Saharanpur Collectorate Mosque: सहारनपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी मस्जिद को लेकर बड़ा प्रशासनिक और कानूनी विवाद सामने आया है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को सरकारी भूमि पर बना अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने संबंधित पक्ष को निर्धारित समय के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकारी ज़मीन के कथित अवैध इस्तेमाल को लेकर आर्थिक क्षतिपूर्ति का आदेश भी दिया गया है।

इस फैसले के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है। मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मस्जिद कोई नई इमारत नहीं, बल्कि कई दशक पुरानी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अंग्रेज़ी हुकूमत के दौर में कलेक्ट्रेट में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों को नमाज़ के लिए दूर जाना पड़ता था। इसी वजह से उस समय परिसर के अंदर यह मस्जिद बनवाई गई थी ताकि कर्मचारी आसानी से नमाज़ अदा कर सकें। हालांकि इस दावे के समर्थन में अदालत में ऐसे दस्तावेज़ पेश नहीं किए जा सके जिन्हें कानूनी रूप से पर्याप्त माना जाए।

प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण बिना वैध रिकॉर्ड के स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मस्जिद के वैध निर्माण का प्रमाण नहीं मिला। इसी आधार पर इसे अवैध कब्ज़ा मानते हुए बेदखली का आदेश दिया गया है।

मस्जिद ब्रिटिश काल से मौजूद है उसके इतिहास की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। मस्जिद कमेटी Saharanpur Collectorate Mosque

दूसरी ओर मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह धार्मिक स्थल वर्षों से अस्तित्व में है और यहां नियमित रूप से नमाज़ अदा होती रही है। उनका आरोप है कि ऐतिहासिक तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यदि मस्जिद ब्रिटिश काल से मौजूद है तो उसके इतिहास की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।Saharanpur Collectorate Mosque

जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक धार्मिक स्थल का नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों का भी है। यदि मस्जिद पक्ष उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाता है तो आगे कानूनी लड़ाई और लंबी हो सकती है।

फिलहाल प्रशासन ने अदालत के आदेश का पालन कराने की तैयारी शुरू कर दी है। सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का सम्मान करने की अपील की है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी भूमि पर बने धार्मिक स्थलों को लेकर बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी ऐसे मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली है। हालांकि हर मामले में अदालत और प्रशासन उपलब्ध रिकॉर्ड तथा कानून के आधार पर अलग-अलग निर्णय लेते हैं।

कलेक्ट्रेट में मंदिर भी है मस्जिद भी, आज मस्जिद टूटी तो कल मंदिर टूटेगा। सांसद इमरान मसूद Saharanpur Collectorate Mosque

सांसद इमरान मसूद ने कहा की यह जुडिशल आर्डर नहीं है यह प्रशासनिक आदेश है, मस्जिद के पास कागज पूरे हैं खसरा नंबर मिल्कियत ते नहीं होगी। खेवट में वाहिद खान याकूब खान के नाम है जबकि कलेक्ट्रेट जहां पर बना हुआ है, उनके पास कोई प्रूफ नहीं खसरा नंबर से मिल्कियत बना ली है। इसलिए मस्जिद तो मस्जिद की जगह रहेगी अलबत्ता अगर मस्जिद आज टूटती है तो मंदिर भी है कलेक्ट्रेट में वह भी टूटेगा हम कोर्ट जाएंगे कोर्ट हमारे लिए भी है।Saharanpur Collectorate Mosque

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मस्जिद कमेटी आगे कौन-सा कानूनी कदम उठाती है और प्रशासन अदालत के आदेश को किस तरह लागू करता है। फिलहाल सहारनपुर का यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।Saharanpur Collectorate Mosque