Sports Corruption Allegation: देहरादून। उत्तराखंड की खेल व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने खिलाड़ियों, अभिभावकों और खेल जगत में बहस छेड़ दी है। एक युवा ताइक्वांडो खिलाड़ी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने कथित तौर पर आरोप लगाया कि उसे इंटरनेशनल प्रतियोगिता में खेलने का मौका दिलाने के लिए 1.5 लाख रुपये मांगे गए। खिलाड़ी का कहना है कि उसने नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल किया, इसके बावजूद कथित पैसे की मांग के कारण वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकी।
यह आरोप सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चर्चा में आया है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में अभी इस आरोप की स्वतंत्र सरकारी जांच या किसी सक्षम एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए खिलाड़ी की ओर से लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि राज्य सरकार खुद खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने और खेल सुविधाओं को मजबूत करने की बात करती रही है। उत्तराखंड सरकार की खेल नीति में खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। मसलन, 2021 में स्वीकृत खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को उपकरणों के लिए डेढ़ लाख रुपये तक की सहायता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए यात्रा सुविधाओं का प्रावधान बताया गया था।
ऐसे में अगर किसी खिलाड़ी को वास्तव में प्रतियोगिता में भेजने के नाम पर अलग से रकम मांगी गई है, तो यह केवल एक खिलाड़ी की परेशानी नहीं बल्कि पूरी खेल व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल होगा।
गोल्ड मेडल के बाद भी इंटरनेशनल का सपना अधूरा रहने का दावा
युवा खिलाड़ी के आरोप का सबसे गंभीर पहलू यही है कि उसने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर खेलने का सपना देखा था। खेल में किसी खिलाड़ी के लिए नेशनल स्तर तक पहुंचना ही आसान नहीं होता। इसके लिए वर्षों की मेहनत, ट्रेनिंग, डाइट, कोचिंग और लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना पड़ता है। Sports Corruption Allegation
ऐसे में अगर किसी खिलाड़ी को चयन या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कथित आर्थिक मांग का सामना करना पड़े तो स्वाभाविक तौर पर सवाल उठता है कि प्रतिभा और प्रदर्शन का मूल्यांकन किस आधार पर हो रहा है।
मामले में सामने आए दावे के मुताबिक खिलाड़ी ने मुख्यमंत्री धामी के सामने अपनी परेशानी रखी। उसने कथित तौर पर बताया कि उससे इंटरनेशनल प्रतियोगिता में खेलने के लिए 1.5 लाख रुपये मांगे गए। खिलाड़ी के मुताबिक रकम नहीं देने के कारण उसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का रास्ता बंद हो गया।
यह आरोप अभी जांच का विषय है। किसी व्यक्ति, अधिकारी, संस्था या संगठन को बिना जांच दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन आरोप सामने आने के बाद सरकार के लिए सबसे जरूरी काम यही है कि वह मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए।
अगर आरोप गलत है तो जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी और संबंधित लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन अगर आरोप सही पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। Sports Corruption Allegation
उत्तराखंड सरकार की अपनी आधिकारिक सूचनाओं में भी राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल करने वाले ताइक्वांडो खिलाड़ियों को सम्मानित किए जाने का उल्लेख मिलता है। दिसंबर 2025 में बागेश्वर में मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय स्तर के स्वर्ण पदक विजेता ताइक्वांडो खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की थी Sports Corruption Allegation

यही वजह है कि अब सामने आया यह आरोप सरकार के सामने एक संवेदनशील सवाल खड़ा करता है—अगर सरकार खिलाड़ियों को सम्मानित कर रही है तो क्या चयन और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भेजने की प्रक्रिया भी उतनी ही पारदर्शी है?
धामी सरकार पर विपक्ष का हमला, सख्ती और व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
मामले को लेकर कांग्रेस ने धामी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में इस ताइक्वांडो खिलाड़ी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि खिलाड़ी ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी पीड़ा रखी और इंटरनेशनल प्रतियोगिता में जाने के लिए कथित तौर पर 1.5 लाख रुपये मांगे जाने की बात कही। Sports Corruption Allegation
विपक्ष का कहना है कि सरकार को केवल बयान देने के बजाय पूरे मामले की जांच करानी चाहिए और अगर किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यहां धामी सरकार की कथित सख्ती और शिद्दत को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। सरकार कई मुद्दों पर कड़े प्रशासनिक फैसलों और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का दावा करती रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी अधिकारियों को लापरवाही न करने और जनसमस्याओं का तेजी से समाधान करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं।
लेकिन विपक्ष का सवाल है कि शासन की यह सख्ती आम खिलाड़ी तक भी उसी मजबूती से क्यों नहीं पहुंच रही? अगर किसी युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के लिए कथित तौर पर पैसे की मांग का सामना करना पड़ा है, तो सरकार को यह पता लगाना होगा कि आखिर खेल व्यवस्था में ऐसी शिकायत की नौबत क्यों आई।
यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि धामी सरकार पर लगाए गए आरोपों और सरकार की वास्तविक भूमिका के बीच अंतर किया जाना चाहिए। उपलब्ध स्रोतों में खिलाड़ी के आरोप और विपक्षी प्रतिक्रिया तो सामने आती है, लेकिन इस मामले में सरकार या किसी जांच एजेंसी की ओर से आरोपों को सही ठहराने वाली अंतिम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
इसलिए खबर का मूल सवाल आरोप की सच्चाई से ज्यादा यह है कि सरकार इस आरोप की जांच किस तरह करती है।
अगर मुख्यमंत्री के सामने शिकायत रखी गई है तो मामला और भी गंभीर हो जाता है। मुख्यमंत्री राज्य के प्रशासनिक मुखिया हैं। ऐसे में खिलाड़ी की शिकायत को संबंधित विभाग तक भेजकर उसकी निष्पक्ष जांच कराना सरकार की जिम्मेदारी बनती है।
खेल नीति में सहायता के दावे, फिर खिलाड़ी से पैसे मांगने का सवाल क्यों? Sports Corruption Allegation
उत्तराखंड में खिलाड़ियों के लिए सरकारी सहायता और प्रोत्साहन की कई व्यवस्थाएं हैं। 2021 की खेल नीति में खिलाड़ियों के उपकरणों के लिए डेढ़ लाख रुपये तक की सहायता, प्रतियोगिताओं के लिए यात्रा सुविधा और पदक विजेताओं के लिए पुरस्कार राशि जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया था। Sports Corruption Allegation
इसके अलावा राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले ताइक्वांडो खिलाड़ियों को सम्मानित किए जाने की जानकारी मिलती है।
ऐसे में अगर किसी खिलाड़ी से इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भेजने के लिए निजी तौर पर रकम मांगी गई, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी खेल सहायता और वास्तविक चयन प्रक्रिया के बीच कहीं कोई खामी तो नहीं है।
खेल में चयन पूरी तरह प्रदर्शन, नियम और निर्धारित मानकों के आधार पर होना चाहिए। खिलाड़ी को यह मालूम होना चाहिए कि उसे किस प्रतियोगिता के लिए किस प्रक्रिया से चुना गया है, खर्च कौन उठाएगा और अगर कोई शुल्क है तो उसकी आधिकारिक रसीद और नियम क्या हैं।
युवा खिलाड़ियों के लिए यह पारदर्शिता बेहद जरूरी है। एक गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाला खिलाड़ी अगर वर्षों की मेहनत के बाद नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीतता है और उसके सामने अचानक बड़ी रकम की मांग रख दी जाए तो उसका मनोबल टूट सकता है।
इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे मामले में केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे। चयन प्रक्रिया, संबंधित संघ, अधिकारियों और प्रतियोगिता के रिकॉर्ड की जांच की जाए। खिलाड़ी से यदि रकम मांगी गई थी तो किसने मांगी, किस उद्देश्य से मांगी और क्या उसका कोई आधिकारिक आधार था—इन तमाम सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।
अगर जांच में आरोप निराधार निकलता है तो यह भी सार्वजनिक होना चाहिए ताकि किसी संस्था या व्यक्ति की छवि पर बेवजह सवाल न रहे। लेकिन यदि आरोप सही पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे दूसरे खिलाड़ियों में भरोसा पैदा हो।
कुल मिलाकर उत्तराखंड के इस मामले ने खेल व्यवस्था की उस बुनियादी जरूरत को सामने ला दिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता—प्रतिभा को अवसर मिलना चाहिए, पैसे के आधार पर अवसर नहीं। Sports Corruption Allegation
ताइक्वांडो खिलाड़ी का कथित आरोप अब सरकार के लिए एक परीक्षा बन गया है। धामी सरकार यदि वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त नीति को लेकर गंभीर है तो इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई जनता के सामने लाना उसके लिए सबसे बेहतर जवाब होगा।
खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय सपना पूरा हुआ या नहीं, यह अलग सवाल है; लेकिन भविष्य में किसी दूसरे युवा खिलाड़ी को ऐसी शिकायत लेकर मुख्यमंत्री के सामने खड़ा न होना पड़े, इसके लिए खेल चयन और आर्थिक सहायता की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाना जरूरी है। Sports Corruption Allegation
Sources : ANI, Hindustan Times, उत्तराखंड सरकार















