Shia Cleric Saif Abbas: लखनऊ: योग गुरु बाबा रामदेव के हालिया बयान पर शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास का जवाब सामने आने के बाद सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान सैफ अब्बास ने कहा कि मुसलमान किसी इंसान से नहीं, बल्कि सिर्फ अल्लाह से डरता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का निज़ाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान से चलता है और हर नागरिक उसी संविधान के तहत बराबरी के अधिकार रखता है।

सैफ अब्बास ने अपने बयान में कहा कि बार-बार यह कहना कि देश में हिंदू खतरे में हैं, जबकि उनकी आबादी लगभग 80 प्रतिशत है, समझ से परे है। उनके मुताबिक ऐसे दावे वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख और समझ रही है तथा अब लोग हर मुद्दे पर अपनी राय बना रहे हैं।

शिया धर्मगुरु ने अयोध्या का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं के बाद अयोध्या ट्रस्ट को लेकर लोगों के बीच भरोसे में कमी आई है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष घटना का विस्तार से उल्लेख नहीं किया। हाल के दिनों में अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दान प्रबंधन और ट्रस्ट के कामकाज को लेकर विवाद सामने आए हैं, जिनकी जांच जारी है। ट्रस्ट ने भी कुछ प्रशासनिक फैसले लिए हैं और संबंधित मामलों में कार्रवाई की है।

शिया धर्म गुरु ने अपील की कि सभी को मिलकर संविधान और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करना चाहिए। Shia Cleric Saif Abbas

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि देश में हर धर्म और समुदाय को संविधान के अनुसार अपने अधिकार मिलने चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी समाज के खिलाफ डर का माहौल बनाना या लोगों को बांटने वाली बातें करना देश के हित में नहीं है। उन्होंने अपील की कि सभी को मिलकर संविधान और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करना चाहिए। Shia Cleric Saif Abbas

दूसरी ओर बाबा रामदेव के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने देश और समाज के हित में अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा पर चर्चा लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि इस पूरे मामले पर बाबा रामदेव की ओर से सैफ अब्बास के बयान के बाद कोई नया आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर दिए जाने वाले बयान अक्सर सार्वजनिक बहस का कारण बनते हैं। ऐसे मामलों में अलग-अलग वर्गों की अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि किसी भी बयान का मूल्यांकन तथ्यों और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

इस बीच सोशल मीडिया पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग सैफ अब्बास के संविधान संबंधी बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग बाबा रामदेव की बात को सही बता रहे हैं। एक्स, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे पर हजारों प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में धार्मिक और सामाजिक विषयों पर संवाद जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात रखने की आज़ादी भी देता है।

फिलहाल इस बयानबाज़ी के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्षों की ओर से और प्रतिक्रियाएं आती हैं तो यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रह सकता है। वहीं आम जनता की नजर अब इस बात पर है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रभावशाली लोग संवेदनशील विषयों पर किस तरह की भाषा और संदेश का इस्तेमाल करते हैं। Shia Cleric Saif Abbas