Saharanpur Mosque Case: इलाहाबाद /सहारनपुर। 9 सितंबर सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर चल रहा विवाद अब स्थानीय स्तर से निकलकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद की ओर से मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई है। याचिका में प्रशासन की ओर से की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ उस पूरी प्रक्रिया को भी चुनौती दी गई है, जिसके आधार पर मस्जिद को हटाया गया।
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का पक्ष रहा कि संबंधित निर्माण सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से मौजूद था और अदालत के आदेशों के बाद कार्रवाई की गई। दूसरी ओर मस्जिद के मुतवल्ली और उनके समर्थकों की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
अब हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के बाद इस मामले की कानूनी लड़ाई एक नए दौर में पहुंच गई है। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किस कानूनी आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत की गई। ABP Live की रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद कमेटी का आरोप है कि प्रशासन ने कानूनी नोटिस और स्पष्ट ध्वस्तीकरण आदेश के बिना कार्रवाई की।

जमीन, अदालत के आदेश और ध्वस्तीकरण पर अलग-अलग दावे
सहारनपुर की इस मस्जिद को लेकर विवाद की जड़ जमीन के मालिकाना हक और निर्माण की वैधता से जुड़ी है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय अदालत के स्तर पर मस्जिद को सरकारी जमीन पर बना अनधिकृत निर्माण माना गया था। 16 जुलाई के आदेश में मजिस्ट्रेट ने परिसर खाली करने से संबंधित आदेश दिया था और बाद में इस आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को 2 सितंबर को खारिज कर दिया गया। इसके कुछ ही दिन बाद 5 सितंबर को मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। Saharanpur Mosque Case
प्रशासन की तरफ से यह कहा गया कि कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के बाद की गई। वहीं मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद का आरोप है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए जिस तरह की प्रक्रिया अपेक्षित थी, उसका पालन नहीं किया गया। Indian Express ने भी रिपोर्ट किया कि मुतवल्ली की ओर से कार्रवाई में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
यही वजह है कि अब हाईकोर्ट में दाखिल याचिका को काफी अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने यह सवाल आ सकता है कि प्रशासन ने अदालत के पूर्व आदेशों की व्याख्या किस तरह की और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए क्या अलग से आदेश या प्रक्रिया जरूरी थी। Saharanpur Mosque Case
इस पूरे मामले में यह अंतर भी महत्वपूर्ण है कि स्थानीय अदालत के आदेश और प्रशासन द्वारा की गई अंतिम कार्रवाई को किस कानूनी संदर्भ में देखा जाए। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार 2 सितंबर को अपील खारिज होने के बाद प्रशासन की कार्रवाई हुई, जबकि संबंधित आदेश में सीधे तौर पर ध्वस्तीकरण का आदेश होने की बात स्पष्ट नहीं थी।

मामले में अब हाईकोर्ट का रुख इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि याचिका में केवल ध्वस्तीकरण ही नहीं, बल्कि उसके पीछे अपनाई गई प्रक्रिया को भी चुनौती दिए जाने की बात सामने आई है।
मस्जिद के नीचे कुआं मिलने से भी बढ़ी चर्चा…Saharanpur Mosque Case
ध्वस्तीकरण के बाद इस मामले में एक और दिलचस्प और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। मलबा हटाने के दौरान मस्जिद के नीचे करीब 20 फुट गहरा कुआं मिलने की खबर सामने आई। इस कुएं को लेकर अब ऐतिहासिक महत्व की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। Times of India के मुताबिक प्रशासन ने इसके ऐतिहासिक महत्व की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI से जांच कराने की बात कही है। Saharanpur Mosque Case
मलबा हटाने के दौरान लखौरी ईंटों और चूने से बनी संरचनाएं भी सामने आईं। कुएं में 1909 की ईंटें मिलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। इन चीजों से यह सवाल उठ रहा है कि मस्जिद परिसर और उसके नीचे मौजूद पुरानी संरचनाओं का इतिहास क्या रहा है और वहां पहले किस तरह का निर्माण मौजूद था।
हालांकि इन पुरातात्विक पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष किसी विशेषज्ञ जांच के बाद ही सामने आ सकता है। इसलिए अभी इन संरचनाओं को लेकर किसी निश्चित ऐतिहासिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। Saharanpur Mosque Case
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। विपक्षी नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन की ओर से कानून और अदालत के आदेशों के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत कुछ नेताओं ने कार्रवाई की आलोचना की है। दूसरी तरफ प्रशासनिक पक्ष इसे अनधिकृत निर्माण से जुड़ा कानूनी मामला बता रहा है।
मामले में जमीयत उलमा-ए-हिंद का प्रतिनिधिमंडल भी सहारनपुर पहुंचा और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई। संगठन की ओर से मामले को समझने के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय करने की बात कही गई।
अब सबकी निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट पर हैं। याचिका दाखिल होने के बाद अदालत में प्रशासन की कार्रवाई, जमीन की स्थिति, पूर्व न्यायिक आदेशों और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया से जुड़े तमाम पहलुओं पर बहस हो सकती है। यदि अदालत मामले में प्रशासन से जवाब मांगती है तो पूरे घटनाक्रम की कानूनी तस्वीर और साफ हो सकती है। Saharanpur Mosque Case
फिलहाल सहारनपुर का यह मामला केवल एक निर्माण को हटाए जाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह कानूनी प्रक्रिया, धार्मिक स्थल की स्थिति, जमीन के अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े कई सवालों के बीच हाईकोर्ट पहुंच चुका है। ऐसे में आगे अदालत की कार्यवाही इस विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
यह भी साफ है कि मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। प्रशासन इसे सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण से जुड़ी कार्रवाई बता रहा है, जबकि मस्जिद प्रबंधन ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। इसलिए अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के समक्ष रिकॉर्ड और दलीलों के आधार पर ही तय होगी। Saharanpur Mosque Case
Sources: Times of India, ABP Live , हिन्दुस्तान , Indian Express











