Saharanpur Masjid Demolition: सहारनपुर। 11 सितंबर
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर चल रहा विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद एक नए मोड़ पर आ गया है। हाईकोर्ट ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित प्रशासन से जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने मस्जिद कमेटी पर लगाए गए 6.41 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह याचिका मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश और उसके बाद जिला अदालत से जुड़े आदेशों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से कार्रवाई की वैधता, जमीन के स्वामित्व और प्रशासन द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट के इस रुख के बाद मामले की कानूनी अहमियत और बढ़ गई है। हालांकि अदालत ने अभी मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया है, लेकिन सरकार से जवाब मांगना और जुर्माने की वसूली पर रोक लगाना मस्जिद पक्ष के लिए फिलहाल महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।

6.41 करोड़ के जुर्माने और जमीन के मालिकाना हक पर विवाद
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की बुनियाद जमीन और कथित अनधिकृत कब्जे से जुड़ी हुई है। जुलाई में नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने परिसर खाली करने का आदेश दिया था और करीब 6.41 करोड़ रुपये की रकम बतौर जुर्माना/मुआवजा लगाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में इस आदेश के खिलाफ अपील भी की गई, लेकिन जिला अदालत ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी। Saharanpur Masjid Demolition
इसके बाद 5 सितंबर 2026 को प्रशासन ने कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की तरफ से इसे सरकारी जमीन पर मौजूद अनधिकृत निर्माण बताया गया। अधिकारियों का कहना रहा कि कार्रवाई अदालत से जुड़े आदेशों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की गई।

दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद की ओर से कहा गया कि ध्वस्तीकरण से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। यही विवाद अब हाईकोर्ट के सामने है।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि जिस संपत्ति को लेकर कार्रवाई की गई, उसके मालिकाना हक और रिकॉर्ड की स्थिति को किस तरह देखा गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक याचिका में यह दावा किया गया है कि संपत्ति वाहिद खान और याकूब खान के नाम दर्ज थी, जबकि सरकार की ओर से संपत्ति को कलेक्ट्रेट कचहरी के नाम दर्ज बताया गया।
सरकार की ओर से अदालत में यह तर्क भी रखा गया कि मस्जिद पक्ष संपत्ति को वक्फ संपत्ति बता रहा है, लेकिन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया। ऐसे में आगे की सुनवाई में जमीन के रिकॉर्ड, स्वामित्व, वक्फ से संबंधित दावे और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया अहम मुद्दे रह सकते हैं।
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि हाईकोर्ट ने अभी केवल सरकार से जवाब मांगा है। इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने ध्वस्तीकरण को गलत या सही घोषित कर दिया है। अंतिम फैसला आगे की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों तथा दस्तावेजों को देखने के बाद ही सामने आएगा।

ध्वस्तीकरण के बाद मिला कुआं, मामले ने और खींचा ध्यान…Saharanpur Masjid Demolition
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मामला सिर्फ कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रहा। मलबा हटाने के दौरान मस्जिद के नीचे करीब 20 फुट गहरा कुआं मिलने की खबर भी सामने आई। इस खबर के बाद लोगों में इस जगह की पुरानी संरचना और इतिहास को लेकर चर्चा तेज हो गई। प्रशासन की ओर से इसके ऐतिहासिक महत्व की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की मदद लेने की बात सामने आई है। Saharanpur Masjid Demolition
मस्जिद की उम्र और पुराने निर्माण को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे कई दशक पुराना बताया गया है। ऐसे में कुएं की उम्र और उसकी वास्तविक ऐतिहासिक स्थिति की जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि उसका निर्माण कब और किस दौर में हुआ था।
उधर, मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई। विपक्षी नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे कानूनी प्रक्रिया से जोड़कर देखा, जबकि प्रशासन ने कार्रवाई को सरकारी जमीन पर Saharanpur Masjid Demolition निर्माण हटाने की कार्रवाई बताया।
इस मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का प्रतिनिधिमंडल भी सहारनपुर पहुंच चुका है। प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी जुटाने की बात कही है। संगठन की ओर से आगे कानूनी कदम उठाने की संभावना भी जताई गई है।
अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। उस दिन सरकार और प्रशासन की ओर से दाखिल जवाब पर अदालत में चर्चा हो सकती है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ध्वस्तीकरण से पहले अपनाई गई प्रक्रिया और जुर्माने की रकम लगाने का कानूनी आधार क्या था। Saharanpur Masjid Demolition
मामले में 6.41 करोड़ रुपये की वसूली पर लगी रोक फिलहाल सबसे अहम घटनाक्रम है। इससे मस्जिद पक्ष को आर्थिक रूप से राहत मिली है, लेकिन यह रोक अंतिम फैसला नहीं है। अदालत आगे उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाएगी।
सहारनपुर का यह मामला अब कई कानूनी सवालों के बीच खड़ा है—सरकारी जमीन का रिकॉर्ड क्या कहता है, मस्जिद पक्ष के स्वामित्व या वक्फ से जुड़े दावे की स्थिति क्या है, प्रशासन ने बेदखली और ध्वस्तीकरण में कौन-सी प्रक्रिया अपनाई और 6.41 करोड़ रुपये की रकम लगाने का आधार क्या था। Saharanpur Masjid Demolition
हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब इन तमाम सवालों का जवाब न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है और जुर्माना वसूली पर अंतरिम रोक लगाई है। 12 अक्टूबर की सुनवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी, क्योंकि उस दिन सरकार का जवाब मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Saharanpur Masjid Demolition
Sources: Indian Express, Times of India










