीट का हाथ से निकलना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह परिणाम केवल एक विधानसभा सीट का नहीं बल्कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता के मूड का संकेत भी हो सकता है। Prashant Kishor Victory
चुनाव के दौरान उम्मीदवार बदले जाने की भी रही चर्चा
इस उपचुनाव में भाजपा को बीच चुनाव में अपना उम्मीदवार भी बदलना पड़ा। पहले घोषित उम्मीदवार ने नाम वापस ले लिया, जिसके बाद पार्टी ने नया प्रत्याशी उतारा। इस घटनाक्रम ने चुनाव को और अधिक चर्चित बना दिया।
प्रशांत किशोर का राजनीतिक सफर
प्रशांत किशोर लंबे समय तक देश के कई बड़े नेताओं के चुनावी रणनीतिकार रहे हैं। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनावी अभियान तैयार किए। बाद में उन्होंने बिहार में जन सुराज अभियान शुरू किया और फिर इसे राजनीतिक दल का रूप दिया। यह उनकी पहली बड़ी प्रत्यक्ष चुनावी सफलता मानी जा रही है। Prashant Kishor Victory
क्या बिहार की राजनीति बदल रही है?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू होगी। एक ओर भाजपा को अपने संगठन और रणनीति पर मंथन करना पड़ सकता है, वहीं जन सुराज पार्टी को राज्य स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। हालांकि यह उपचुनाव है, इसलिए इसके आधार पर पूरे राज्य की राजनीति का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि इस परिणाम ने सभी दलों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। Prashant Kishor Victory
प्रशांत किशोर का संदेश
जीत के बाद मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि यह चुनाव किसी व्यक्ति की जीत नहीं बल्कि जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने बदलाव का संदेश दिया है और आने वाले समय में बिहार की राजनीति नई दिशा में आगे बढ़ सकती है। Prashant Kishor Victory
Sources: The Hindu, The Indian Express, Times of India, Economic Times, NDTV















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