Water Sharing Agreement: नई दिल्ली: देश में लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय जल बंटवारे के एक अहम मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में हरियाणा और राजस्थान के बीच जल बंटवारे से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। यह समझौता दोनों राज्यों के बीच वर्षों से लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाला अहम कदम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, भविष्य की जरूरतों और दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि यह समझौता सिर्फ दो राज्यों के बीच पानी बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में पेयजल, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास के लिए भी काफी अहम साबित होगा।

32 साल से इस मुद्दे पर अलग-अलग स्तर पर चल रही थी बातचीत।Water Sharing Agreement
जानकारी के मुताबिक यह समझौता 1994 के अपर यमुना समझौते को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। करीब 32 साल से इस मुद्दे पर अलग-अलग स्तर पर बातचीत चल रही थी, लेकिन अब दोनों राज्यों की सहमति से इसे अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। समझौते के बाद अब यमुना जल परियोजना को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।Water Sharing Agreement
बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि पानी जैसे अहम संसाधन पर सहयोग की भावना से आगे बढ़ना समय की जरूरत है। इससे न सिर्फ दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा, बल्कि लाखों किसानों और आम लोगों को भी सीधा फायदा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जल प्रबंधन में राज्यों के बीच बेहतर तालमेल भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।
सूत्रों के अनुसार इस परियोजना के लागू होने के बाद राजस्थान के कई जल संकट वाले इलाकों को राहत मिलने की संभावना है। वहीं हरियाणा में भी जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे खेती-किसानी के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में भी सुधार आने की उम्मीद है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक के दौरान कहा कि राज्यों के बीच आपसी सहयोग और सहमति से ही बड़े विकास कार्यों को सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने इसे सहकारी संघवाद की मजबूत मिसाल बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के विकास और संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस समझौते का असर सिर्फ जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तर भारत में विकास परियोजनाओं को भी नई रफ्तार देगा। आने वाले समय में इससे जुड़े कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी शुरू हो सकते हैं, जिससे रोजगार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
फिलहाल दोनों राज्य सरकारों ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए उम्मीद जताई है कि इससे वर्षों पुरानी प्रक्रिया अब तेज होगी और आम जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा। जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में इसे एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।Water Sharing Agreement

