Jantar Mantar Assault Case: नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विवाद को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। Cockroach Janta Party यानी CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उनके एक समर्थक के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की गई थी, जिसमें उन्हें सिर में चोट आई। CJP का कहना है कि घटना के बाद से ही दिल्ली पुलिस से आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा लगाने की मांग की जाती रही है, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
यह मामला उस वक्त फिर सुर्खियों में आया, जब कथित तौर पर घटना में शामिल बताए जा रहे स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सामने आया। वीडियो में वह जंतर-मंतर की घटना के बारे में बात करते हुए संजय कुमार के सिर पर चोट पहुंचाने का दावा करता दिखाई देता है। इसी वीडियो को आधार बनाकर CJP ने दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी।
हालांकि, इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस का पक्ष इससे अलग है। पुलिस का कहना है कि संजय कुमार को झगड़े के दौरान कड़े से चोट लगी थी और RML अस्पताल की मेडिकल जांच में चोट को साधारण बताया गया था। पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को भी तथ्यहीन बताया है।

जंतर-मंतर की घटना को लेकर फिर आमने-सामने CJP और दिल्ली पुलिस
मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान झड़प हुई थी, जिसमें गाजियाबाद निवासी 38 वर्षीय संजय कुमार के सिर में चोट आई। पुलिस का कहना है कि उन्हें किसी व्यक्ति द्वारा पहने गए धातु के कड़े से चोट लगी थी। बाद में उनका RML अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया और चोट को डॉक्टरों ने ‘सिंपल’ यानी सामान्य प्रकृति की बताया। Jantar Mantar Assault Case
दूसरी तरफ CJP लगातार इस घटना को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग करता रहा है। संगठन का आरोप है कि संजय कुमार की चोट सामान्य नहीं थी और मामले में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा लगनी चाहिए थी।
अब इस विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया जब सोशल मीडिया पर एक पॉडकास्ट का वीडियो सामने आया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर घटना का जिक्र करते हुए संजय कुमार पर हमला करने की बात करता सुनाई देता है। रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में उसने यह भी दावा किया कि राजनीतिक संपर्कों के कारण उसे जेल नहीं जाना पड़ा। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
CJP का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से घटना में अपनी भूमिका स्वीकार करने जैसी बातें कर रहा है तो पुलिस को मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए उससे पूछताछ और कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए।
आशुतोष रांका ने लगाए राजनीतिक दबाव के आरोप Jantar Mantar Assault Case
शुक्रवार को CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका, प्रवक्ता सौरव दास और अन्य समर्थक पटेल चौक से संसद मार्ग थाने की ओर पहुंचे। CJP ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार करीब 50 समर्थक वहां जुटे थे। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी प्रदर्शन में पहुंचकर कार्रवाई की मांग का समर्थन किया।
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रांका का आरोप है कि उनकी टीम ने शुरुआत से ही संजय कुमार के साथ खड़े होकर पुलिस से न्याय की मांग की। उनका कहना है कि FIR दर्ज होने के बाद भी जब संगठन ने हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने की मांग की तो पुलिस ने ऐसा नहीं किया।
CJP नेताओं का यह भी कहना है कि संजय कुमार के परिवार का संबंध दलित समुदाय से है, इसलिए मामले में SC/ST कानून के प्रावधानों पर भी विचार होना चाहिए। सौरव दास ने पुलिस पर आरोप लगाया कि कार्रवाई के लिए दबाव बनाने पर उन्हें अदालत का रुख करने को कहा गया।
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आशुतोष रांका ने अब मांग की है कि वीडियो में घटना को लेकर कथित बयान देने वाले लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो पुलिस को किसी भी राजनीतिक प्रभाव की परवाह किए बिना कानून के मुताबिक कदम उठाना चाहिए।
CJP की ओर से लगाए गए आरोपों में दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का नाम भी सामने आया है। संगठन का दावा है कि आरोपी ने अपने कथित राजनीतिक संपर्कों का जिक्र किया और इसी वजह से पुलिस कार्रवाई प्रभावित हुई। लेकिन यहां यह साफ करना जरूरी है कि कपिल मिश्रा द्वारा पुलिस पर दबाव डालने का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है। दिल्ली पुलिस ने साफ तौर पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप को खारिज किया है।
दिल्ली पुलिस का जवाब- मामला कानून के मुताबिक चल रहा है
विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष सामने रखा। पुलिस ने कहा कि मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।Jantar Mantar Assault Case
नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा के मुताबिक संजय कुमार को झड़प के दौरान कड़े से चोट लगी थी। पुलिस ने ‘खोपड़ी फटने’ जैसे दावों को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल जांच में चोट को सामान्य प्रकृति का बताया गया था।
पुलिस के अनुसार संजय कुमार की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सूरज कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज को प्रदर्शन स्थल से हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें नोटिस देकर पूछताछ की गई और पुलिस ने कहा है कि सक्षम अदालत के सामने चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
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यानी दिल्ली पुलिस का दावा है कि ऐसा नहीं है कि मामले में कोई कार्रवाई ही नहीं हुई। पुलिस के मुताबिक FIR दर्ज हुई, आरोपियों से पूछताछ की गई और अब जांच आगे बढ़ रही है।
लेकिन CJP इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। संगठन का सवाल है कि अगर वीडियो में आरोपी खुद घटना के बारे में बयान दे रहा है तो उसके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? इसी सवाल को लेकर शुक्रवार को CJP कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने का रुख किया। Jantar Mantar Assault Case
इस पूरे मामले में अब सबसे अहम भूमिका वीडियो रिकॉर्डिंग, मेडिकल रिपोर्ट, FIR, पुलिस जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान की होगी। इन्हीं सबूतों के आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि संजय कुमार को कितनी गंभीर चोट लगी थी और घटना में किसकी क्या भूमिका थी।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट तक सीमित नहीं रह गया है। CJP इसे प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही से जोड़ रहा है, जबकि पुलिस इसे एक झड़प और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई का मामला बता रही है।
जंतर-मंतर दिल्ली में लंबे समय से विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। CJP ने भी 2026 में यहां लंबा आंदोलन किया था। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक इस आंदोलन को चलाने में आशुतोष रांका और सौरव दास समेत 12 सदस्यीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
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अब संजय कुमार से जुड़े मामले ने आंदोलन की सियासत को एक बार फिर गर्म कर दिया है। CJP की मांग है कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करे और मामले में हत्या के प्रयास समेत सभी गंभीर धाराओं पर विचार करे। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच कानून और प्रक्रिया के मुताबिक चल रही है।
लोकतंत्र में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों महत्वपूर्ण हैं। अगर किसी नागरिक पर हमला हुआ है तो निष्पक्ष जांच और न्याय मिलना जरूरी है। वहीं किसी आरोपी को दोषी ठहराने से पहले जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है।
इस मामले में अब निगाहें दिल्ली पुलिस की आगे की कार्रवाई पर हैं। CJP ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच और संभावित चार्जशीट से ही तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। Jantar Mantar Assault Case
Sources: The Indian Express , The Indian Express , The Times of India











