Monsoon Session: नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी सुरक्षा देने वाले Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को संसद से मंजूरी मिलने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। इस विधेयक के तहत वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसका अपमान करने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। संसद के दोनों सदनों से बिल पारित होने के बाद अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
इस बीच जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने बिल का विरोध करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक लोकतांत्रिक तरीके से पारित नहीं किया गया। उनके मुताबिक, संसद में इस पर पर्याप्त बहस और चर्चा नहीं हुई और विपक्ष की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए इसे जल्दबाजी में पारित कर दिया गया।
रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि उनकी राय में यह विधेयक संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म और आस्था के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने दावा किया कि अदालतों के कई फैसलों में धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार माना गया है और किसी भी व्यक्ति पर किसी धार्मिक या वैचारिक आचरण को जबरन नहीं थोपा जा सकता। यह उनके राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टिकोण का हिस्सा है।
संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देना है: केंद्र सरकार
दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को वही कानूनी संरक्षण देना है, जो पहले से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान जन गण मन को प्राप्त है। सरकार का तर्क है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है और यह कानून उसी भावना को मजबूत करेगा। Monsoon Session

राज्यसभा में विपक्ष के कई सांसदों ने वॉकआउट भी किया…
संसद में बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के कई दलों ने विरोध दर्ज कराया। राज्यसभा में विपक्ष के कई सांसदों ने वॉकआउट भी किया। विपक्ष का आरोप था कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी, जबकि सरकार का कहना था कि सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।Monsoon Session
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने कहा यह विधेयक वैचारिक एजेंडे से प्रेरित है…Monsoon Session
इस मुद्दे पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने भी अपनी आपत्ति जताई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह विधेयक वैचारिक एजेंडे से प्रेरित है और इसे राजनीतिक उद्देश्य से लाया गया है। वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान किसी राजनीतिक विचारधारा का नहीं बल्कि पूरे देश का विषय है।Monsoon Session
संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कानून की अंतिम व्याख्या न्यायपालिका करती है। यदि इस विधेयक को अदालत में चुनौती दी जाती है तो उसकी संवैधानिक वैधता पर न्यायालय फैसला करेगा। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि संसद में मतभेद और बहस लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुद्दा आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा कदम बता रही है, जबकि दूसरी ओर विपक्ष के कुछ दल इसे नागरिक अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता के नजरिए से देख रहे हैं।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा वंदे मातरम में भगवान और देवी के बारे में पूजा की बात है…
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि आप जब जन गण मन पढ़ते हैं, तो उसमें देश दिखता है, देश की जनता दिखती है. जब आप वंदे मातरम पढ़ते हैं, तो उसमें भगवान और देवी के बारे में पूजा की बात है. Monsoon Session

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘आप जब जन गण मन पढ़ते हैं, तो उसमें क्या दिखता है. उसमें यह देश दिखता है, देश की जनता दिखती है. जब आप वंदे मातरम पढ़ते हैं, तो उसमें भगवान और देवी के बारे में पूजा की बात है. अब उन मुजाहिदीन-ए-आजादी को क्या बोलेंगे, जिन्होंने इस देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी. जन गण मन तो जनता के लिए लिखा गया था.’
उन्होंने कहा, ‘मैं कह रहा हूं कि साल 1950 में राजेंद्र प्रसाद ने बहुत बड़ी गलती की थी. उन्होंने बिना रेजुलेशन के कह दिया था कि यह राष्ट्रीय गीत है, जबकि रेजुलेशन लेना चाहिए था. कहीं पर भी राष्ट्रीय गीत की परिभाषा नहीं है. आप (केंद्र सरकार) आर्टिकल 25, 26 और 29 का उल्लंघन कर रहे हैं.
समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, मातरम बिल का सम्मान हम लोग करते हैं.
समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, ‘वंदे मातरम बिल का सम्मान सभी देश के लोग करते हैं, हम लोग करते हैं. सभी करते हैं. ये केवल ध्यान भटकाने के लिए ये सब बिल ला रहे हैं, ताकि राम मंदिर के चंदा चोरी जो हुई है, उस पर चर्चा न हो पाए.’ उन्होंने कहा, ‘बिल का हम कोई विरोध नहीं करते हैं, बिल का हम सम्मान करते हैं. ये बिल तो पहले से ही है, कोई लाने की आवश्यकता नहीं थी. हम और सभी इसका सम्मान करते हैं. Monsoon Session
फिलहाल वंदे मातरम् बिल ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान का कानून बता रही है, जबकि विपक्ष का एक वर्ग इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में सवालों के घेरे में रख रहा है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस कानून के लागू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।Monsoon Session
Sources: Economictimes, Times of India, Abp news















2 thoughts on “Monsoon Session: वंदे मातरम् बिल पर संसद में संग्राम, विपक्ष ने उठाए बड़े सवाल”