Ghusl Kaaba:मक्का: सऊदी अरब के मुक़द्दस शहर मक्का से एक बेहद रूहानी और अहम मंज़र सामने आया है। काबा शरीफ़ की सालाना ग़ुस्ल (धुलाई) की रस्म मुकम्मल होने के बाद मक्का के डिप्टी गवर्नर, हज व उमरा मंत्री डॉ. तौफ़ीक़ अल-रबीआ और हरमैन शरीफ़ैन के धार्मिक मामलों के प्रमुख शेख डॉ. अब्दुर्रहमान अल-सुदैस ने काबा शरीफ़ का तवाफ किया। इसके बाद सभी ने मक़ाम-ए-इब्राहीम के पीछे दो रकअत नफ़्ल नमाज़ भी अदा की। यह मुक़द्दस रस्म दुनियाभर के मुसलमानों के लिए बेहद अहम मानी जाती है।

इस साल भी ग़ुस्ल-ए-काबा की रस्म सऊदी अरब के बादशाह की ओर से नामज़द प्रतिनिधि की मौजूदगी में अदा की गई। रस्म के दौरान काबा शरीफ़ के अंदरूनी हिस्से को आब-ए-ज़मज़म, गुलाब जल और ख़ुशबूदार इत्र के मिश्रण से साफ़ किया गया। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे बड़ी अकीदत के साथ निभाया जाता है।
रस्म पूरी होने के बाद मक्का के डिप्टी गवर्नर ने काबा शरीफ़ का तवाफ किया। Ghusl Kaaba
रस्म पूरी होने के बाद मक्का के डिप्टी गवर्नर ने काबा शरीफ़ का तवाफ किया। उनके साथ हज व उमरा मंत्री और शेख सुदैस भी मौजूद रहे। इसके बाद सभी ने मक़ाम-ए-इब्राहीम के पीछे नफ़्ल नमाज़ अदा कर अल्लाह तआला का शुक्र अदा किया और उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए दुआएँ कीं। Ghusl Kaaba
हर साल होने वाली यह रस्म इस्लामी दुनिया में ख़ास अहमियत रखती है। ग़ुस्ल-ए-काबा के दौरान सिर्फ़ चुनिंदा मेहमानों और ज़िम्मेदार अधिकारियों को ही अंदर जाने की इजाज़त होती है। रस्म की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद दुनिया भर के मुसलमान सोशल मीडिया पर इसे बड़े एहतराम और मोहब्बत के साथ साझा करते हैं।

इस अवसर पर हरम शरीफ़ का माहौल पूरी तरह रूहानियत से भर गया। लाखों उमरा ज़ायरीन ने भी दूर से इस मुक़द्दस रस्म की झलक देखी। कई लोगों ने इसे अपनी ज़िंदगी के यादगार लम्हों में शामिल बताया और कहा कि काबा शरीफ़ से जुड़ी हर रस्म मुसलमानों के ईमान को और मज़बूत करती है।
इस्लामी इतिहास के मुताबिक ग़ुस्ल-ए-काबा की परंपरा बहुत पुरानी है और इसे रसूल अल्लाह ﷺ की सुन्नत से जोड़ा जाता है। इसी वजह से हर साल यह रस्म पूरी शान और एहतराम के साथ अदा की जाती है। इस दौरान काबा शरीफ़ की दीवारों को आब-ए-ज़मज़म, गुलाब जल और उम्दा ख़ुशबुओं से साफ़ किया जाता है।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि यह रस्म सिर्फ़ सफ़ाई का प्रतीक नहीं, बल्कि तहारत, इबादत और अल्लाह की इबादतगाह के एहतराम का पैग़ाम भी देती है। ग़ुस्ल-ए-काबा के बाद तवाफ और नफ़्ल नमाज़ अदा करना भी इस मुक़द्दस मौके की अहम रिवायतों में शामिल माना जाता है।
दुनियाभर के मुसलमानों ने इस मुक़द्दस रस्म की तस्वीरों और वीडियो का इस्तकबाल किया और दुआ की कि अल्लाह तआला सभी को हरमैन शरीफ़ैन की ज़ियारत और उमरा-हज की सआदत नसीब फ़रमाए। Ghusl Kaaba

