Muzaffarnagar Labour Torture : मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव स्थित एक दोना और पेपर प्लेट निर्माण फैक्ट्री में कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी का बड़ा रैकेट चल रहा था।
जहां मजदूरों को नौकरी, अच्छे वेतन और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर लाया जाता था, लेकिन फैक्ट्री पहुंचते ही उनकी जिंदगी किसी जेल से कम नहीं रह जाती थी। पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया है, जबकि दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि मजदूरों को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और यहां तक कि नेपाल से भी लाया गया था। उन्हें हर महीने 12 हजार रुपये वेतन, रहने और खाने की सुविधा का लालच दिया गया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए जाते थे तथा उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी।
मुक्त कराए गए मजदूरों ने जो कहानी सुनाई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। मजदूरों का आरोप है कि उनसे रोजाना 18 से 20 घंटे तक काम कराया जाता था। विरोध करने या वेतन मांगने पर बेल्ट, डंडों और धारदार हथियारों से पिटाई की जाती थी। कई मजदूरों के शरीर पर गहरे जख्मों के निशान मिले हैं, जबकि कुछ के हाथ-पैर सूजे हुए पाए गए।
जानवरों से भी बदतर सलूक, एक रोटी पर गुजारा करने को मजबूर थे मजदूर
पीड़ितों ने बताया कि उन्हें 24 घंटे में केवल एक बार भोजन दिया जाता था। कई बार खाने में सिर्फ चोकर की रोटी, नमक और हरी मिर्च मिलती थी। कुछ मजदूरों का आरोप है कि उन्हें मवेशियों का चारा तक खाने के लिए मजबूर किया गया। पर्याप्त भोजन और आराम नहीं मिलने के कारण उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी।

मामले का खुलासा तब हुआ जब राजस्थान का एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री की दीवार फांदकर भाग निकला और तितावी थाने पहुंचकर पूरी आपबीती सुनाई। उसकी शिकायत के बाद पुलिस और प्रशासन ने फैक्ट्री पर छापा मारकर सभी मजदूरों को आजाद कराया।
जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री परिसर में पिटबुल कुत्ते रखे गए थे ताकि मजदूर डर के कारण भाग न सकें। मजदूरों का आरोप है कि भागने की कोशिश करने वालों पर कुत्ते छोड़ दिए जाते थे और उन्हें बुरी तरह पीटा जाता था।
इस पूरे मामले ने तब और सनसनी फैला दी जब कुछ मजदूरों ने दावा किया कि करीब छह महीने पहले एक मजदूर की कथित तौर पर मौत हो गई थी। आरोप है कि उसे यातनाएं दी गईं और बाद में शव को बोरे में भरकर ठिकाने लगा दिया गया। पुलिस ने इस दावे को भी गंभीरता से लेते हुए अलग से जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान, प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) भी गठित किया गया है।
यह घटना केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि मानवता पर एक बड़ा सवाल है। जिस तरह मजदूरों को कैद करके रखा गया और उनसे अमानवीय व्यवहार किया गया, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल प्रशासन मजदूरों के पुनर्वास और उनके परिवारों से संपर्क कराने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।Muzaffarnagar Labour

