Netanyahu Fraud Claims: येरुशलम। इजराइल में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव के बाद जारी सियासी घमासान के बीच चुनाव आयोग ने आधिकारिक नतीजों को प्रमाणित कर दिया है। आयोग ने कहा है कि चुनाव में धांधली या ऐसी किसी गड़बड़ी का सबूत नहीं मिला, जिससे मतदान की निष्पक्षता प्रभावित हुई हो या नतीजे बदल गए हों। इस फैसले से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड की ओर से लगाए गए चुनावी धांधली के आरोपों को बड़ा झटका लगा है।
अल जजीरा की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति ने पिछले सप्ताह हुए संसदीय चुनाव के नतीजों की समीक्षा के बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर प्रमाणित कर दिया। समिति ने 9,069 मतदान केंद्रों की जांच की और राजनीतिक दलों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों पर विचार किया। जांच के बाद आयोग इस नतीजे पर पहुंचा कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता होने या नतीजों को प्रभावित करने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इजराइल की राजनीति पहले से ही भारी खींचतान के दौर से गुजर रही है। चुनाव में किसी भी प्रमुख गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में सरकार बनाने के लिए छोटे दलों और अरब बहुल पार्टियों की भूमिका काफी अहम हो गई है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब सबकी नजर राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की ओर है, जो राजनीतिक दलों से बातचीत कर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं।
9,069 मतदान केंद्रों की जांच के बाद आयोग का फैसला
इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति ने चुनाव के बाद सामने आई शिकायतों और आरोपों की जांच की। समिति के कार्यवाहक निदेशक डीन लिवने के अनुसार, सभी शिकायतों को अलग-अलग देखा गया और जांच में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो या घोषित नतीजों में बदलाव की जरूरत पड़े। Netanyahu Fraud Claims
चुनाव समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोलबर्ग ने भी चुनावी नतीजों पर संदेह फैलाने को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। अगर बिना ठोस सबूत के नतीजों की वैधता पर सवाल उठाए जाते हैं तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के विश्वास को नुकसान पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव समिति के पांच सदस्यीय नेतृत्व मंडल में येश अतीद और ब्लू एंड व्हाइट के प्रतिनिधियों ने नतीजों को मंजूरी देने के पक्ष में मतदान किया, जबकि लिकुड और शास पार्टी के प्रतिनिधियों ने मतदान से दूरी बनाए रखी। समिति के अध्यक्ष ने निर्णायक वोट दिया और नतीजों को प्रमाणित करने की प्रक्रिया पूरी हुई। Netanyahu Fraud Claims
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सहयोगियों ने चुनाव के बाद अरब बहुल राजनीतिक दलों पर धांधली के आरोप लगाए थे। उनका दावा था कि चुनाव में अरब पार्टियों की ओर से गड़बड़ी की गई और इसमें विदेशी मदद की भी आशंका है। हालांकि चुनाव आयोग की जांच में इन आरोपों को साबित करने वाला कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे चुनावी नतीजों की वैधता प्रभावित होती।

नेतन्याहू के गठबंधन को 53, विपक्ष को 48 सीटें..Netanyahu Fraud Claims
इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी होता है। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के नतीजों में प्रधानमंत्री नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के सहयोगी गठबंधन को 48 सीटों पर सफलता मिली। Netanyahu Fraud Claims
वहीं, अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल कीं। इस तरह संसद में किसी भी प्रमुख गठबंधन को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। यही वजह है कि अरब दलों की भूमिका सरकार गठन के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। अब दोनों पक्षों के सामने दूसरे दलों का समर्थन हासिल करने की चुनौती है।
चुनाव परिणामों ने इजराइल की राजनीति में एक नई स्थिति पैदा कर दी है। नेतन्याहू लंबे समय से देश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं, लेकिन इस बार उनके गठबंधन को बहुमत नहीं मिल पाया। दूसरी ओर गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को भी सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें हासिल नहीं हुईं।..Netanyahu Fraud Claims
ऐसे में राजनीतिक बातचीत और गठबंधन की कोशिशें तेज हो गई हैं। यदि कोई भी पक्ष जरूरी समर्थन जुटाने में कामयाब नहीं होता है तो देश में एक बार फिर चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में भी इस संभावना का जिक्र किया गया है कि सरकार गठन में असफलता की स्थिति में अगले साल की शुरुआत में दोबारा चुनाव हो सकते हैं।
राष्ट्रपति हर्जोग ने शुरू की सरकार गठन की प्रक्रिया
चुनाव आयोग से आधिकारिक नतीजे मिलने के बाद इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रपति विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर यह जानेंगे कि किस नेता को संसद में बहुमत हासिल करने की संभावना है। Netanyahu Fraud Claims
इजराइल की संसदीय व्यवस्था के मुताबिक, राष्ट्रपति किसी ऐसे नेता को सरकार बनाने का मौका देते हैं, जिसके पास संसद में जरूरी समर्थन जुटाने की बेहतर संभावना हो। इस बार नेतन्याहू और आइजेनकोट दोनों के सामने समर्थन जुटाने की चुनौती है। राष्ट्रपति की बातचीत और उसके बाद होने वाले राजनीतिक फैसलों से यह साफ होगा कि अगली सरकार का नेतृत्व किसके हाथ में जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच का मामला भी चर्चा में है। इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने कथित विदेशी फंडिंग और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों को लेकर अलग जांच की बात कही है। हालांकि एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी ने अपनी आशंकाओं के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं। Netanyahu Fraud Claims
इस मामले में इजराइल की अटॉर्नी जनरल गली बहारव-मियारा ने भी कहा कि बिना पर्याप्त सबूत के किसी नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि से पूछताछ करना उचित नहीं है। वहीं, चुनाव समिति का कहना है कि विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच अपनी जगह जारी रह सकती है, लेकिन उपलब्ध जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे चुनाव के नतीजे प्रभावित हुए हों।Netanyahu Fraud Claims
इजराइल के राष्ट्रपति हर्जोग ने भी अरब मतदाताओं को निशाना बनाकर की जा रही बयानबाजी पर चिंता जताई और नस्लीय टिप्पणियों की निंदा की। उनका कहना है कि किसी भी समुदाय के मतदाताओं को बिना सबूत के बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। Netanyahu Fraud Claims
फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से नतीजों को प्रमाणित किए जाने के बाद चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब असली चुनौती नई सरकार बनाने की है। नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच जारी राजनीतिक मुकाबले में अरब दलों की 19 सीटें निर्णायक साबित हो सकती हैं। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति की राजनीतिक दलों से बातचीत और गठबंधन की कोशिशें इजराइल की अगली सरकार की तस्वीर साफ करेंगी। Netanyahu Fraud Claims
Sources: Al Jazeera , Associated Press , Saudi Gazette , Yeni Şafak
















