Personal Law Debate: लखनऊ। मुस्लिम पर्सनल लॉ, निकाह की उम्र और हालिया विवादित बयानों को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि साजिद रशीदी इस तरह के बयान केवल सुर्खियां बटोरने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए दे रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि ऐसे बयानों को अनावश्यक मंच न दिया जाए और सरकार से उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जिनसे भ्रम और विवाद पैदा हो। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां पूरे समुदाय की छवि को प्रभावित करती हैं और इससे सामाजिक सौहार्द भी प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि साजिद रशीदी के बयान का समर्थन नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक यह व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन इसे इस्लाम या पूरे मुस्लिम समाज की राय बताना गलत होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाज़ी केवल मीडिया की सुर्खियां पाने का जरिया बन गई है।
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मीडिया संस्थानों को भी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि केवल सनसनी फैलाने वाले बयानों को बार-बार प्रसारित करने के बजाय समाज के सकारात्मक और रचनात्मक मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया ऐसे विवादित बयानों को महत्व देना बंद कर दे तो इस तरह की बयानबाज़ी अपने आप कम हो जाएगी।
उन्होंने सरकार से भी मांग की कि यदि किसी व्यक्ति का बयान कानून, सामाजिक शांति या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार किसी भी व्यक्ति को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर समाज में भ्रम फैलाने या विवाद खड़ा करने की छूट नहीं दी जा सकती।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया Personal Law Debate

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब हाल ही में मौलाना साजिद रशीदी ने लड़कियों की शादी की उम्र और मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर टिप्पणी की थी। उनके बयान पर कई राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और मुस्लिम समुदाय के विभिन्न वर्गों ने आपत्ति जताई। बाद में मौलाना सजिद रशीदी ने अपने बयान पर सफाई भी दी और कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने कहा कि हालांकि मेरी बात कुछ लोगों को अच्छी नहीं लगेगी, अच्छी बात कहीं से भी मिले उसको ले लेना चाहिए। Personal Law Debate
जानकारों का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ, निकाह की न्यूनतम आयु और संविधान से जुड़े मुद्दों पर पहले भी बहस होती रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद यह विषय फिर चर्चा में आया है। ऐसे में अलग-अलग धार्मिक नेताओं के बयान भी लगातार सामने आ रहे हैं।
इस बीच सोशल मीडिया पर भी दोनों नेताओं के बयान तेजी से वायरल हो रहे हैं। कुछ लोग मौलाना यासूब अब्बास की बात का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग साजिद रशीदी की दलीलों के पक्ष में भी अपनी राय रख रहे हैं। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों ने संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदार बयान देने की जरूरत पर जोर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और सामाजिक विषयों पर दिए गए बयान अक्सर व्यापक बहस का कारण बन जाते हैं। इसलिए सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए, ताकि समाज में अनावश्यक तनाव की स्थिति पैदा न हो।
फिलहाल इस पूरे मामले पर बहस जारी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार, संबंधित एजेंसियां और अन्य धार्मिक संगठन इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाते हैं। वहीं आम लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदार संवाद ही सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है। Personal Law Debate

