Maulana Arshad Madani: पीरान कलियर/हरिद्वार। देश में बढ़ती नफरत की सियासत, मदरसों और मस्जिदों पर हो रही कार्रवाई तथा समाज में बढ़ते विभाजन को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने गहरी फिक्र का इज़हार किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी मुल्क नफरत की बुनियाद पर ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह सकता। मुल्क की तरक्की मोहब्बत, भाईचारे, इंसाफ और आपसी एहतराम से होती है, जबकि नफरत सिर्फ तबाही और बंटवारे का रास्ता तैयार करती है


यह बातें उन्होंने पीरान कलियर शरीफ में आयोजित जमीयत उलेमा उत्तराखंड की प्रांतीय कार्यकारिणी बैठक को संबोधित करते हुए कहीं। इस अहम बैठक में प्रदेश भर से आए उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान मौजूदा सामाजिक हालात, शिक्षा, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और कौमी एकता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मौलाना अरशद मदनी ने अपने खिताब में कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और उसके बुजुर्गों का देश की आजादी की जंग में अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी हासिल करने के लिए उलेमा और मदरसों ने बड़ी कुर्बानियां दी थीं। इतिहास इस बात का गवाह है कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में मदरसों और मस्जिदों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन अफसोस की बात है कि आज वही संस्थान कई जगह निशाने पर दिखाई दे रहे हैं।


उन्होंने मदरसों और मस्जिदों पर होने वाली बुलडोजर कार्रवाई पर भी चिंता जताई। मौलाना मदनी ने कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कानून और संविधान के दायरे में होनी चाहिए। यदि बिना पूरी प्रक्रिया अपनाए कार्रवाई की जाती है तो इससे इंसाफ के बुनियादी उसूल प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान देश के हर नागरिक को बराबरी और न्याय का अधिकार देता है, इसलिए सभी फैसले संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होने चाहिए।


अपने संबोधन में मौलाना मदनी ने भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का जिक्र करते हुए कहा कि यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। सदियों से अलग-अलग मजहबों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग इस देश में मिल-जुलकर रहते आए हैं। मोहब्बत, भाईचारा और आपसी सम्मान ही भारत की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि अगर समाज में नफरत और दूरी बढ़ेगी तो इसका नुकसान सिर्फ किसी एक वर्ग को नहीं बल्कि पूरे देश को उठाना पड़ेगा।


बैठक में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने आपसी सौहार्द को मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने पड़ोसी, दोस्त और दूसरे समुदाय के लोगों के साथ अच्छे रिश्ते कायम रखने चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच प्रेम, विश्वास और सम्मान का रिश्ता और मजबूत होना चाहिए ताकि देश में अमन और भाईचारा कायम रह सके।


इस दौरान बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए। इनमें मदरसों की सुरक्षा, वक्फ संपत्तियों की हिफाजत, शिक्षा के प्रसार, पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अभियान तथा सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे। वक्ताओं ने युवाओं को शिक्षा से जोड़ने और समाज में सकारात्मक माहौल बनाने पर भी जोर दिया।


बैठक के अंत में देश में अमन, इंसाफ, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया। उलेमा और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखने के लिए हर स्तर पर कोशिश जारी रखी जाएगी। कार्यक्रम का समापन मुल्क की तरक्की, शांति और खुशहाली की दुआ के साथ हुआ। Maulana Arshad Madani;