examination Transparency: नई दिल्ली।संसद की कार्यवाही में लंबे समय बाद मंगलवार को ऐसा नजारा देखने को मिला जब सदन देर रात तक चला और एक अहम विधेयक पर चर्चा हुई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए लाए गए सख्त कानून पर खुशी जाहिर की, लेकिन साथ ही विपक्ष के रवैये पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार एक महत्वपूर्ण कानून लेकर आई है, जिसका सीधा संबंध देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, लेकिन विपक्ष ने विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को ज्यादा तरजीह दी।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि काफी दिनों के बाद संसद लंबे समय तक चली और सदस्यों ने देर रात तक बैठकर काम किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को रोकने के लिए सरकार कठोर कदम उठा रही है। ऐसे कानून की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, क्योंकि परीक्षा में धांधली से मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों पर गहरा असर पड़ता है।
रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब किसी विधेयक पर चर्चा होती है तो सदस्यों को उसके प्रावधानों, कमियों और सुधार के सुझावों पर बात करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के अधिकतर वक्ताओं ने बिल की मूल भावना पर चर्चा नहीं की और अपनी राजनीतिक बातें ही रखते रहे। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष कानून की मजबूती और उसमें सुधार के सुझाव देता तो चर्चा ज्यादा सार्थक होती।

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पेश किया…
दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से पेश किया गया सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। इस विधेयक में जांच प्रक्रिया को तेज करने, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के माध्यम से मामलों के जल्द निपटारे और कड़े दंडात्मक प्रावधानों पर जोर दिया गया है। examination Transparency
पेपर लीक का मुद्दा पिछले कुछ समय से देश की शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक होने से लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और समय प्रभावित होता है। खासकर युवा वर्ग में इसको लेकर काफी नाराजगी देखी गई है। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं…examination Transparency
संसद में हुई बहस के दौरान विपक्ष ने भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से कई सवाल किए। विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी। वहीं सरकार का पक्ष है कि मजबूत कानूनी व्यवस्था के बिना ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई करना मुश्किल होता है। examination Transparency
सियासी गर्माहट के बीच यह विधेयक शिक्षा और रोजगार से जुड़े युवाओं के लिए अहम माना जा रहा है। भारत में हर साल करोड़ों छात्र सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कायम रखना सरकार और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
जानकारों का मानना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल एक परीक्षा की समस्या नहीं होतीं, बल्कि इससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। मेहनत करने वाले छात्रों को जब यह महसूस होता है कि उनकी जगह किसी गलत तरीके से फायदा उठाने वाला व्यक्ति आगे निकल सकता है, तो उनका विश्वास कमजोर होता है। इसलिए जरूरी है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा संचालन की व्यवस्था भी पूरी तरह मजबूत और पारदर्शी बनाई जाए। examination Transparency
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में अपने बयान के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के लिए गंभीर है। हालांकि विपक्ष और सरकार के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं, लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नजर आते हैं कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह नया कानून लागू होने के बाद परीक्षा व्यवस्था में कितना बदलाव लाता है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितनी प्रभावी रोक लग पाती है।examination Transparency
Sources: PIB, Economic Times, Navbharat Times















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