El Nino India : भारत में मानसून अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों की एक नई चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो (El Niño) इस साल भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर इसका असर तेज रहा तो सबसे ज्यादा मार किसानों, महिलाओं, खेत मजदूरों और गरीब परिवारों पर पड़ सकती है।

जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक एल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाला बदलाव है, लेकिन इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में अक्सर एल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ जाता है। कम बारिश होने से खेती, पेयजल और बिजली उत्पादन तक प्रभावित हो सकते हैं।

भारत की करीब आधी खेती आज भी बारिश पर निर्भर है। देश की लगभग 47 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में खेती से जुड़ी हुई है। ऐसे में अगर मानसून कमजोर रहा तो सबसे पहले इसका असर किसानों की फसल पर दिखाई देगा। कम बारिश की वजह से धान, मक्का, दाल और दूसरी खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है।

El Nino India रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का भूजल पहले से ही दबाव में है। कई राज्यों में लोग बोरवेल के सहारे खेती कर रहे हैं। लेकिन जब बारिश कम होती है या बहुत कम समय में तेज बारिश होकर निकल जाती है, तो पानी जमीन के अंदर ठीक से नहीं पहुंच पाता। इससे भूजल स्तर और नीचे चला जाता है।

El Nino India का सबसे बड़ा संकट महिलाओं पर

विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट का सबसे बड़ा बोझ महिलाओं पर पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं ही पानी लाने, पशुओं के लिए चारा जुटाने और खेतों में काम करने की जिम्मेदारी निभाती हैं। बारिश कम होने पर उन्हें पहले से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कृषि कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ज्यादा है, लेकिन जमीन का मालिकाना हक बहुत कम महिलाओं के पास है।

इस बार मौसम को लेकर सरकार भी सतर्क है। कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई जिलों के लिए वैकल्पिक कृषि योजना तैयार करने को कहा है। राज्यों से कहा गया है कि पानी की उपलब्धता, सिंचाई और फसल प्रबंधन को लेकर पहले से तैयारी रखें ताकि किसानों का नुकसान कम हो सके।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एल नीनो का मतलब हर जगह सूखा पड़ना नहीं होता, लेकिन इससे बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल सकता है। कहीं बहुत ज्यादा बारिश होगी तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। यही वजह है कि खेती और जल प्रबंधन दोनों के लिए पहले से तैयारी जरूरी मानी जा रही है।

El Nino बढहा देगा जरूरी चीजों के दाम

कमजोर मानसून का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता। जब फसल कम होती है तो बाजार में अनाज, सब्जियों और दूसरी जरूरी चीजों के दाम बढ़ने लगते हैं। इससे महंगाई बढ़ सकती है और आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है। चीनी उत्पादन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कमजोर मानसून और एथेनॉल की बढ़ती मांग दोनों मिलकर उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र की विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी दुनिया के देशों को पहले से तैयार रहने की सलाह दी है। संगठन का कहना है कि इस साल एल नीनो मजबूत हो सकता है और इसके कारण कई देशों में गर्मी, सूखा, बाढ़ और खाद्य संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

फिलहाल मौसम की पूरी तस्वीर आने वाले हफ्तों में साफ होगी, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि इस बार सिर्फ बारिश का इंतजार करना काफी नहीं होगा। पानी बचाने, फसलों की सही योजना बनाने और किसानों को समय पर मदद पहुंचाने जैसे कदम ही इस चुनौती का सामना करने में सबसे ज्यादा काम आएंगे।

यानी अगर एल नीनो ने इस साल अपना असर दिखाया, तो इसकी सबसे बड़ी कीमत वही लोग चुकाएंगे जो पहले से ही सबसे ज्यादा संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए आने वाले मानसून पर सिर्फ किसानों की नहीं, बल्कि पूरे देश की नजर टिकी हुई है। El Nino India