Ayush Malik Religious Conversion: शामली/इलाहाबाद, 16 सितंबर। शामली के चर्चित आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली के कथित धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक शादी के मामले में बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। आयुष मलिक को अदालत के सामने पेश किया गया, जहां उन्होंने अपनी निजी आजादी और धर्म अपनाने को लेकर अपना पक्ष साफ शब्दों में रखा।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी Habeas Corpus याचिका पर सुनवाई के दौरान आयुष ने अदालत के सामने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया है और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था। उन्होंने अपनी पत्नी चांदी कुरैशी के साथ रहने की इच्छा भी जाहिर की।
आयुष के इस बयान के बाद मामले में उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा सबसे अहम हो गया। सुनवाई के बाद उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया।

9 सितंबर को कोर्ट ने दिया था पेशी का आदेश
आयुष मलिक के दोस्त मोहम्मद सुल्तान की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आयुष को उनकी इच्छा के खिलाफ उनके पिता की निगरानी में रखा गया है और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। Ayush Malik Religious Conversion
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से मांग की गई थी कि आयुष को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, ताकि अदालत सीधे उनसे उनकी इच्छा और मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी ले सके।
इसी मामले की सुनवाई के दौरान 9 सितंबर को जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने आयुष मलिक को 16 सितंबर को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट के सामने यह भी कहा गया था कि आयुष ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया और इसके बाद चांदी कुरैशी से शादी की। अदालत के लिए आयुष की खुद की मौजूदगी इसलिए भी अहम थी, ताकि उनकी इच्छा के बारे में किसी तीसरे व्यक्ति के बयान के बजाय उनसे सीधे बात की जा सके।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक अगर तय तारीख पर आयुष को पेश नहीं किया जाता, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करके गैरहाजिरी की वजह और आयुष को अदालत के सामने लाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी पड़ती।
कौन हैं आयुष मलिक? सामने आया पूरा मामला
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आयुष मलिक शामली के एक दवा कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह 31 वर्षीय बी-फार्मा ग्रेजुएट हैं और अपने पिता देवराज मलिक की मेडिकल स्टोर से जुड़े रहे हैं। Ayush Malik Religious Conversion

धर्म परिवर्तन और शादी का मामला सामने आने के बाद आयुष का नाम मीडिया में काफी चर्चा में रहा। पुलिस में दर्ज एफआईआर से जुड़ी सामने आई जानकारी के मुताबिक आयुष की मुलाकात चांदी कुरैशी से साल 2018 में हुई थी। बताया गया कि उस समय आयुष पैर में लगी चोट के इलाज के सिलसिले में गए थे।
इसके बाद दोनों के बीच नजदीकी बढ़ने का दावा किया गया। आयुष के पिता की शिकायत में आरोप लगाया गया कि बाद में आयुष ने इस्लाम कबूल कर लिया और मोहम्मद अली नाम रख लिया।
हालांकि, यहां यह साफ करना जरूरी है कि एफआईआर में दर्ज आरोप और अलग-अलग पक्षों की ओर से किए गए दावे अपने आप में अदालत द्वारा साबित किए गए तथ्य नहीं हैं। मामले से जुड़े आरोपों और दावों की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली कार्रवाई और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही तय होगी।
जून में एफआईआर के बाद तेज हुआ था विवाद
जून 2026 में यह मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया, जब आयुष के पिता देवराज मलिक ने शामली कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
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शिकायत के आधार पर चांदी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और अन्य लोगों के खिलाफ कथित धर्म परिवर्तन समेत अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।
मीडिया रिपोर्टों में चांदी कुरैशी और उनके पिता समेत कुछ लोगों की गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आई थीं। इसके बाद जुलाई में चांदी कुरैशी और उनके पिता को जमानत मिलने की खबरें प्रकाशित हुईं।
इसी दौरान मामले में अलग-अलग दावे सामने आते रहे। एक तरफ आयुष के इस्लाम कबूल करने और चांदी कुरैशी से निकाह की बात सामने आई, तो दूसरी तरफ बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों में आयुष के दोबारा हिंदू धर्म अपनाने यानी “घर वापसी” की खबरें भी सामने आईं।
इस वजह से मामला धर्म परिवर्तन, शादी, पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे कई पहलुओं से जुड़ गया।
आयुष के पिता देवराज मलिक की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके बेटे को धर्म परिवर्तन और परिवार से दूर करने के लिए प्रभावित किया गया। साथ ही जायदाद से जुड़े आशंकाओं का भी जिक्र किया गया।
वहीं, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आयुष की कथित स्वतंत्र इच्छा और उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ रखे जाने का सवाल उठाया गया।
इन दोनों पक्षों के दावों के बीच अदालत में आयुष का खुद सामने आकर अपना बयान देना इस मामले की अहम कड़ी बन गया।
कोर्ट में आयुष के बयान से बदला मामले का रुख
16 सितंबर की सुनवाई को इस मामले का अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब तक सबसे बड़ा सवाल यही था कि आयुष मलिक खुद क्या चाहते हैं और क्या उन्होंने धर्म परिवर्तन तथा शादी का फैसला अपनी इच्छा से किया था। Ayush Malik Religious Conversion
अदालत के सामने आयुष ने कथित तौर पर साफ कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया और उन पर कोई दबाव नहीं था। उन्होंने अपनी पत्नी चांदी कुरैशी के साथ रहने की इच्छा भी जाहिर की।
इस घटनाक्रम से मामले का एक अहम पहलू अदालत के सामने साफ हुआ है—यानी खुद आयुष की इच्छा।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि एफआईआर में लगाए गए बाकी आरोप अपने आप खत्म हो गए। उन आरोपों की कानूनी स्थिति का फैसला जांच, सबूत और संबंधित अदालत में चलने वाली आगे की कार्रवाई के आधार पर होगा।
Ayush Malik Religious Conversion
आयुष मलिक का मामला अब केवल धर्म परिवर्तन या शादी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और एक वयस्क व्यक्ति की अपनी जिंदगी के फैसले का कानूनी सवाल भी प्रमुख बन गया है।
16 सितंबर को हाईकोर्ट के सामने आयुष ने जो बयान दिया, वह इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वहीं, मामले से जुड़े अन्य आरोपों और कानूनी पहलुओं पर आगे की तस्वीर संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए और साफ होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयुष ने अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी है और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया गया है। मामले से जुड़े बाकी विवादों का अंतिम फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
Ayush Malik Religious Conversion
Source: Indian Express, PTI, The Observer Post | Allahabad High Court Court Proceedings















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