UP Congress: लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पार्टी में अहम बदलाव किया है। कांग्रेस हाईकमान ने उत्तर प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडे को उनके पद से हटाकर राजेंद्र पाल गौतम को नया प्रभारी नियुक्त कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश कांग्रेस की सियासत में हलचल तेज हो गई है और इसे आने वाले चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

कांग्रेस की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अविनाश पांडे को दिसंबर 2023 में उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। अब उनकी जगह दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी का मानना है कि नए नेतृत्व के जरिए संगठन को और मजबूत किया जाएगा तथा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति तैयार की जाएगी।

राजेंद्र पाल गौतम लंबे समय से सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। वह पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं। बाद में उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा। अब उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से अहम राज्य की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि वह नए सामाजिक समीकरणों पर काम करना चाहती है।

इस फैसले के बाद कांग्रेस के अंदर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें भी तेज हैं कि आने वाले दिनों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर भी बदलाव हो सकता है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सूत्रों के अनुसार, 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस उत्तर प्रदेश में ओबीसी और मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी वजह से प्रदेश अध्यक्ष के पद पर भी नए चेहरे की तलाश की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक चर्चाओं में सहारनपुर सांसद इमरान मसूद और सीतापुर सांसद राकेश राठौर के नाम सामने आ रहे हैं, हालांकि इस पर अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा।

बताया जा रहा है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई कांग्रेस सांसदों ने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की थी। इसके बाद से ही संगठन में बदलाव की संभावना जताई जा रही थी।

राजेंद्र पाल गौतम का नाम इससे पहले भी उस समय चर्चा में आया था, जब वह बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया के साथ बसपा प्रमुख मायावती से मिलने पहुंचे थे। हालांकि उनकी मुलाकात नहीं हो सकी थी। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर भी काफी चर्चा हुई थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तैयार कर रही है। दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के बीच पकड़ मजबूत करने की कोशिशें इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

फिलहाल पार्टी की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर है और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में प्रदेश संगठन में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नए प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को किस तरह नई दिशा देते हैं और पार्टी आगामी चुनावों में कितना असर छोड़ पाती है। UP Congress