Sahaba and Ahle Bait : नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने सहाबा-ए-किराम और अहले बैत की फज़ीलत पर विस्तार से रोशनी डालते हुए कहा है कि इस्लाम मोहब्बत, अदब और एहतराम का दीन है। मुसलमानों पर जरूरी है कि वे रसूलुल्लाह ﷺ के सहाबा और अहले बैत दोनों से दिली मोहब्बत रखें, क्योंकि यही वह मुबारक हस्तियां हैं जिन्होंने दीन-ए-इस्लाम की हिफाजत, तबलीग और इशाअत में बेमिसाल कुर्बानियां पेश कीं।
अपने एक विस्तृत लेख में मौलाना रहमानी ने कहा कि कुरआन करीम ने नेकी और तकवा के कामों में एक-दूसरे का साथ देने का हुक्म दिया है। दुनिया में सबसे बड़ा नेकी का काम अल्लाह के दीन की दावत देना है और इस मिशन को सबसे बेहतर तरीके से अंबिया-ए-किराम ने अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि हर नबी के साथ ऐसे साथी मौजूद रहे जिन्होंने मुश्किल हालात में उनका साथ दिया और दीन की राह में हर तरह की कुर्बानी दी।
मौलाना ने कहा कि हजरत मूसा अलैहिस्सलाम के मददगारों, हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के हवारियों और दूसरे अंबिया के वफादार साथियों का जिक्र कुरआन में मौजूद है। लेकिन चूंकि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ पूरी इंसानियत के लिए आखिरी नबी बनाकर भेजे गए थे, इसलिए अल्लाह तआला ने आपको ऐसे सहाबा अता किए जो ईमान, इल्म, सब्र, बहादुरी और कुर्बानी में बेमिसाल थे।
उन्होंने कहा कि अहले सुन्नत वल जमाअत का अकीदा है कि हर वह शख्स जिसने ईमान की हालत में रसूलुल्लाह ﷺ की जियारत की और ईमान पर ही उसका इंतकाल हुआ, वह सहाबी है और तमाम सहाबा अदल व इंसाफ के पैमाने पर खरे उतरते हैं। उन्होंने मशहूर हदीस का हवाला देते हुए कहा कि रसूलुल्लाह ﷺ ने अपने सहाबा के बारे में फरमाया था कि उनके बारे में अल्लाह से डरो और उनसे मोहब्बत करो, क्योंकि सहाबा से मोहब्बत दरअसल नबी ﷺ से मोहब्बत की निशानी है।
मौलाना रहमानी ने कहा मोहब्बत हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है
मौलाना रहमानी ने कहा कि तमाम सहाबा काबिले एहतराम हैं, लेकिन उनके मरातिब में फर्क है। खलीफा-ए-अव्वल हजरत अबू बकर सिद्दीक रज़ि., हजरत उमर फारूक रज़ि., हजरत उस्मान गनी रज़ि. और हजरत अली रज़ि. का मुकाम सबसे बुलंद है। इसके अलावा बद्र के गाजी, बैअत-ए-रिजवान में शामिल सहाबा और सबसे पहले ईमान लाने वालों की भी खास फज़ीलत है।
अपने लेख में उन्होंने अहले बैत की अहमियत को भी विस्तार से बयान किया। उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह ﷺ के खानदान से मोहब्बत हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। कुरआन और हदीस में अहले बैत की फज़ीलत के बारे में कई जगह जिक्र मिलता है। खास तौर पर हजरत अली रज़ि., हजरत फातिमा ज़हरा रज़ि., हजरत इमाम हसन रज़ि. और हजरत इमाम हुसैन रज़ि. का मकाम उम्मत में बहुत ऊंचा है।
मौलाना ने कहा कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया कि हसन और हुसैन जन्नत के नौजवानों के सरदार हैं। इसी तरह हजरत फातिमा रज़ि. को तमाम मोमिन औरतों की सरदार बताया गया है। उन्होंने कहा कि अहले बैत से मोहब्बत और उनका एहतराम मुसलमानों की दीनी जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सहाबा और अहले बैत के बीच किसी प्रकार का टकराव खड़ा करना इतिहास और दीन दोनों के साथ नाइंसाफी है। हकीकत यह है कि सहाबा-ए-किराम हमेशा अहले बैत का सम्मान करते थे और अहले बैत भी सहाबा के साथ मोहब्बत और इखलास का रिश्ता रखते थे।
मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने अपने लेख के अंत में मुसलमानों से अपील की कि वे फितना, नफरत और तफरके से बचें तथा सहाबा और अहले बैत दोनों के साथ मोहब्बत, अदब और एहतराम का रवैया अपनाएं। उन्होंने कहा कि उम्मत की एकता और मजबूती इसी में है कि हम अपने असल दीन और अपने बुजुर्गों की तालीमात को मजबूती से थामे रखें।Sahaba and Ahle Bait :

