iqra hasan fir: सहारनपुर में सियासत अब और ज्यादा गरमा गई है। पहले सपा सांसद इकरा हसन अपने समर्थकों की गिरफ्तारी के विरोध में थाने में धरने पर बैठीं और अब इस पूरे मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए खुद इकरा हसन के खिलाफ ही FIR दर्ज कर दी है। इस कार्रवाई के बाद मामला सिर्फ धरने और विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीतिक लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है। पूरे पश्चिमी यूपी की नजर इस मामले पर टिकी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला शामली जिले के जसाला गांव के रहने वाले मोनू कश्यप हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि मृतक की मां न्याय की मांग को लेकर सपा सांसद इकरा हसन के साथ सहारनपुर DIG कार्यालय पहुंची थीं। आरोप है कि पीड़ित परिवार अपनी बात अधिकारियों के सामने रखना चाहता था, लेकिन वहां स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। इकरा हसन ने दावा किया कि पीड़ित महिला की बात को गंभीरता से नहीं सुना गया और इसी बात को लेकर विवाद बढ़ने लगा।
मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब DIG कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक जमा होने लगे। पुलिस का कहना है कि समर्थकों की भीड़ की वजह से सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई और सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ। वहीं दूसरी तरफ सपा नेताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे और प्रशासन ने जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखाई।
पुलिस के अनुसार हालात बिगड़ते देखकर महिला पुलिसकर्मियों ने इकरा हसन को कुछ समय के लिए महिला थाने ले जाया गया था। हालांकि कुछ ही मिनट बाद उन्हें छोड़ दिया गया। लेकिन इस दौरान उनके साथ मौजूद कई समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की गई और कुछ लोगों को शांति भंग करने के आरोप में हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

अपने समर्थकों की गिरफ्तारी से नाराज इकरा हसन सीधे सदर बाजार थाने पहुंच गईं और वहां धरने पर बैठ गईं। थाने के अंदर और बाहर समर्थकों की भीड़ जमा होने लगी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और सांसद के बीच तीखी बहस की खबरें भी सामने आईं। मामला धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
अब इस पूरे मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए इकरा हसन समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR में इकरा हसन के अलावा पूर्व राज्यमंत्री मांगेराम कश्यप समेत कई अन्य लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 20 से 25 अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है। पुलिस का आरोप है कि सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, सड़क जाम करने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

वहीं समाजवादी पार्टी और इकरा हसन के समर्थक इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रहे हैं। उनका कहना है कि एक पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाने पर सांसद के खिलाफ केस दर्ज करना गलत संदेश देता है। विपक्षी नेताओं की तरफ से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं और अब यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है।
फिलहाल सहारनपुर का यह मामला लगातार तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे आवाज दबाने की कोशिश कह रहा है। अब सबकी नजर आगे की जांच और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला आने वाले दिनों में पश्चिमी यूपी की राजनीति को और गर्म कर सकता है।

