होमदेश विदेश उत्तर प्रदेश क्रिकेट बॉलीवुडमिडिल ईस्ट तकनीक राजनितिक Web Stories
---Advertisement---

Jharkhand Assembly Gherao: रांची में छात्रों का हल्लाबोल, विधानसभा घेराव पर पुलिस से भिड़ंत

---Advertisement---

HIGHLIGHTS

 

  1. JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का विधानसभा घेराव
  2. पुलिस के लाठीचार्ज से प्रदर्शनकारी भड़के
  3. छात्रों ने चप्पलें और पानी की बोतलें फेंकी

Jharkhand Assembly Gherao:
RozTakNews special report
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े। पुलिस और सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज तथा पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। जवाब में प्रदर्शनकारियों की ओर से सुरक्षाकर्मियों पर चप्पल और खाली पानी की बोतलें फेंके जाने की बात सामने आई है।

आंदोलन का मूल मुद्दा झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, भर्ती व्यवस्था में सुधार और जांच की मांग से जुड़ा है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा अपनी उम्र, समय और पैसा लगाते हैं, ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता उनके भविष्य पर सीधा असर डालती है।

आंदोलन ने पकड़ा जोर

रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन अचानक पैदा हुआ विवाद नहीं है। पिछले कई दिनों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी बनी हुई है। 25 जुलाई से छात्रों के सत्याग्रह और आंदोलन की खबरें सामने आती रही हैं। मोरहाबादी क्षेत्र में अभ्यर्थियों ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू करते हुए परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। Jharkhand Assembly Gherao

छात्रों की मांगों में सबसे अहम मुद्दा भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बताया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच केवल विभागीय स्तर पर नहीं बल्कि ऐसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, जिस पर अभ्यर्थियों को भरोसा हो।

इसी कड़ी में सीबीआई जांच की मांग भी प्रमुख रूप से सामने आई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद कुछ अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का फैसला किया।

परीक्षा व्यवस्था पर क्यों उठ रहे सवाल?

झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर हाल के दिनों में अलग-अलग शिकायतें सामने आई हैं। JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा ने भी जुलाई में JPSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर परीक्षा परिणाम रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग की थी। Jharkhand Assembly Gherao

इसी तरह JSSC की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार इस परीक्षा में 3.22 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन केवल करीब 86 हजार उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हो सके। कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र दूर होने और एडमिट कार्ड से संबंधित सूचना देर से मिलने की शिकायत की।

सांथाली भाषा के पेपर को लेकर भी कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे और उनका स्तर मैट्रिक परीक्षा की अपेक्षा काफी ऊंचा था। इन शिकायतों ने भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर पहले से मौजूद असंतोष को और बढ़ाया।

विधानसभा की ओर बढ़े हजारों अभ्यर्थी

सोमवार को आंदोलन ने नया मोड़ तब लिया जब छात्रों ने विधानसभा घेराव के लिए मार्च शुरू किया। प्रशासन ने पहले से ही विधानसभा परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। करीब 750 मीटर के दायरे में प्रतिबंधात्मक व्यवस्था, बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाए गए थे। शहर के कई हिस्सों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई थी। Jharkhand Assembly Gherao

प्रशासन की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी विधानसभा परिसर तक न पहुंचें। लेकिन छात्रों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

मार्च के दौरान भीड़ और सुरक्षाबलों के बीच तनाव बढ़ा। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार की और फिर लाठीचार्ज किया।

लाठीचार्ज के बाद छात्रों का पलटवार

लाठीचार्ज के बाद माहौल और गर्म हो गया। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिसकर्मियों पर चप्पलें और खाली पानी की बोतलें फेंकने की बात सामने आई। इस घटना ने शांतिपूर्ण आंदोलन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर एक बार फिर बहस खड़ी कर दी है। Jharkhand Assembly Gherao

किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान पुलिस या दूसरे लोगों पर वस्तुएं फेंकना भी स्थिति को ज्यादा तनावपूर्ण बना सकता है। दूसरी तरफ, पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठते हैं कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग कब और किस परिस्थिति में किया गया।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात यह है कि प्रशासन और आंदोलनकारी दोनों संयम बनाए रखें, क्योंकि प्रदर्शन में शामिल बड़ी संख्या में छात्र ऐसे युवा हैं जिनका मुख्य मकसद रोजगार और अपने भविष्य को लेकर जवाब हासिल करना है।

सरकार का कहना क्या है?Jharkhand Assembly Gherao

इस पूरे विवाद के बीच राज्य सरकार की ओर से यह दावा भी सामने आया है कि छात्रों की बड़ी संख्या में मांगों को स्वीकार किया जा चुका है। कुछ रिपोर्टों में सरकार के हवाले से कहा गया है कि करीब 98 प्रतिशत मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि आंदोलनकारी छात्र इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि कुछ प्रमुख मांगों, खासकर जांच और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अभी ठोस समाधान नहीं हुआ है। Jharkhand Assembly Gherao

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी छात्रों के मुद्दों पर संवाद और पारदर्शिता पर जोर दिया है। सरकार की ओर से बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही गई है।

लेकिन जमीन पर हालात यह बता रहे हैं कि केवल बातचीत से फिलहाल गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छात्रों को लिखित और स्पष्ट आश्वासन चाहिए, जबकि सरकार का कहना है कि वह उनकी मांगों पर कार्रवाई कर रही है।

JPSC की पुरानी छवि भी बनी वजह

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर असंतोष का एक बड़ा कारण यह भी है कि JPSC पहले भी विवादों में रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य के गठन यानी वर्ष 2000 के बाद से ही JPSC की भर्ती प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग समय पर सवाल उठते रहे हैं। 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा मौजूदा विवाद इसी लंबे सिलसिले की नई कड़ी माना जा रहा है। Jharkhand Assembly Gherao

जब किसी प्रतियोगी परीक्षा में लाखों युवा शामिल होते हैं तो उनके लिए परीक्षा केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं होती। कई अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद कोचिंग, किताबों, किराये और यात्रा पर पैसा खर्च करते हैं।

ऐसे में परीक्षा में कथित गड़बड़ी की खबर उनके अंदर गुस्सा पैदा करती है। यही वजह है कि JPSC-JSSC आंदोलन अब सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं रह गया, बल्कि युवाओं के भरोसे और भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बन चुका है।

राजनीतिक दल भी आंदोलन में सक्रिय

छात्र आंदोलन के बीच राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ी है। जुलाई में BJP युवा मोर्चा ने JPSC कार्यालय का घेराव किया था और परीक्षा परिणाम रद्द करने तथा सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके अलावा AJSU के युवा और छात्र संगठनों ने भी JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
Jharkhand Assembly Gherao

इससे साफ है कि भर्ती परीक्षा का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया है। हालांकि छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के फायदे के लिए नहीं बल्कि अपने रोजगार और भविष्य के लिए है।

रोजगार की उम्मीद और व्यवस्था पर भरोसा

झारखंड जैसे राज्य में सरकारी नौकरी युवाओं के लिए सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का साधन भी मानी जाती है। ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले अनेक अभ्यर्थी सरकारी सेवा को अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने का जरिया समझते हैं।
Jharkhand Assembly Gherao

इसलिए भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षा केंद्रों की समस्या, प्रश्नपत्र से जुड़ी शिकायतें, परिणाम पर विवाद और जांच की मांग जैसे मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह केवल कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों के भरोसे को भी बहाल करे। अगर परीक्षा व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा तो आंदोलन अपने आप कमजोर पड़ सकता है।

लाठीचार्ज से समाधान नहीं, संवाद जरूरी

रांची की ताजा तस्वीर सरकार और छात्रों दोनों के लिए एक संदेश है। एक तरफ युवा सड़क पर हैं और दूसरी तरफ प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ने से सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों का हो सकता है जो अपने भविष्य के लिए आंदोलन में शामिल हुए हैं। Jharkhand Assembly Gherao

सरकार को चाहिए कि छात्रों की मांगों को बिंदुवार लेकर उनकी स्थिति स्पष्ट करे। जिन मांगों को स्वीकार किया गया है, उनका लिखित आदेश जारी किया जाए और जिन पर कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है, उसकी समयसीमा बताई जाए।

वहीं छात्रों से भी अपील होनी चाहिए कि वे आंदोलन को शांतिपूर्ण रखें और सुरक्षाकर्मियों पर वस्तुएं न फेंकें। लोकतांत्रिक आंदोलन की ताकत उसकी वैध मांग और शांतिपूर्ण तरीके में होती है।

अब आगे क्या?

विधानसभा घेराव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का अगला दौर कब और किस रूप में होगा। आंदोलनकारी यदि अपनी मांगों पर कायम रहते हैं और सरकार भी अपने रुख में बदलाव नहीं करती तो आने वाले दिनों में गतिरोध और बढ़ सकता है।
Jharkhand Assembly Gherao

दूसरी ओर सरकार के सामने यह मौका भी है कि वह एक स्पष्ट रोडमैप बनाकर छात्रों को भरोसे में ले। परीक्षा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच, दोष मिलने पर कार्रवाई, परीक्षा कैलेंडर में नियमितता और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की घोषणा इस तनाव को कम करने में मदद कर सकती है।

रांची में सोमवार को हुआ लाठीचार्ज और उसके बाद छात्रों द्वारा चप्पल व पानी की बोतलें फेंकने की घटना आंदोलन के उस मोड़ को दिखाती है जहां संवाद की जरूरत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। रोजगार मांग रहे युवाओं और सरकार के बीच दूरी जितनी कम होगी, समाधान उतना ही आसान होगा।

रोज़ तक न्यूज़ का निष्कर्ष: JPSC-JSSC विवाद को केवल सड़क पर हुए टकराव के रूप में देखना सही नहीं होगा। इसके पीछे वर्षों से नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं की उम्मीद, परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल है। सरकार और छात्रों दोनों को टकराव से बाहर निकलकर ऐसा रास्ता तलाशना होगा जिससे परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बहाल हो और योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके। Jharkhand Assembly Gherao

Sources: Times of India , Economic Times , Navbharat Times , The Indian Express , Hindustan

Azmatulla

Hi, I am an experienced journalist and news writer with over 20 years of experience in the media industry. Throughout my career, I have worked with more than 15 Hindi and Urdu newspapers, covering a wide range of topics including politics, current affairs, national news, international developments, and social issues.With extensive experience in both print and digital journalism, I am committed to delivering accurate, reliable, and well-researched news to readers. My work focuses on presenting facts in a clear, balanced, and easy-to-understand manner while maintaining the highest standards of journalism.Over the years, I have contributed to numerous publications and continue to remain actively involved in both newspaper and digital media platforms. My goal is to keep readers informed with trustworthy news, meaningful analysis, and timely updates from around the world.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

1 thought on “Jharkhand Assembly Gherao: रांची में छात्रों का हल्लाबोल, विधानसभा घेराव पर पुलिस से भिड़ंत”

Leave a Comment