Student Protest Arrest: प्रयागराज/नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर बिहार और असम सरकारों ने हालिया छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में एफआईआर वापस लेने और गिरफ्तार लोगों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू की है, वहीं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इन घटनाक्रमों ने कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
प्रयागराज पुलिस के अनुसार जिन 10 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, उनके नाम शिवम यादव, अभिषेक सोनकर, अवनीश यादव, अमर यादव, कारगिल सिंह, आशीष यादव, दिलशाद, मोहम्मद सूफियान, मोहम्मद वैश और संदीप कुमार हैं। पुलिस का कहना है कि इन लोगों पर छात्र आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप हैं।
हालांकि, इस मामले को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ संगठनों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोग आंदोलन से जुड़े थे और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं प्रयागराज पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार व्यक्तियों में अधिकांश छात्र नहीं हैं तथा कई आरोपियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी मौजूद है। पुलिस के अनुसार कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और दर्ज मामलों के आधार पर की गई है।
आंदोलन से जुड़े मामलों में बिहार और असम में अलग तस्वीर देखने को मिली…
इसी बीच बिहार और असम में अलग तस्वीर देखने को मिली। बिहार सरकार ने हालिया छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने तथा आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की घोषणा की। असम सरकार ने भी इसी तरह के मामलों में कानूनी कार्रवाई वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी।Student Protest Arrest

इन फैसलों के बाद आंदोलन से जुड़े संगठन CJP ने इसे सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही कहा कि जिन राज्यों में अब भी प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी है, वहां भी समान नीति अपनाई जानी चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में अभी भी प्रदर्शनकारियों पर कानूनी दबाव बनाया जा रहा है और सभी एफआईआर वापस ली जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है….Student Protest Arrest
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है। यदि किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों में अंतर किया जाना चाहिए। Student Protest Arrest
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक राज्य अपने यहां दर्ज मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेता है। यदि किसी मामले में केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन का प्रश्न हो तो सरकारें एफआईआर वापस लेने का निर्णय ले सकती हैं, जबकि हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप होने पर जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रह सकती है।
विपक्ष का कहना है कि सभी राज्यों में एक समान नीति अपनाई जानी चाहिए…
राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्ष का कहना है कि सभी राज्यों में एक समान नीति अपनाई जानी चाहिए, जबकि सरकार समर्थक पक्ष का तर्क है कि कानून के उल्लंघन और शांतिपूर्ण विरोध को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। Student Protest Arrest
फिलहाल प्रयागराज में गिरफ्तार किए गए लोगों का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं बिहार और असम में केस वापसी और रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य राज्यों में भी इस संबंध में क्या रुख अपनाया जाता है और क्या आंदोलन से जुड़े मामलों में कोई व्यापक नीति सामने आती है। Student Protest Arrest
Sources:ANI, Press Trust of India (PTI), The Times of India, Akashvani News,The Indian Express














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