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Sugar Price Rise India: चीनी के दाम में जोरदार उछाल, केंद्र ने Ethanol को जिम्मेदार मानने से किया इनकार; उत्पादन घटने और जमाखोरी पर नजर

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HIGHLIGHTS

  • चीनी 48.18 से बढ़कर 55.70 रुपये किलो हुई।
  • केंद्र ने Ethanol को कीमत बढ़ने की वजह मानने से इनकार किया।
  • सरकार ने उत्पादन घटने और फसल खराब होने को बड़ी वजह बताया।

Sugar Price Rise India; नई दिल्ली। देश में चीनी के बढ़ते दाम को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पिछले एक महीने में चीनी की कीमत में करीब 15 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई 2026 को चीनी का औसत भाव 48.18 रुपये प्रति किलो था, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। कीमतों में इस तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई कारोबारियों और खाद्य उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।

चीनी के दाम बढ़ने के बीच यह सवाल भी उठ रहा था कि क्या पेट्रोल में Ethanol की बढ़ती blending के लिए गन्ने और चीनी का इस्तेमाल किए जाने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हुई है। केंद्र सरकार ने इस दावे को साफ तौर पर खारिज किया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि चीनी की मौजूदा तेजी को Ethanol production के लिए गन्ने की diversion से जोड़ना गलत है।

सरकार के मुताबिक चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। इनमें घरेलू उत्पादन में अनुमान से कमी, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, गन्ने की फसल को मौसम और बीमारी से नुकसान, अंतरराष्ट्रीय बाजार में supply tight होना तथा कुछ हिस्सों में speculation और hoarding शामिल हैं।

चीनी के दाम क्यों बढ़े? सरकार ने बताई कई वजहें

केंद्र के मुताबिक मौजूदा sugar season में उत्पादन करीब 306 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों की शुरुआती उम्मीद करीब 343 लाख टन थी। यानी अनुमान से काफी कम उत्पादन की स्थिति बनी है। मंत्रालय ने बताया कि गन्ने की फसल को Red Rot और Top Borer जैसी बीमारियों के साथ-साथ ज्यादा बारिश से हुए waterlogging का भी नुकसान हुआ है। Sugar Price Rise India

यही नहीं, आने वाले त्योहारों का सीजन भी चीनी की मांग बढ़ाने वाला है। भारत में अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और दूसरे खाद्य कारोबार में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में उत्पादन कम होने से बाजार पर दबाव पड़ना स्वाभाविक है।

सरकार ने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की supply में कमी का असर भारत पर भी पड़ रहा है। मंत्रालय के अनुसार 2026-27 के लिए वैश्विक sugar deficit करीब 33 लाख टन रहने का अनुमान है। मौसम को लेकर चिंताओं ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों में तेजी आई है। सरकार के अनुसार 30 जून को अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी करीब दो महीने में 16 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई।

ऐसे में केंद्र का तर्क है कि घरेलू बाजार में चीनी महंगी होने की वजह सिर्फ Ethanol policy को बताना सही तस्वीर नहीं होगी। सरकार ने कहा है कि देश में नई crushing season शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त sugar stock मौजूद है।

Ethanol पर सरकार का जवाब, 10 लाख टन चीनी आयात का बड़ा फैसला

Ethanol को लेकर सरकार ने आंकड़ों का भी हवाला दिया है। मंत्रालय के मुताबिक 2022-23 में गन्ने से Ethanol के लिए divert होने वाली चीनी का हिस्सा करीब 12 फीसदी था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9 फीसदी रह गया है। इसके अलावा देश में पैदा होने वाले Ethanol का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब grains, खासकर maize से आता है। Sugar Price Rise India

यानी केंद्र का कहना है कि Ethanol programme को चीनी की मौजूदा महंगाई का मुख्य कारण बताना तथ्यात्मक तौर पर सही नहीं है। हालांकि दूसरी ओर बाजार और विपक्षी राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यही वजह है कि चीनी की कीमत और Ethanol policy का संबंध आने वाले दिनों में भी बहस का विषय बना रह सकता है।

बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने चीनी dealers के लिए 400 टन का stock limit लागू किया है। यह व्यवस्था 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसके अलावा 1 सितंबर से bulk consumers को 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी stock में रखने की इजाजत नहीं होगी। सरकारी और राज्य स्तरीय टीमें sugar mills में physical stock verification भी कर रही हैं, ताकि जमाखोरी और artificial shortage पर लगाम लगाई जा सके। Sugar Price Rise India

सरकार ने इससे भी बड़ा कदम उठाते हुए करीब 10 लाख टन raw sugar duty-free import की इजाजत दी है। यह फैसला करीब एक दशक बाद पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में duty-free sugar import की अनुमति के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मकसद घरेलू बाजार में supply बढ़ाना और त्योहारों से पहले कीमतों को नियंत्रित रखना है।

सरकार ने यह भी कहा है कि sugar mills को अक्टूबर से crushing शुरू करने की तैयारी करनी चाहिए। मंत्रालय के मुताबिक 15 अक्टूबर से crushing शुरू होने पर अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन से बढ़कर 10 लाख टन से ज्यादा हो सकता है। इससे festive season के दौरान बाजार में supply बेहतर होने की उम्मीद है।

आम आदमी की जेब पर असर, त्योहारों से पहले राहत की उम्मीद۔۔Sugar Price Rise India

चीनी के दाम में अचानक हुई तेजी का सीधा असर घर के बजट पर पड़ता है। भले ही एक परिवार महीने में सीमित मात्रा में चीनी खरीदता हो, लेकिन चीनी सिर्फ चाय या घरेलू इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। मिठाई, बिस्किट, बेकरी उत्पाद, ठंडे पेय और कई processed food items की लागत भी इससे प्रभावित होती है। Sugar Price Rise India

मिठाई कारोबार के लिए यह समय खास तौर पर अहम है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के साथ अगर चीनी महंगी रहती है तो मिठाई और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इसका कुछ हिस्सा आगे चलकर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि सरकार का दावा है कि देश में पर्याप्त stock मौजूद है और panic की जरूरत नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्पादन अनुमान से कम जरूर है, लेकिन अक्टूबर में नई crushing season शुरू होने तक domestic demand को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। Sugar Price Rise India

दूसरी तरफ, सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए stock limits और physical verification जैसे कदम उठाए हैं। जुलाई में भी केंद्र ने sugar dealers पर stock holding limits लगाते हुए कहा था कि बाजार में artificial scarcity पैदा करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है। Dealers को अपने stock की जानकारी भी नियमित रूप से देने का निर्देश दिया गया था।

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि कुछ समय पहले तक देश में sugar surplus को देखते हुए export policy पर जोर था, लेकिन घरेलू बाजार में supply pressure बढ़ने के बाद अब सरकार ने import का रास्ता चुना है। Economic Times के अनुसार नवंबर 2025 में सरकार ने 15 लाख टन sugar export की मंजूरी दी थी, जिसे बाद में 20 लाख टन तक बढ़ाया गया था। लेकिन बाद में घरेलू stocks पर दबाव बढ़ने के कारण export पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए गए। Sugar Price Rise India

यानी sugar market की तस्वीर कुछ ही महीनों में काफी बदल गई है। अब सरकार की प्राथमिकता domestic supply और consumer prices को stable रखना दिखाई दे रही है। Sugar Price Rise India

कुल मिलाकर चीनी की कीमत में मौजूदा उछाल को लेकर केंद्र ने Ethanol को जिम्मेदार मानने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार के मुताबिक असली वजह कम उत्पादन, फसल को नुकसान, त्योहारों की बढ़ती मांग, global supply pressure और कुछ मामलों में hoarding है। साथ ही सरकार ने 10 लाख टन duty-free raw sugar import, stock limits और market monitoring जैसे कदम उठाए हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि imported sugar और नई crushing season शुरू होने के बाद बाजार में supply कितनी सुधरती है और आम आदमी को चीनी के बढ़े हुए दाम से कब तक राहत मिलती है। Sugar Price Rise India

Sources: Times of India , Economic Times, PIB

Azmatulla

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