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PM Modi Jakarta Speech: UN में बदलाव की गूंज! इंडोनेशिया की संसद से पीएम मोदी का बड़ा संदेश

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PM Modi Jakarta Speech:नई दिल्ली/जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए बदलते वैश्विक हालात पर भारत का साफ़ और मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया का ग्लोबल ऑर्डर तेज़ी से बदल रहा है और ऐसे समय में विकासशील देशों को बराबरी की भागीदारी और बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने दो-टूक शब्दों में कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता।

प्रधानमंत्री मोदी अपने दो दिवसीय इंडोनेशिया दौरे पर जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद उन्होंने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। यह संबोधन भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था तभी प्रभावी बन सकती है, जब वह वर्तमान समय की वास्तविकताओं को स्वीकार करे और सुधार लागू करे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2022 में इंडोनेशिया की G20 अध्यक्षता और 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता का साझा उद्देश्य विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को दुनिया के केंद्र में लाना था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने Global South की चिंताओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का गंभीर प्रयास किया और यही सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा।

दोनों देशों की साझा विरासत भविष्य के सहयोग की सबसे बड़ी ताकत है।PM Modi Jakarta Speech

उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को सदियों पुराना बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच केवल व्यापारिक संबंध ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक जुड़ाव भी बेहद गहरा है। नालंदा विश्वविद्यालय, बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझा विरासत भविष्य के सहयोग की सबसे बड़ी ताकत है। PM Modi Jakarta Speech

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और स्वतंत्र नौवहन के समर्थक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत विस्तारवाद नहीं बल्कि विकास और साझेदारी में विश्वास रखता है। उन्होंने आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक और अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए। रक्षा सहयोग के तहत ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और अन्य रक्षा परियोजनाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई, जिसे भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को भी याद किया और कहा कि उन्होंने इंडोनेशिया की आज़ादी के दौर में दोनों देशों को करीब लाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि इतिहास के ऐसे अध्याय दोनों देशों के रिश्तों को और मज़बूत बनाते हैं।

विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन केवल भारत-इंडोनेशिया संबंधों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह Global South की साझा आकांक्षाओं का संदेश भी था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और सुधार की मांग को भारत लंबे समय से उठाता रहा है और जकार्ता से दिया गया यह संदेश उसी अभियान को और मजबूती देता है।

भारत का मानना है कि यदि संयुक्त राष्ट्र को 21वीं सदी की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है, तो उसकी निर्णय प्रक्रिया में व्यापक सुधार आवश्यक है। विकासशील देशों की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक भूमिका को देखते हुए उन्हें वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

इंडोनेशिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और Global South के नेतृत्व को और मजबूत करेगा। PM Modi Jakarta Speech

Azmatulla

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