Liquor Shop Protest:बीजापुर। (रोज तक न्यूज़) संगमपल्ली में शराब दुकान के प्रस्ताव पर ग्रामीणों का विरोध, बोले—हमें स्कूल, अस्पताल और रोजगार चाहिए, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के संगमपल्ली गांव में प्रस्तावित सरकारी विदेशी मदिरा दुकान को लेकर ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर चर्चा में है। गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें अपने इलाके में शराब की दुकान नहीं बल्कि बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार के अवसर चाहिए। शराब दुकान के प्रस्ताव को लेकर ग्रामीणों में नाराज़गी है और उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
इस मामले की एक अहम कड़ी यह है कि 30 मार्च 2026 को संगमपल्ली के ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित शराब दुकान को निरस्त करने की मांग की थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि शराब दुकान खोलने के लिए ग्रामसभा आयोजित किए बिना प्रस्ताव तैयार किया गया। ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को फर्जी बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी।
संगमपल्ली कोई काल्पनिक गांव नहीं है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक यह गांव भोपालपटनम ब्लॉक में आता है और इसकी आबादी 1,215 दर्ज है। प्रशासनिक रिकॉर्ड में संगमपल्ली पंचायत के अंतर्गत कई गांव भी दर्ज हैं।
ग्रामीणों की नाराज़गी..
ग्रामीणों की नाराज़गी को समझने के लिए गांव की बुनियादी जरूरतों पर नजर डालना जरूरी है। जिला प्रशासन के स्कूल रिकॉर्ड में संगमपल्ली के नाम से सरकारी प्राथमिक स्कूल, सरकारी मिडिल स्कूल, आश्रम शाला और आवासीय स्कूल दर्ज हैं। यानी गांव में शिक्षा की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन ग्रामीण अगर शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर करने, सुविधाएं बढ़ाने और बच्चों के भविष्य के लिए अधिक अवसर की मांग कर रहे हैं तो यह स्थानीय विकास की बहस का हिस्सा है। Liquor Shop Protest
ग्रामीणों की शिकायत का मूल सवाल यही बताया जा रहा है कि गांव के विकास की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? उनकी नजर में बच्चों के लिए बेहतर स्कूल, युवाओं के लिए रोजगार और परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सबसे जरूरी जरूरतें हैं। ऐसे में शराब दुकान खोलने का प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है।
ग्रामसभा को लेकर उठे सवाल
इस विवाद का सबसे अहम पहलू ग्रामसभा से जुड़ा है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने आरोप लगाया कि शराब दुकान खोलने के लिए जिस प्रस्ताव का सहारा लिया गया, उसे तैयार करने से पहले ग्रामसभा की समुचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उन्होंने कलेक्टर से मामले की जांच कराने और प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की थी। Liquor Shop Protest

यह आरोप गंभीर है, लेकिन इसे अभी ग्रामीणों का आरोप ही माना जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्ट में प्रशासन की ओर से इस आरोप को सही ठहराने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
अगर वास्तव में ग्रामसभा की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो प्रशासन को इसकी जांच करनी चाहिए। दूसरी तरफ यदि प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है तो प्रशासन को ग्रामीणों के सामने पूरी जानकारी सार्वजनिक करके उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। यही पारदर्शिता विवाद को शांत करने का रास्ता बन सकती है।
ग्रामीणों का कहना—शराब से गांव का माहौल प्रभावित होगा
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि गांव में शराब की दुकान खुलने से शराबखोरी बढ़ सकती है और इसका सामाजिक वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने संभावित हिंसा और सामाजिक समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई थी। Liquor Shop Protest
ग्रामीणों का यह विरोध केवल शराब के खिलाफ एक सामान्य आपत्ति नहीं बल्कि उनके मुताबिक गांव के विकास मॉडल से जुड़ा सवाल है। उनका कहना है कि यदि सरकारी व्यवस्था किसी गांव में नया संस्थान या सुविधा उपलब्ध कराना चाहती है तो सबसे पहले वहां की बुनियादी जरूरतों को देखा जाना चाहिए।

युवा रोजगार चाहते हैं, बच्चे बेहतर शिक्षा चाहते हैं और ग्रामीण बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद करते हैं। ऐसे में शराब दुकान का प्रस्ताव सामने आने से स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि स्थानीय लोगों की प्राथमिकताओं को निर्णय प्रक्रिया में कितना महत्व दिया गया।
रोजगार का सवाल भी अहम. Liquor Shop Protest
बीजापुर जिले के सरकारी रोजगार पोर्टल पर 2026 में भी रोजगार मेलों और प्लेसमेंट कैंप की जानकारी उपलब्ध है। उदाहरण के लिए 14 जुलाई 2026 को बीजापुर में इलेक्ट्रिक मीटर टेक्नीशियन के 100 पदों के लिए प्लेसमेंट कैंप दर्ज है। जून में भी बीमा सखी के 60 पदों के लिए रोजगार संबंधी कैंप की जानकारी दी गई थी। Liquor Shop Protest
इससे यह साफ होता है कि जिले में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी स्तर पर गतिविधियां चल रही हैं। लेकिन किसी गांव के ग्रामीणों की स्थानीय मांग इससे अलग हो सकती है। संगमपल्ली के लोग यदि अपने गांव और आसपास ही रोजगार के अवसर, कौशल प्रशिक्षण या छोटे उद्योग चाहते हैं तो प्रशासन को उस मांग पर भी गौर करना चाहिए।
क्योंकि केवल रोजगार मेले का आयोजन कर देना काफी नहीं है। दूरदराज और आदिवासी इलाकों में रोजगार तक पहुंच, सड़क, इंटरनेट, शिक्षा और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी जरूरी होती हैं।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
विष्णुदेव साय सरकार के सामने इस मामले में दोहरी चुनौती है। एक तरफ राज्य का आबकारी विभाग शराब की दुकानों के संचालन और लाइसेंसिंग से जुड़ी व्यवस्था संभालता है। छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब की फुटकर दुकानों और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े सरकारी आदेश भी उपलब्ध हैं। Liquor Shop Protest
दूसरी तरफ स्थानीय जनता की आपत्ति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में किसी भी विकास योजना की सफलता तभी मानी जाती है जब स्थानीय लोगों का भरोसा उसके साथ हो।
सरकार की तरफ से इस खास संगमपल्ली विवाद पर कोई ऐसा आधिकारिक बयान हमें उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला, जिसमें ग्रामीणों के आरोपों को स्वीकार या खारिज किया गया हो। इसलिए सरकार का पक्ष प्रस्तुत करते समय तथ्य और आरोप के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
क्या शराब दुकान ही विकास का पैमाना है?
राजनीतिक तौर पर यह सवाल विपक्ष या आंदोलनकारी उठा सकते हैं कि सरकार गांव में शराब दुकान खोलने को प्राथमिकता क्यों दे रही है। लेकिन पत्रकारिता के लिहाज से यह कहना कि “सरकार के लिए शराब दुकान ही विकास का पैमाना है” एक राजनीतिक आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं। Liquor Shop Protest
इसलिए असली सवाल यह होना चाहिए कि संगमपल्ली में शराब दुकान के प्रस्ताव के साथ-साथ क्या सरकार स्कूल, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी समान गंभीरता से काम कर रही है?
जिला प्रशासन के रिकॉर्ड में संगमपल्ली में कई स्कूल दर्ज हैं। रोजगार विभाग के रिकॉर्ड में बीजापुर में रोजगार कैंप भी दर्ज हैं। इसलिए तस्वीर को केवल एक पक्ष से देखना सही नहीं होगा।
लेकिन ग्रामीणों की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि स्थानीय जनता किसी शराब दुकान का विरोध कर रही है तो प्रशासन को उनसे संवाद करना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्ताव किस आधार पर आया, ग्रामसभा की प्रक्रिया क्या रही और दुकान खुलने की स्थिति में सुरक्षा एवं सामाजिक प्रभावों को लेकर क्या व्यवस्था होगी।
आदिवासी क्षेत्र में संवेदनशीलता जरूरी
बीजापुर बस्तर संभाग का संवेदनशील आदिवासी क्षेत्र है। जिला प्रशासन के आंकड़ों में जिले में बड़ी संख्या में गांव दर्ज हैं और यहां कई स्थानीय भाषाएं भी बोली जाती हैं। Liquor Shop Protest
ऐसे इलाकों में किसी भी फैसले को केवल प्रशासनिक आदेश के तौर पर लागू करने के बजाय स्थानीय समुदाय की भागीदारी और संवाद को प्राथमिकता देना ज्यादा असरदार हो सकता है।
शराब दुकान के मामले में भी यही रास्ता बेहतर दिखाई देता है। ग्रामीणों की आपत्ति सुनी जाए, दस्तावेजों की जांच हो और ग्रामसभा की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए। यदि कोई नियम टूटे हैं तो कार्रवाई हो और यदि प्रक्रिया सही है तो ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी जाए।
शिक्षा की जरूरत क्यों सबसे अहम है?
किसी भी पिछड़े या दूरदराज इलाके में शिक्षा सबसे बड़ा बदलाव ला सकती है। स्कूल में सिर्फ इमारत होना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को नियमित शिक्षक, किताबें, डिजिटल साधन, विज्ञान और गणित की बेहतर पढ़ाई, खेल की सुविधा और आगे की शिक्षा के लिए मार्गदर्शन भी चाहिए। Liquor Shop Protest
संगमपल्ली में सरकारी प्राथमिक और मिडिल स्कूल सहित आश्रम शाला और आवासीय स्कूल दर्ज हैं। अब जरूरत यह देखने की है कि इन संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाएं कैसी हैं।
अगर गांव के लोग शिक्षा को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं तो इसे केवल राजनीतिक नारे के तौर पर नहीं बल्कि विकास की वैध मांग के रूप में देखना चाहिए।
शराब के नुकसान
शराब केवल व्यक्तिगत आदत का मामला नहीं है; अत्यधिक या हानिकारक सेवन से परिवार, स्वास्थ्य और समाज पर भी असर पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक शराब एक मनो-सक्रिय और विषैला पदार्थ है, जो निर्भरता पैदा कर सकता है। WHO के अनुसार शराब का सेवन 200 से अधिक बीमारियों, चोटों और स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ा है। इसके संबंध में लिवर की बीमारी, हृदय संबंधी समस्याएं, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ता है। Liquor Shop Protest
WHO यह भी बताता है कि शराब से होने वाला नुकसान केवल पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। सड़क दुर्घटनाओं, चोटों और पारिवारिक तथा सामाजिक समस्याओं के जरिए इसका असर दूसरे लोगों पर भी पड़ सकता है। 2019 में दुनिया भर में लगभग 26 लाख मौतें शराब के सेवन से जुड़ी थीं।
इसलिए किसी गांव में शराब की दुकान खोलने के सवाल पर केवल राजस्व या व्यापार के नजरिए से नहीं बल्कि स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव के नजरिए से भी विचार किया जाना चाहिए।
आखिर में सवाल यही—फैसला किसकी सहमति से?
संगमपल्ली का विवाद अब एक शराब दुकान से आगे बढ़कर गांव के विकास की प्राथमिकताओं और स्थानीय भागीदारी का सवाल बन गया है। ग्रामीणों ने पहले ही कलेक्टर के सामने अपनी आपत्ति रखी है। उनका आरोप है कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना प्रस्ताव तैयार किया गया।
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। जांच हो, ग्रामसभा की वास्तविक स्थिति सामने आए और ग्रामीणों को भरोसे में लेकर फैसला किया जाए—यही इस विवाद का सबसे लोकतांत्रिक रास्ता है।
संगमपल्ली के ग्रामीणों की मांग को सिर्फ विरोध की आवाज नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों की आवाज के तौर पर भी सुना जाना चाहिए। Liquor Shop Protest
Sources: WHO — शराब के स्वास्थ्य संबंधी नुकसान और उससे जुड़े रोगों की जानकारी,अमर उजाला, छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग — वित्तीय वर्ष 2026-27 की शराब दुकानों से संबंधित सरकारी सूचनाएं।
















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