Indian DNA: नई दिल्ली/जकार्ता। भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों को एक बार फिर नई पहचान मिली, जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने सार्वजनिक मंच से कहा कि उनका DNA भारतीय निकला और यही वजह है कि जब भी वह भारतीय संगीत सुनते हैं तो उनका शरीर अपने आप झूमने लगता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दिए गए इस बयान ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने अपने संबोधन में बताया कि भारत की अपनी 2025 की राजकीय यात्रा से पहले उन्होंने जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing) और DNA परीक्षण कराया था। रिपोर्ट आने पर उन्हें बताया गया कि उनके भीतर भारतीय मूल का आनुवंशिक संबंध मौजूद है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि शायद यही कारण है कि जब भी भारतीय संगीत बजता है तो उनके कदम अपने आप थिरकने लगते हैं। उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं।
प्रबोवो ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता केवल आज का नहीं बल्कि हजारों वर्षों पुराना है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया की संस्कृति, परंपरा, भाषा और सामाजिक जीवन पर भारतीय सभ्यता का गहरा असर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इंडोनेशियाई भाषा के अनेक शब्द संस्कृत से आए हैं और आज भी देश में बड़ी संख्या में लोगों के नाम संस्कृत मूल के हैं।

उन्होंने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर सराहना की। प्रबोवो ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के प्रशंसक हैं और भारत के विकास मॉडल से सीखना चाहते हैं। उनका कहना था कि भारत ने आर्थिक विकास, लोकतंत्र और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है, जिससे इंडोनेशिया भी प्रेरणा ले सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति प्रबोवो के इस बयान का गर्मजोशी से स्वागत किया।Indian DNA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति प्रबोवो के इस बयान का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया और भारत केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत रूप से भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो की भावनाओं ने भारत के लोगों का दिल जीत लिया है और दोनों देशों की दोस्ती आने वाले समय में और मजबूत होगी। Indian DNA
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध हजारों वर्षों पुराने समुद्री व्यापार, संस्कृति और धार्मिक संपर्कों पर आधारित हैं। रामायण और महाभारत की परंपरा, बाली सहित कई क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति की झलक और संस्कृत का प्रभाव इन रिश्तों की ऐतिहासिक गहराई को दर्शाता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता आज भी दिखाई देती है।
राष्ट्रपति प्रबोवो का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे भारत और इंडोनेशिया की ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक बताया। कई यूज़र्स ने लिखा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्ते किसी राजनीतिक समझौते से कहीं अधिक पुराने और मजबूत हैं। वहीं कुछ लोगों ने इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक प्रभाव का उदाहरण बताया।
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि इस तरह के बयान केवल भावनात्मक नहीं होते, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को भी नई मजबूती देते हैं। रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत और इंडोनेशिया पहले से साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति प्रबोवो का यह बयान दोनों देशों के रिश्तों में नई गर्मजोशी का संकेत माना जा रहा है। Indian DNA

