Telegram Ban India : नई दिल्ली: देश में करोड़ों यूज़र्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को सही ठहराते हुए Telegram की याचिका खारिज कर दी है। यह प्रतिबंध NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले लगाया गया था, ताकि पेपर लीक और परीक्षा में धांधली जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

इस फैसले के बाद Telegram को बड़ा झटका लगा है, जबकि केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को राहत मिली है। मामला पिछले कई दिनों से चर्चा में था क्योंकि Telegram का दावा था कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना करोड़ों आम यूज़र्स के अधिकारों का उल्लंघन है।

आखिर Telegram पर बैन क्यों लगाया गया ? Telegram Ban India ?

केंद्र सरकार का कहना था कि NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े फर्जी पेपर, लीक के दावे और धोखाधड़ी के नेटवर्क Telegram के जरिए तेजी से फैल रहे थे। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि री-एग्जाम से पहले भी इसी तरह की गतिविधियां दोहराई जा सकती हैं।

सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए Telegram की सेवाओं को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया। यह रोक 22 जून तक लागू रखने का फैसला लिया गया था।

Telegram ने कोर्ट में क्या दलील दी ?

Telegram की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने अदालत में कहा कि पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना एक अत्यधिक और असंगत कदम है। कंपनी का तर्क था कि कुछ लोगों की गलत गतिविधियों के कारण 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूज़र्स को सजा नहीं दी जा सकती।

कंपनी ने यह भी कहा कि अगर कुछ आपत्तिजनक चैनल या पोस्ट समस्या पैदा कर रहे थे तो सरकार उन्हें हटाने का निर्देश दे सकती थी, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है। Telegram ने दावा किया कि वह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है और नियमों का पालन करने को तैयार है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति तेजस करिया ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि सरकार द्वारा दिए गए कारण पर्याप्त हैं और पूरी प्रक्रिया कानून के तहत अपनाई गई है।

कोर्ट ने माना कि यह एक आपातकालीन स्थिति थी और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार था। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार का कदम “प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट” पर खरा उतरता है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता।

फैसले में अदालत ने यह भी माना कि धारा 69A के तहत जरूरत पड़ने पर पूरे प्लेटफॉर्म तक पहुंच को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। Telegram का यह तर्क भी खारिज कर दिया गया कि कानून केवल किसी विशेष जानकारी को ब्लॉक करने की अनुमति देता है, पूरे प्लेटफॉर्म को नहीं।

सुनवाई के दौरान उठे बड़े सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से यह सवाल भी पूछा था कि क्या कुछ परीक्षार्थियों की वजह से 15 करोड़ यूज़र्स के अधिकारों पर रोक लगाई जा सकती है। दूसरी तरफ अदालत ने Telegram से भी पूछा कि उसने रियल टाइम मॉनिटरिंग और गलत गतिविधियों को रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए हैं। Telegram Ban India

सरकार ने जवाब में कहा कि Telegram की तकनीकी संरचना ऐसी है जिससे फर्जी चैनल, बॉट्स और संदिग्ध गतिविधियों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। सरकार ने दावा किया कि यही वजह है कि अस्थायी प्रतिबंध जरूरी था।

छात्रों और यूज़र्स पर क्या असर?

Telegram भारत में केवल चैटिंग ऐप नहीं है। लाखों छात्र पढ़ाई की सामग्री, नोट्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा कई छोटे व्यवसाय और कंटेंट क्रिएटर्स भी Telegram पर निर्भर हैं।

बैन के कारण इन यूज़र्स को अस्थायी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया सुरक्षित रखने के लिए यह कदम जरूरी था और यह स्थायी प्रतिबंध नहीं है।

इस मामले ने एक नई बहस को जन्म दिया है। एक तरफ सरकार और जांच एजेंसियां परीक्षा में पारदर्शिता और सुरक्षा की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल अधिकारों से जुड़े लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना सही तरीका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मामला भारत में इंटरनेट स्वतंत्रता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और सरकारी शक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने केंद्र सरकार की कार्रवाई को कानूनी समर्थन दे दिया है। Telegram को इस मामले में राहत नहीं मिली है और NEET-UG री-एग्जाम के दौरान लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Telegram आगे किसी बड़ी अदालत का रुख करता है या फिर सरकार के साथ मिलकर नए सुरक्षा उपायों पर काम करता है।

देशभर के छात्रों, अभिभावकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। Telegram Ban India