Srinagar BJP Protest: श्रीनगर। देशभर में आजादी की 80वीं सालगिरह का जश्न खत्म हुए अभी एक दिन ही हुआ है कि जम्मू-कश्मीर की सियासत में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। श्रीनगर में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रविवार को कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। BJP ने कांग्रेस नेताओं पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के कथित अपमान का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान BJP कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि वंदे मातरम् देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ गीत है, इसलिए इसके सम्मान से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। मामला इसलिए भी गरमा गया है क्योंकि यह विवाद 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोहों के तुरंत बाद सामने आया है।
BJP का आरोप एक वायरल वीडियो और उससे जुड़ी राजनीतिक बयानबाजी के बाद सामने आया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का वंदे मातरम् के दौरान कथित रवैया देश की भावनाओं का अपमान है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से इस पूरे मामले की अलग व्याख्या की गई है और पार्टी ने BJP के आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया है।
क्या है पूरा विवाद, कैसे शुरू हुआ मामला?
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के गायन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। BJP नेताओं ने वीडियो के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गीत के दौरान कांग्रेस नेताओं का रवैया सम्मानजनक नहीं था।Srinagar BJP Protest
BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी समेत पार्टी के कई नेताओं ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर वंदे मातरम् के प्रति कथित अनादर का आरोप लगाया। मीडिया रिपोर्टों में भी BJP नेताओं के बयान सामने आए हैं, जिनमें कांग्रेस से इस मामले में सफाई और माफी की मांग की गई।
इसी के बाद जम्मू-कश्मीर BJP ने श्रीनगर में कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय गीत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही को सामान्य राजनीतिक बहस मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के वीडियो में दिखाई देने वाले हावभाव को सीधे तौर पर ‘राष्ट्रीय गीत का अपमान’ साबित कर देना अलग बात है और राजनीतिक आरोप लगाना अलग। इसलिए इस पूरे मामले में दोनों पक्षों की बात को सामने रखना जरूरी है।
कांग्रेस की तरफ से सामने आए बचाव में कहा गया कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। कांग्रेस पक्ष की ओर से यह दावा किया गया कि सोनिया गांधी का इशारा वंदे मातरम् को रोकने के लिए नहीं बल्कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था से जुड़ा था। सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर भी तीखी बहस चल रही है।
कांग्रेस का कहना है कि BJP राष्ट्रीय मुद्दों को राजनीतिक विवाद में बदलने की कोशिश कर रही है। पार्टी के समर्थकों की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि क्या किसी नेता के कुछ सेकंड के हावभाव को देशभक्ति या राष्ट्रभक्ति की कसौटी बनाना उचित है।
वंदे मातरम् का इतिहास और पुराना सियासी विवाद…Srinagar BJP Protest
वंदे मातरम् का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा है। इसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था और बाद में यह आजादी की लड़ाई में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना का अहम प्रतीक बन गया। 1896 में रवींद्रनाथ ठाकुर ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में वंदे मातरम् का गायन किया था। स्वतंत्रता के दौर में यह गीत आंदोलनकारियों के बीच जोश और एकता का प्रतीक बना। Srinagar BJP Protest

15 अगस्त 1947 को भी वंदे मातरम् का खास महत्व रहा। आधिकारिक ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ सामग्री के मुताबिक पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने सरदार वल्लभभाई पटेल के निमंत्रण पर 15 अगस्त 1947 की सुबह आकाशवाणी से वंदे मातरम् प्रस्तुत किया था।
लेकिन इस गीत को लेकर इतिहास में मतभेद भी रहे हैं। खास तौर पर इसके बाद के पदों में धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के उल्लेख को लेकर कुछ मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने आपत्ति जताई थी। इसी वजह से राष्ट्रीय समारोहों में आम तौर पर वंदे मातरम् के पहले दो पदों के इस्तेमाल की परंपरा बनी।
1937 में कांग्रेस के भीतर भी इस सवाल पर चर्चा हुई थी। इतिहास के इस हिस्से को लेकर आज भी BJP और कांग्रेस की राजनीतिक व्याख्याएं अलग-अलग हैं। BJP का आरोप है कि कांग्रेस ने धार्मिक संवेदनशीलता के नाम पर गीत के मूल स्वरूप के साथ समझौता किया, जबकि कांग्रेस पक्ष का तर्क रहा है कि राष्ट्रीय एकता और सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखना जरूरी था।
यानी वंदे मातरम् का विवाद नया नहीं है। इसकी जड़ें आजादी से पहले के दौर तक जाती हैं। लेकिन मौजूदा विवाद में एक खास फर्क है—आज यह मुद्दा सोशल मीडिया, राजनीतिक बयानबाजी और चुनावी राजनीति के जरिए बहुत तेजी से फैलता है।
श्रीनगर में प्रदर्शन के सियासी मायने
श्रीनगर में BJP का कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन केवल एक स्थानीय राजनीतिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रवाद, तिरंगा, वंदे मातरम् और देश की एकता से जुड़े मुद्दे लंबे समय से सियासत के अहम हिस्से रहे हैं।Srinagar BJP Protest
BJP ने प्रदर्शन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि उसके लिए राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राजनीतिक मुद्दे से ऊपर है। पार्टी का कहना है कि देश की आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम् ने लोगों को जोड़ने का काम किया और आज भी यह राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है।
दूसरी तरफ कांग्रेस इस पूरे मामले को BJP की राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रही है। कांग्रेस का तर्क है कि BJP को असली मुद्दों—रोजगार, महंगाई, शिक्षा, जम्मू-कश्मीर के विकास और आम लोगों की समस्याओं—पर बहस करनी चाहिए, न कि वीडियो के छोटे हिस्से को लेकर विवाद खड़ा करना चाहिए। Srinagar BJP Protest
इस विवाद का एक पहलू यह भी है कि राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति का तरीका क्या हो? क्या किसी राष्ट्रीय गीत को लेकर हर व्यक्ति का एक जैसा व्यवहार जरूरी है? या फिर देशभक्ति को केवल गीत गाने या किसी खास तरीके से खड़े होने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए? यह सवाल अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
हालांकि BJP का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान किसी धर्म या राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रभक्ति पर किसी एक राजनीतिक दल का एकाधिकार नहीं हो सकता।
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में कार्यक्रम चल रहे हैं। केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को व्यापक स्तर पर मनाने का फैसला किया है और इसके जरिए युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जोड़ने की बात कही है।
कांग्रेस भी अपने हालिया महाअधिवेशन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम की शुरुआत कर चुकी है। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर 28 जुलाई 2026 के कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के साथ अधिवेशन के दूसरे दिन की शुरुआत का उल्लेख मौजूद है।
इससे साफ है कि विवाद वंदे मातरम् के अस्तित्व या उसके राष्ट्रीय महत्व को लेकर नहीं, बल्कि उसके गायन, पूर्ण स्वरूप और राजनीतिक व्याख्या को लेकर है।Srinagar BJP Protest
श्रीनगर में BJP का प्रदर्शन इसी बड़ी बहस की कड़ी है। आने वाले दिनों में संभव है कि यह मुद्दा संसद से लेकर सोशल मीडिया और जम्मू-कश्मीर की राजनीति तक और तेज हो।
फिलहाल दोनों दल अपने-अपने नैरेटिव के साथ मैदान में हैं। BJP इसे राष्ट्रीय सम्मान का सवाल बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर पेश किए जाने का आरोप लगा रही है।
ऐसे माहौल में सबसे जरूरी यही है कि वंदे मातरम् जैसे ऐतिहासिक राष्ट्रीय गीत को राजनीतिक टकराव का हथियार बनाने के बजाय उसके इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका और संवैधानिक मर्यादाओं के संदर्भ में समझा जाए। देशभक्ति का जज्बा जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि राजनीतिक बहस तथ्यों और संयम के साथ हो। Srinagar BJP Protest
नोट: खबर में BJP के आरोपों को आरोप के रूप में और कांग्रेस के पक्ष को कांग्रेस के दावे के रूप में रखा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।Srinagar BJP Protest
Sources: PTI, The News Mill , Lokmat Times , भारत सरकार PBI , India Today













