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SGPC Protest: ‘सतलुज’ फिल्म पर सियासत तेज, SGPC का अमृतसर में बड़ा विरोध मार्च

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SGPC Protest: अमृतसर। पंजाब में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने अमृतसर में बड़ा विरोध मार्च निकालते हुए फिल्म पर लगी पाबंदियों को हटाने की मांग की। प्रदर्शन के बाद SGPC के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से डिप्टी कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा और केंद्र सरकार से फिल्म के प्रदर्शन पर लगी रोक हटाने की अपील की।

SGPC नेताओं का कहना है कि ‘सतलुज’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष और पंजाब के इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को सामने लाने का प्रयास है। उनका आरोप है कि फिल्म पर लगाए गए प्रतिबंध से अभिव्यक्ति की आज़ादी और ऐतिहासिक तथ्यों को जनता तक पहुंचाने के अधिकार पर असर पड़ रहा है।

विरोध मार्च में बड़ी संख्या में SGPC पदाधिकारी, सिख संगठनों के सदस्य और आम लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से नारेबाजी करते हुए मांग की कि फिल्म पर लगी सभी पाबंदियां तुरंत हटाई जाएं ताकि लोग इसे देख सकें और जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन तथा उनके संघर्ष को समझ सकें।

जसवंत सिंह खालड़ा ने मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर मामलों को उजागर करने का काम किया था SGPC Protest:

SGPC ने अपने ज्ञापन में कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर मामलों को उजागर करने का काम किया था और उनके जीवन पर बनी फिल्म समाज के लिए महत्वपूर्ण है। संगठन का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक विषय पर बनी फिल्म को रोकने के बजाय जनता को स्वयं निर्णय लेने का अवसर मिलना चाहिए। SGPC Protest:

बताया जा रहा है कि फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ नाम से तैयार की गई थी। बाद में इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया। हाल ही में यह फिल्म एक OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद इसे हटा दिया गया। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह फैसला सुरक्षा संबंधी कारणों से लिया गया, जबकि SGPC और कई अन्य संगठनों ने इस कदम का विरोध किया है।

फिल्म को लेकर पंजाब में लगातार बहस जारी है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठन सार्वजनिक प्रदर्शन तथा ज्ञापन के जरिए इसकी रिलीज़ की मांग कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर सामुदायिक स्तर पर भी फिल्म को दिखाने की पहल की गई है, जिससे यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।

राजनीतिक हलकों में भी इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि इतिहास से जुड़े विषयों पर खुली चर्चा होनी चाहिए, जबकि दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

फिलहाल SGPC ने स्पष्ट किया है कि वह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाता रहेगा। संगठन को उम्मीद है कि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार करेगी और फिल्म पर लगी पाबंदियों को हटाने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी। उधर प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है।

सतलुज‘ को लेकर छिड़ी यह बहस अब केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, इतिहास और मानवाधिकार जैसे व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित पक्षों के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। SGPC Protest

Azmatulla

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