UCC Controversy: गुवाहाटी,असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड केवल इस्लाम के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी धर्मों की धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं पर असर डालने वाला मुद्दा है। उन्होंने मांग की कि सरकार किसी भी तरह का अंतिम फैसला लेने से पहले सभी धर्मों के प्रतिनिधियों से मशविरा करे।
बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व में AIUDF के एक प्रतिनिधिमंडल ने असम के राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अजमल ने कहा कि इस्लाम में मर्द पर औरत की आर्थिक जिम्मेदारी तय की गई है और हर धर्म की अपनी अलग सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्था है। ऐसे में सभी समुदायों को भरोसे में लिए बिना कोई भी कानून लागू करना सही नहीं होगा।
अजमल ने कहा कि उनकी पार्टी ने राज्यपाल से अपील की है कि यदि इस विषय पर कोई समिति बनाई जाती है तो उसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन तथा अन्य सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि सबकी राय और सुझाव लेने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप होगा।

अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।UCC Controversy
उन्होंने आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील विषय पर जल्दबाज़ी में फैसला लेने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। अजमल ने कहा कि देश की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी कानून से करोड़ों लोगों की धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हों तो व्यापक संवाद और सहमति जरूरी है। UCC Controversy
उधर, असम सरकार का रुख साफ है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के जरिए विवाह, बहुविवाह, लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और अन्य पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में असम विधानसभा में UCC विधेयक भी पारित किया गया, हालांकि इसके लागू होने के लिए आगे संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि UCC का मुद्दा आने वाले समय में असम ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम चुनावी मुद्दा बन सकता है। एक ओर भाजपा इसे समान नागरिक अधिकारों की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष और कई धार्मिक संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मामला बताते हुए विरोध कर रहे हैं।
AIUDF का कहना है कि वह इस मुद्दे को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी और सभी समुदायों की आवाज सरकार तक पहुंचाएगी। दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। ऐसे में आने वाले दिनों में UCC को लेकर सियासी बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। UCC Controversy

