Jauhar University Protest: रामपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गई है। विश्वविद्यालय की कुछ इमारतों पर प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई और ध्वस्तीकरण के आदेशों के बाद छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। हाल के दिनों में विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने शांतिपूर्ण धरना देते हुए कहा कि “जौहर यूनिवर्सिटी सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के सपनों का नाम है।” छात्रों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों को बचाना समाज और देश के भविष्य के लिए जरूरी है।
इसी बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलाने की कोशिश की गई तो किसान ट्रैक्टरों के साथ उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे। उनका कहना था कि शिक्षा संस्थानों को बचाना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी कार्रवाई से पहले कानून तथा न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान होना चाहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों के संबंध में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किए गए। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानूनी और प्रशासनिक आधार पर की जा रही है, जबकि विश्वविद्यालय से जुड़े लोग और विपक्षी दल इसे शिक्षा तथा छात्रों के हितों के खिलाफ बता रहे हैं।

विश्वविद्यालय परिसर में कई दिनों से छात्र शांतिपूर्ण धरने पर बैठे….
विश्वविद्यालय परिसर में कई दिनों से छात्र शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या दल की नहीं, बल्कि शिक्षा और भविष्य की है। छात्रों ने मांग की है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और पूरे मामले का निष्पक्ष समाधान निकाला जाए। कई छात्र संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।Jauhar University Protest

हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए..
समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी जौहर यूनिवर्सिटी के समर्थन में आवाज़ उठाई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और कई विधायक विश्वविद्यालय पहुंचे तथा प्रशासन से कार्रवाई रोकने की मांग की। उनका कहना है कि हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए और किसी भी निर्णय में छात्रों के हित सर्वोपरि होने चाहिए। auhar University Protest

प्रशासन का कहना है कार्रवाई नियमानुसार होगी …
दूसरी ओर, राज्य सरकार और प्रशासन का कहना है कि कानून के अनुसार जो भी कार्रवाई होगी, वह नियमानुसार होगी। प्रशासन का दावा है कि यह मामला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जा रहा है। Jauhar University Protest
राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर बयानबाज़ी तेज हो गई है। अलग-अलग दल इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय को बचाया जाना चाहिए, जबकि सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि नियमों का पालन सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी चिंता उन हजारों छात्रों की है जो जौहर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी डिग्री, पढ़ाई और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। उनका आग्रह है कि विवाद का समाधान बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाए ताकि शिक्षा का माहौल प्रभावित न हो।

फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी का मामला न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में अदालत और प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।Jauhar University Protest













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