School Infrastructure: जौनपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। संजय सिंह ने जौनपुर के पांच सरकारी स्कूलों को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसने सरकारी स्कूलों के रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद हकीकत के बीच के फर्क पर बहस छेड़ दी है।
संजय सिंह का कहना है कि सरकारी शिक्षा से जुड़े UDISE रिकॉर्ड में पांच स्कूल चालू बताए जा रहे हैं, लेकिन मौके पर उनके भवन का कोई पता नहीं है। उन्होंने इन स्कूलों के नाम भी गिनाए और कहा कि अब तक खराब हालत वाले स्कूलों की तस्वीरें सामने आती थीं, लेकिन यहां मामला इससे भी ज्यादा गंभीर है—कथित तौर पर स्कूल का भवन ही मौजूद नहीं है।
सांसद ने कहा कि वह योगी सरकार और भाजपा नेताओं को खुली चुनौती देते हैं कि इन पांच स्कूलों में से एक स्कूल भी खोजकर दिखा दें। उन्होंने ऐलान किया कि जो व्यक्ति इन पांच में से किसी एक स्कूल को खोज निकालेगा, उसे वह अपनी सांसद की तनख्वाह से एक लाख रुपये का इनाम देंगे।
हालांकि, इस दावे के सभी पहलुओं की स्वतंत्र और मौके पर जाकर पुष्टि अभी बाकी है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों में जौनपुर के सरकारी स्कूलों का बड़ा नेटवर्क दर्ज है। केंद्र सरकार के एक संसदीय जवाब के मुताबिक 2023-24 में जौनपुर में 2,862 सरकारी स्कूल दर्ज थे।
पांच स्कूलों को लेकर संजय सिंह का बड़ा दावा
संजय सिंह के मुताबिक जिन पांच स्कूलों को लेकर सवाल उठाया गया है, उनमें Primary School Dhalgarh Tola, Primary School Mishrpur Kanya, Composite School Gadan Arjini, Primary School Urdu Bazaar और Primary School Bagh Hashim शामिल हैं। School Infrastructure
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये स्कूल सरकारी रिकॉर्ड में operational हैं तो फिर उनके भवन कहां हैं? अगर भवन मौजूद नहीं हैं तो बच्चों की पढ़ाई कहां हो रही है? और अगर कहीं दूसरी जगह पढ़ाई हो रही है तो सरकारी रिकॉर्ड में उसका स्पष्ट विवरण क्यों नहीं दिखाई देता?
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि UDISE+ यानी Unified District Information System for Education Plus देश में स्कूल शिक्षा से जुड़े आंकड़ों को दर्ज करने वाली प्रमुख व्यवस्था है। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि UDISE+ का इस्तेमाल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से स्कूल शिक्षा के विभिन्न indicators का डेटा दर्ज करने के लिए किया जाता है।
यानी स्कूल का नाम रिकॉर्ड में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मौके पर भवन किस हालत में है। इसके लिए जमीन पर physical verification जरूरी है। यही वह बिंदु है जिस पर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो रहा है।
संजय सिंह का आरोप अगर जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल पांच स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे सरकारी रिकॉर्ड को अपडेट करने, स्कूलों की physical verification और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि जौनपुर के कई सरकारी स्कूलों के नाम और UDISE कोड विभिन्न सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हैं। शिक्षा मंत्रालय के उत्तर प्रदेश संबंधी दस्तावेज में जौनपुर के कई स्कूलों के नाम और UDISE कोड भी दिए गए हैं।
यानी सरकार के पास स्कूलों का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है। अब सवाल यह है कि डिजिटल रिकॉर्ड और ground reality में कहीं कोई बड़ा gap तो नहीं?
सरकारी रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत, जांच की मांग
संजय सिंह के बयान का सबसे अहम हिस्सा उनका एक लाख रुपये का चैलेंज है। उन्होंने कहा है कि वह अपनी salary से एक लाख रुपये उस व्यक्ति को देंगे जो बताए गए पांच स्कूलों में से किसी एक को खोजकर दिखा दे। School Infrastructure

राजनीतिक बयान के तौर पर यह चुनौती काफी चर्चा में आ सकती है, लेकिन शिक्षा के नजरिए से इससे भी जरूरी सवाल है कि इन स्कूलों का वर्तमान status आखिर क्या है।
किसी सरकारी स्कूल का भवन जर्जर होने, दूसरी जगह संचालित होने, विलय होने या पूरी तरह बंद होने की स्थिति अलग-अलग होती है। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड में school status और physical infrastructure का सही अपडेट होना जरूरी है।
केंद्र सरकार के संसदीय जवाब से यह भी स्पष्ट है कि UDISE+ के जरिए स्कूलों से जुड़े आंकड़े दर्ज किए जाते हैं। सरकार ने संसद में सरकारी स्कूलों के बंद, merged या non-functional होने से जुड़े सवालों के जवाब में UDISE+ को data system के रूप में बताया था।
ऐसे में संजय सिंह का आरोप अगर जांच के लिए उठाया जाता है तो सबसे बेहतर तरीका यही होगा कि शिक्षा विभाग की टीम संबंधित पांचों locations पर जाकर physical verification करे। स्कूल भवन की स्थिति, शिक्षक, छात्र, जमीन, रिकॉर्ड और वर्तमान संचालन की पूरी जानकारी सामने लाई जाए।
क्योंकि सरकारी स्कूल किसी फाइल का नाम नहीं होता। वहां बच्चे पढ़ते हैं, शिक्षक काम करते हैं और गांव-मोहल्ले के परिवार अपने बच्चों के भविष्य की उम्मीद रखते हैं।
अगर स्कूल का भवन नहीं है तो सवाल सिर्फ दीवार और छत का नहीं है। सवाल है कि बच्चों की पढ़ाई किस जगह हो रही है। अगर स्कूल किसी दूसरे भवन में चल रहा है तो उसकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट होनी चाहिए। अगर स्कूल बंद या merge हो चुका है तो उसका status अपडेट होना चाहिए।
और अगर स्कूल वास्तव में मौजूद है, तो सरकार के पास संजय सिंह के आरोप का सबसे आसान जवाब है—इन पांचों स्कूलों की location और ground verification सार्वजनिक कर दी जाए।
जौनपुर की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, सियासत भी तेज School Infrastructure
जौनपुर पूर्वांचल का एक महत्वपूर्ण जिला है और यहां बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल हैं। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2021-22 में जिले में 2,870 सरकारी स्कूल थे, जो 2022-23 में 2,861 और 2023-24 में 2,862 रहे। School Infrastructure
इतने बड़े school network में रिकॉर्ड और ground reality को एक जैसा रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
संजय सिंह का बयान इसी व्यवस्था पर राजनीतिक हमला है। उन्होंने सीधे योगी सरकार और भाजपा नेताओं को चुनौती देकर मामले को सियासी रंग भी दे दिया है। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बेहतर दिखाने का दावा करती है, लेकिन अगर सरकारी रिकॉर्ड में ऐसे स्कूल मौजूद हैं जिनका भवन जमीन पर दिखाई ही नहीं देता, तो फिर सिस्टम की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। School Infrastructure
हालांकि, खबर लिखे जाने तक उपलब्ध विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों में संजय सिंह द्वारा बताए गए इन पांचों स्कूलों के भवन गायब होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे फिलहाल AAP सांसद का आरोप और राजनीतिक दावा मानना उचित होगा, अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं। School Infrastructure
यही वजह है कि इस मामले में सरकार या शिक्षा विभाग का आधिकारिक जवाब बेहद अहम हो जाता है। अगर विभाग इन पांचों स्कूलों की location, UDISE details, enrollment, teachers और building status सार्वजनिक कर देता है तो विवाद काफी हद तक साफ हो सकता है।
साथ ही अगर किसी स्कूल का भवन किसी वजह से दूसरी जगह shift हुआ है या स्कूल का merger हुआ है तो उसका रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। School Infrastructure
संजय सिंह का एक लाख रुपये का चैलेंज भले ही राजनीतिक अंदाज में दिया गया हो, लेकिन इसने एक वास्तविक सवाल जरूर सामने रख दिया है—सरकारी कागजों में दर्ज स्कूलों की जमीन पर हकीकत क्या है?
अब निगाहें उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग और जौनपुर प्रशासन पर हैं। यदि पांचों स्कूल वास्तव में मौजूद हैं तो उनकी तस्वीर और location सामने लाकर सवाल खत्म किया जा सकता है। और अगर रिकॉर्ड में गड़बड़ी है तो उसे दुरुस्त करना सरकार की जिम्मेदारी होगी।School Infrastructure
सबसे बड़ा नुकसान किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि उन बच्चों का होता है जिनके नाम पर सरकारी स्कूल और शिक्षा योजनाएं चलती हैं। इसलिए इस पूरे मामले को केवल भाजपा बनाम AAP की राजनीतिक लड़ाई बनाने के बजाय स्कूलों की ground verification और बच्चों की शिक्षा के नजरिए से देखना ज्यादा जरूरी है।School Infrastructure
Sources: PTI ,UDISE












