Iran-Oman Agreement: नई दिल्ली/तेहरान: दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Hormuz Strait) को लेकर एक बड़ी कूटनीतिक पेशकदमी सामने आई है। ईरान ने दावा किया है कि उसने ओमान के साथ जहाज़ों की आवाजाही के लिए एक नए समुद्री मार्ग (Shipping Route) पर सहमति बना ली है। दोनों मुल्क अब इस रणनीतिक जलमार्ग के संयुक्त प्रबंधन (Joint Management) की अंतिम तैयारियों में जुटे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मध्य-पूर्व में पिछले महीनों के दौरान अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित किया था। ऐसे में इस समझौते को सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों ने प्रस्तावित समुद्री मार्ग के भौगोलिक समन्वय (Geographic Coordinates) पर सहमति बना ली है और संयुक्त बयान जारी करने की तैयारी चल रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष की दखलअंदाज़ी नहीं होनी चाहिए।
हॉर्मुज़ क्यों है इतना अहम?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोक पॉइंट माना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंचता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे तेल की कीमतों, शिपिंग कंपनियों और वैश्विक बाज़ार पर असर डालता है। Iran-Oman Agreement
अमेरिका, ईरान और इज़राइल का बैकग्राउंड
पिछले वर्षों में ईरान और अमेरिका के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय प्रभाव और खाड़ी में सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी। Iran-Oman Agreement

इज़राइल और ईरान के बीच भी लंबे समय से गहरा राजनीतिक और सुरक्षा विवाद रहा है। हालिया संघर्षों और सैन्य कार्रवाइयों के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। इसी दौरान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और जहाज़ों की आवाजाही वैश्विक चिंता का विषय बन गई।
ओमान ने परंपरागत रूप से मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है और कई मौकों पर ईरान तथा पश्चिमी देशों के बीच संवाद कायम कराने की कोशिश की है। यही वजह है कि हॉर्मुज़ को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत चल रही थी।
क्या होगा नए समझौते में? Iran-Oman Agreement
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में जहाज़ों की आवाजाही के लिए अलग-अलग मार्ग तय किए जा सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि आने और जाने वाले जहाज़ों के लिए अलग समुद्री लेन (Shipping Lanes) बनाई जा सकती हैं। साथ ही दोनों देश इस मार्ग के संचालन और सुरक्षा को लेकर संयुक्त व्यवस्था तैयार कर रहे हैं। हालांकि अंतिम तकनीकी और प्रशासनिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। Iran-Oman Agreement
दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो:
तेल की आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकती है।
वैश्विक शिपिंग में अनिश्चितता कम होगी।
कच्चे तेल की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव घट सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।
हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि केवल समझौता हो जाने से सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिल जाती। क्षेत्रीय हालात और राजनीतिक परिस्थितियां आगे भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
बाज़ार की प्रतिक्रिया
समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में हलचल देखने को मिली। निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत माना, हालांकि विशेषज्ञों ने आगाह किया कि अंतिम समझौते और उसके क्रियान्वयन तक स्थिति पर नज़र रखना जरूरी होगा। Iran-Oman Agreement
आगे क्या?
अब दुनिया की निगाहें ईरान और ओमान के संयुक्त बयान पर टिकी हैं। यदि प्रस्तावित व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है तो यह मध्य-पूर्व की समुद्री राजनीति, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
Sources: Al Jazeera , Reuters , Times of India




















