Trump Iran Deal Agreement : नई दिल्ली: महीनों से युद्ध, मिसाइल हमलों और राजनीतिक टकराव से जूझ रहे मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजरती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है, लेकिन अब इस समझौते के सामने नई बाधा खड़ी हो गई है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर स्थायी शांति चाहिए तो दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की वापसी भी सुनिश्चित करनी होगी। इसी मुद्दे ने पूरे समझौते को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को मध्य पूर्व के देशों से अपील करते हुए कहा कि सभी पक्ष जारी वार्ताओं को आगे बढ़ने दें और शांति प्रक्रिया को सफल बनाने में सहयोग करें। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र को अब संघर्ष नहीं बल्कि स्थिरता की जरूरत है और बातचीत को “खूबसूरती से आगे बढ़ने” दिया जाना चाहिए।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक अंतरिम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने सैन्य गतिविधियों को रोकने, तनाव कम करने और अगले 60 दिनों के भीतर स्थायी समझौते पर बातचीत करने पर सहमति जताई है। समझौते में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने और क्षेत्रीय तनाव कम करने जैसे बिंदु भी शामिल हैं।
अब्बास अराघची ने कहा इज़राइली सेना पीछे नहीं हुई तो ?
हालांकि समझौते के लागू होने के कुछ ही समय बाद नया विवाद सामने आ गया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जब तक दक्षिणी लेबनान में मौजूद इज़राइली सेना पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध को पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता। ईरान का कहना है कि लेबनान का मुद्दा भी क्षेत्रीय शांति से जुड़ा हुआ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर इज़राइल इस मांग से सहमत दिखाई नहीं दे रहा। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि उनकी सैन्य मौजूदगी सुरक्षा कारणों से है और वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं कर सकते। यही वजह है कि समझौते के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बयान दिया है। उन्होंने इज़राइल से अपील की कि वह समझौते को कमजोर करने वाले कदम न उठाए। वेंस ने कहा कि मौजूदा समझौता क्षेत्र में बड़े युद्ध को रोकने का अवसर दे सकता है और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
समझौते को लेकर एक और बड़ी खबर पाकिस्तान से सामने आई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस समझौते से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्विट्जरलैंड जाना था, लेकिन समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर हो जाने के बाद उनकी यात्रा स्थगित कर दी गई। पाकिस्तान ने कहा कि अब समझौता लागू हो चुका है और आगे तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहेगी।

इस बीच वैश्विक बाजारों ने भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी हुई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। हाल के संघर्ष के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई थी, लेकिन अब समझौते के बाद व्यापारिक मार्गों को सामान्य करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को कुछ राहत मिली है।
समझौते का हो रहा विरोध Trump Iran Deal Agreement
हालांकि समझौते का विरोध भी हो रहा है। अमेरिका और इज़राइल के कुछ राजनीतिक वर्गों का मानना है कि समझौते में ईरान को काफी रियायतें दी गई हैं जबकि बदले में पर्याप्त सुरक्षा गारंटी नहीं मिली है। आलोचकों का कहना है कि यह समझौता भविष्य में नए विवादों को जन्म दे सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि अगर यह समझौता नहीं होता तो क्षेत्र एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ सकता था।
संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा है कि इज़राइल को ट्रंप प्रशासन पर भरोसा है और उसे उम्मीद है कि आगे की बातचीत में उसके सुरक्षा हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने इस समझौते को अंतिम समाधान नहीं बल्कि बातचीत की शुरुआत बताया।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच चल रही बातचीत किस दिशा में जाती है। अगर लेबनान को लेकर पैदा हुआ विवाद सुलझ जाता है तो यह समझौता मध्य पूर्व में लंबे समय बाद स्थिरता की शुरुआत बन सकता है। लेकिन अगर मतभेद और बढ़े तो शांति की यह कोशिश एक बार फिर बड़े संकट में बदल सकती है।
मध्य पूर्व का यह घटनाक्रम सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि वाशिंगटन से लेकर तेहरान, तेल अवीव और यूरोप तक हर कोई इस समझौते के अगले कदम पर नजर रखे हुए है। Trump Iran Deal Agreement

