Narendra Modi: भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दुनिया के प्रमुख देशों में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। देश की रिफाइनिंग क्षमता अब दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बालोतरा में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परियोजना के उद्घाटन के दौरान कहा कि भारत आज ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि जहां पिछले 50 वर्षों में अमेरिका में कोई नई रिफाइनरी नहीं बनी, वहीं यूरोप की रिफाइनिंग क्षमता लगातार कम होती गई है। इसके विपरीत भारत ने अपनी क्षमता बढ़ाकर दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में वैश्विक हालात, विशेषकर पश्चिम एशिया के तनाव और ऊर्जा संकट ने कई देशों को मुश्किल में डाल दिया। इसके बावजूद भारत ने दूरदर्शी नीति, मजबूत बुनियादी ढांचे और समय पर लिए गए फैसलों की बदौलत ईंधन आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि देश लगातार नई रिफाइनिंग परियोजनाओं में निवेश कर रहा है ताकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

बालोतरा में शुरू हुई नई एकीकृत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परियोजना को भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। लगभग 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली यह परियोजना राजस्थान समेत पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के औद्योगिक विकास को नई गति देगी। इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

भारत पहले से ही एशिया के प्रमुख रिफाइनिंग हब के रूप में उभर रहा है।Narendra Modi

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश वैश्विक ईंधन बाजार में भी मजबूत स्थिति हासिल कर रहा है। भारत पहले से ही एशिया के प्रमुख रिफाइनिंग हब के रूप में उभर रहा है और भविष्य में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण होने की उम्मीद जताई जा रही है।Narendra Modi

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अमेरिका और यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि विकसित देशों में नई रिफाइनरियों का विस्तार काफी धीमा रहा है। इसके विपरीत भारत लगातार आधुनिक तकनीक के साथ नई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उन्होंने इसे विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत अभियान का अहम हिस्सा बताया।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा मांग और बढ़ेगी। ऐसे में नई रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं का विस्तार देश को आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का भी मानना है कि 2030 तक एशिया, विशेषकर भारत और चीन, वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे, जबकि यूरोप और अमेरिका में कई पुराने संयंत्र बंद होने की संभावना बनी रहेगी।

भारत इस समय दुनिया का प्रमुख तेल उपभोक्ता भी है और देश में 23 से अधिक रिफाइनरियां संचालित हो रही हैं। सरकार आने वाले वर्षों में रिफाइनिंग क्षमता को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इससे घरेलू ईंधन आपूर्ति मजबूत होगी, निर्यात बढ़ेगा और भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैश्विक संकट के दौर में मजबूत रिफाइनिंग क्षमता किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा का आधार होती है। ऐसे में भारत का चौथे स्थान पर पहुंचना देश की बढ़ती औद्योगिक ताकत और दूरदर्शी ऊर्जा नीति का संकेत माना जा रहा है।Narendra Modi