Social Media FIR: शामली। आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद अब सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शामली पुलिस ने मामले में पांच एक्स हैंडल और एक फेसबुक प्रोफाइल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि इन सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी जानकारी प्रसारित की गई, जिसमें कहा गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली पुलिस को फटकार लगाई है, जबकि पुलिस के मुताबिक अदालत की कार्यवाही में ऐसा नहीं हुआ।
पुलिस के मुताबिक जिन एक्स अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें करिश्मा अजीज, निखत अली, द मुस्लिम, वसीम अकरम त्यागी और सैयद कैफ हसन के हैंडल शामिल हैं। वहीं फेसबुक पर नदीम सई नाम के अकाउंट के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। अमर उजाला और नवभारत टाइम्स ने पुलिस के हवाले से इन छह अकाउंट की जानकारी प्रकाशित की है।
शामली पुलिस की ओर से दर्ज कराई गई कार्रवाई के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट में अदालत की कार्यवाही को इस तरह पेश किया गया कि हाईकोर्ट ने शामली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और पुलिस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। पुलिस ने इन दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए कानूनी कार्रवाई की है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक उप निरीक्षक जहांगीर की तहरीर पर छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस का पक्ष है कि अदालत ने पुलिस से कोई जवाबी हलफनामा दाखिल करने को नहीं कहा था और पुलिस की ओर से ऐसा कोई हलफनामा भी दाखिल नहीं किया गया।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले आयुष मलिक को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने पेश किया गया था। आयुष के दोस्त मोहम्मद सुल्तान की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अदालत ने उन्हें पेश करने का निर्देश दिया था।
आयुष को कोर्ट में पेश करने के बाद बदला घटनाक्रम..Social Media FIR
आयुष मलिक प्रकरण जून 2026 से ही लगातार चर्चा में रहा है। उनके पिता देवराज मलिक ने अपने बेटे के धर्म परिवर्तन को लेकर शामली कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में चांदनी कुरैशी और उनके परिजनों समेत अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद मामला पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा।
आयुष के मित्र मोहम्मद सुल्तान ने 9 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि आयुष को उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है और उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए। अदालत ने 16 सितंबर को आयुष को पेश करने का आदेश दिया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट ने इससे पहले याचिका के दस्तावेजों को देखते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आयुष ने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाया और चांदनी कुरैशी से विवाह किया।
16 सितंबर को आयुष और उनके पिता देवराज मलिक अदालत में मौजूद रहे। बाद में अदालत की कार्यवाही और आयुष के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आने लगे। कुछ पोस्ट में यह दावा किया गया कि हाईकोर्ट ने शामली पुलिस को फटकार लगाई है। Social Media FIR
शामली पुलिस ने इन दावों पर ऐतराज जताते हुए कहा कि अदालत ने उसके अधिकारियों को किसी तरह की फटकार नहीं लगाई। पुलिस के मुताबिक अदालत के आदेश का पालन करते हुए आयुष को कोर्ट में पेश किया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि अदालत की ओर से पुलिस से कोई जवाबी हलफनामा नहीं मांगा गया था।
दूसरी तरफ आयुष के पिता देवराज मलिक ने भी अदालत में अपने बेटे को बंधक बनाए जाने के आरोपों को गलत बताया। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अदालत के सामने आयुष के दुकान पर काम करने के दौरान की सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य पेश किए जाने की बात कही। उनका कहना था कि आयुष को बंधक बनाकर रखने का आरोप सही नहीं है।
यानी एक तरफ आयुष की स्वतंत्रता को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका अदालत पहुंची, तो दूसरी तरफ परिवार की ओर से बंधक बनाए जाने के आरोप को खारिज किया गया। अब इसी पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर किए गए दावों ने मामले को एक नया रुख दे दिया है।
पुलिस की अपील—बिना सत्यापन पोस्ट और वीडियो आगे न बढ़ाएं
शामली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर खबरों की विश्वसनीयता और पोस्ट के सत्यापन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि संवेदनशील मामलों में आधी-अधूरी जानकारी या अदालत की कार्यवाही को तोड़-मरोड़कर पेश करने से लोगों में गलतफहमी पैदा हो सकती है और कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
Social Media FIR
शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर आने वाली किसी भी पोस्ट, वीडियो या दावे को बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार एसपी ने लोगों से पुलिस और उसके अधिकृत सोशल मीडिया हैंडल से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करने तथा भ्रामक अथवा झूठी सूचना प्रसारित करने से बचने की अपील की है।
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस की ओर से किसी पोस्ट को भ्रामक या तथ्यहीन बताया जाना और अदालत द्वारा उस पोस्ट की सत्यता पर कोई न्यायिक निष्कर्ष दिया जाना दो अलग बातें हैं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार छह सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ FIR पुलिस के आरोपों के आधार पर दर्ज हुई है और मामले की जांच की जा रही है। आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में होगा। Social Media FIR
उधर, आयुष मलिक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की 16 सितंबर की कार्यवाही के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में यह बताया गया है कि अदालत ने आयुष को अपनी इच्छा के मुताबिक रहने और आने-जाने की स्वतंत्रता दी। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण करते हुए आयुष को बालिग बताते हुए उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े पहलू को अहम माना।
इसी घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर हाईकोर्ट की कथित फटकार से जुड़ी पोस्ट सामने आने के बाद शामली पुलिस ने छह अकाउंट पर FIR दर्ज कर दी। अब पुलिस जांच का केंद्र यह रहेगा कि संबंधित पोस्ट किस परिस्थिति में की गईं, उनमें क्या सामग्री थी और क्या वे जानबूझकर भ्रामक सूचना के रूप में प्रसारित की गईं। Social Media FIR
आयुष मलिक प्रकरण पहले ही धर्म परिवर्तन, विवाह, पारिवारिक विवाद और अदालत की कार्यवाही को लेकर संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में सोशल मीडिया पर आने वाली हर नई जानकारी को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। पुलिस ने स्पष्ट तौर पर अपील की है कि आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी दावे को आगे न बढ़ाया जाए।
फिलहाल शामली पुलिस की ओर से छह सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच और अदालत की प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पोस्ट के संबंध में कानूनी स्थिति क्या बनती है।Social Media FIR
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Sources: इंडियन एक्सप्रेस, अमर उजाला , उत्तर प्रदेश पुलिस

















